खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच ने याद दिलाया मंत्री व विधायकों को हेमंत सरकार की पोषण सम्बंधित घोषणाएं – न अंडा मिल रहा है और न दाल


 चाईबासा ( संतोष वर्मा ) :  आज खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम का प्रतिनिधिमंडल मंत्री जोबा माझी, चक्रधरपुर झामुमो विधायक सुखराम उरांव व खरसावां विधायक दशरथ गागराई से मिलकर हेमंत सोरेन सरकार द्वारा पिछले दो सालो में किये गए पोषण सम्बंधित घोषणाओं को याद दिलाया और मांग किया कि वे विधान सभा के मानसून सत्र में सरकार को उनकी घोषणाओं को याद दिलाएं और क्षेत्र के बच्चों के कुपोषण से लड़ने के विरुद्ध स्पष्ट प्रतिबद्धता दर्शाएं. मांग पत्र संलग्न.

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री व विधायकों से कहा कि राज्य सरकार ने पिछले दो साल में कई महत्त्वपूर्ण पोषण सम्बंधित घोषणाएं किया था।

जैसे 
1) मध्याह्न भोजन में बच्चों को पांच दिन प्रति सप्ताह अंडा देना।
2) आँगनवाड़ी में 3-6 वर्ष के बच्चों को 6 दिन प्रति सप्ताह अंडा देना।
3) जन वितरण प्रणाली में प्रत्येक कार्डधारी को सस्ते दर पर एक किलो दाल प्रति माह देना.  राज्य सरकार ने इस ओर न केवल कई बार घोषणा की थी बल्कि बजट सत्र व कैबिनेट में पारित भी किया था. लेकिन दुःख की बात है कि घोषणा के महीनों (सालों) बाद भी ये धरातल पर नहीं उतरे हैं. 

साथ ही, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से छूटे हुए लाखो परिवारों के लिए राज्य सरकार ने राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (हरा राशन कार्ड) कार्यान्वित किया जिसके तहत 14.21 लाख छूटे लोगों को जोड़ा गया है. अनेक वंचित परिवार को हरा राशन कार्ड तो मिल गया लेकिन नियमित रूप से राशन नही मिलता है. अनेक महीनों तक राशन न मिलने के बाद अभी जनवरी-फ़रवरी 2023 का बकाया राशन दिया जा रहा है. 

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री व विधायक को पश्चिमी सिंहभूम में कुपोषण के गंभीर स्थिति को भी याद दिलाया. 2019-21 के सरकारी आंकड़ों (NFHS-5) के अनुसार ज़िला के पांच वर्ष के कम उम्र के 62% बच्चे कुपोषित है. 2015-16 के सर्वेक्षण की तुलना में न के बराबर सुधार हुआ है. ज़िले के एक तिहाई व्यस्क महिलाओं का BMI सामान्य से कम है. विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों में यह भी बार-बार पाया जाता है कि राज्य के आदिवासी बच्चे अन्य समुदायों की तुलना में ज़्यादा कुपोषित हैं.

प्रतिनिधिमंडल को मंत्री जोबा माझी ने कहा कि टेंडर और ठेकेदारतय न होने के कारण आंगनवाड़ी में अंडा चालू नहीं हो रहा है. मंच ने याद दिलाया कि आंगनवाड़ी में ठेकेदारी व्यवस्था न्यायलय के नियमों के विरुद्ध होगा एवं विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू होना चाहिए. वहीं चक्रधरपुर विधायक ज़मीनी स्थिति को मानने से ही इनकार कर दिए और प्रतिनिधिमंडल के साथ बुरी तरीके से पेश आये. यह दुःख की बात है कि जन समर्थन से बनी राज्य सरकार क्षेत्र के आदिवासी-दलित-वंचितों के पोषण व खाद्य सुरक्षा के प्रति इतनी उदासीन है.

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री व विधायको को संलग्न मांग पत्र दिया और राज्य सरकार से निम्न मांग किया :

• आंगनवाड़ी व विद्यालयों में मध्याह्न भोजन में बच्चों एवं आंगनवाड़ी में धात्री व गर्भवती महिलाओं को प्रति दिन अंडा दिया जाए. वर्तमान में मध्याह्न भोजन में मिल रहे दो दिन अंडे की खरीद की व्यवस्था के तरह ही आंगनवाड़ी में भी विकेंद्रीकृत खरीद की व्यवस्था लागू हो और न कि केंद्रीय कांट्रेक्टर आधारित व्यवस्था.

• जन वितरण प्रणाली अंतर्गत सभी कार्डधारियों को सस्ते दर पर कम-से-कम एक किलो दाल प्रति माह दिया जाए.

• सभी हरे राशन कार्डधारियों को मुआवज़ा सहित बकाया राशन दिया जाए व हर महीने नियमित राशन सुनिश्चित किया जाए.

इस सप्ताह मंच का प्रतिनिधिमंडल ज़िला के अन्य विधायकों से मिलकर भी मांग को रखेगा. प्रतिनिधिमंडल में निम्न सदस्य शामिल थे – अमित होनहागा, अजीत कांडेयांग, अशोक मुंडरी, नारायण कांडेयांग, प्रेम गागराई, रामचंद्र माझी, संदीप प्रधान, सुरेश जोंको.

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