जिसमें 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस को संघर्ष दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, चूकि आज सम्पूर्ण भारत के आदिवासीयों पर सरकार और उद्योगपति द्वारा उत्पीड़न एवम् विस्थापन हेतु प्रयासरत है। अनेको सर्घष एवम् अन्दोलन से आदिवासीयों ने तत्कालीन राजसत्ता एवं शासन से अपने जल जंगल जमीन की सुरक्षा एवम् अस्तित्व एवं संस्कृति को बचाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षात्मक नियम कानून बनवाए।
आज की सरकारे उन सभी प्रभावी प्रवाधानों को शिथिल एवं विलोपित करने के लिए नियम कानूनों में संशोधन कर रही है ताकि आदिवासियों की जमीन लूटकर कॉर्पोरेट घरानों को सौंपा जा सके, इसलिए आज पुन: समस्त आदिवासी समाज को संघर्ष एवं आंदोलन कर अस्तित्व को बचाना पड़ेगा ये बातें झारखण्ड पार्टी के केन्दीया कार्जकारी अध्यक्ष सह पूर्व संसाद चित्रसेन सिकू ने कहा।
पूर्व संसाद सह केंदीया विशेष आमंत्रित सदस्य दुर्गा प्रसाद जामुदा ने कहा अब आदिवासी के पास समय नहीं बचा, एकजुट होना होगा नहीं तो हमारा अस्तित्व, संस्कृति, समाज सब खत्म हो जाएगा, आज की बैठक में मुख्य रूप से केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता महेन्द्र जामुदा, जिला उपध्यक्ष नितिन जामुदा, नरेश कोड़ा, विकास पिगुंवा, पारस नाथ नायक, राकेश कुमार जामुदा, लादूरा सवैया, जामदा चाम्पिया, राहुल बोयपाई, बाल किशन दोराईबुरु, जगन्नाथ हेम्ब्रम, दामु दोराईबुरु, दानु दोराईबुरु, सिगाराम बिरुली उपस्थित हुए।
