चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : झारखंड पुनरूत्थान अभियान की पदयात्रा आज ओडिसा के चंपुआ प्रखंड से सुबह शुरू होकर झुम्पुरा प्रखंड के दुधकुंडी गांव तक पहुंची। यहां दुधकुंडी गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक की गई।झारखंड पुनरूत्थान अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु ने बैठक में उपस्थित ग्रामीणों को जमशेदपुर से डुबरी कालिंगनगर तक पदयात्रा करने का उद्देश्य बताया। ग्रामीणों से कहा जमशेदपुर से डुबरी,कालिंगनगर के बीच इन क्षेत्रों में अधिकतम आदिवासी मूलवासी ही रहते है।
जिसमें मूल रूप से पांच जिला आता है,कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम,सराइकेला खरसावां, प.सिंहभूम,ओडिसा के क्योंझर और जाजपुर जिला। इन आदिवासी मूलवासी बहुल जिला में टाटा कंपनी डेवलपमेंट कॉरिडोर परियोजना चलाना चाहती है।जबकि यह पांचों जिला अनुसूचित जिला है।
अनुसूचित जिला होने के कारण ऐसे परियोजना को लागू करने के पहले पारंपरिक ग्रामसभा से सहमति लेना चाहिए। पर झारखंड और ओडिशा सरकार ने अब तक पेसा कानून लागू नहीं की है।इ ग्रामसभा के नाम पर फर्जी ग्रामसभा की जा रही है। टाटा कंपनी अचानक जमशेदपुर से कालिंगनगर के बीच 450 गांव में विकास गलियारा का काम करना चाहती है।जो कहीं न कहीं कंपनी का दीर्घकालिक परियोजना है। जिसे भविष्य में कंपनी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत टाटा से जमशेदपुर को जोड़ना चाहती है। जिससे आदिवासी मूलवासियों के सामने अनैच्छिक विस्थापन की स्थिति बनेगी।
पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि देश और राज्य के सरकार को बड़े कंपनी वाले ही चला रहे है। कंपनी वालों को जमीन चाहिए उधोग लगाने के लिए तो आदिवासी मूलवासियों का जमीन ही दिखाई देता है। और उधोग लगाने के लिए सरकार नियम कानूनों में शिथिल कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। दुधकुंडी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता साधुचरण मुंडा ने कहा कि हमारे जुमपुरा प्रखंड और दुधकुंडी गांव में विकास गलियारा के नाम पर किसी तरह का कोई ग्रामसभा या कोई चर्चा हो रही है।
लेकिन विकास गलियारा के मामले में ग्रामीणों को सचेत रहना चाहिए। झारखंड पुनरूत्थान अभियान सामाजिक संगठन की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने वाली यह अभियान स्वागत योग्य है। चंपुआ ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक चेयरमैन मोतीलाल लागुरी ने कहा आदिवासी मूलवासियों पर विकास के नाम पर कोई भी परियोजना थोपने की परिपाटी ठीक नहीं है। झारखंड पुनरूत्थान अभियान के पदयात्रियों को दुधकुंडी गांव के ग्रामीणों द्वारा आराम करने के लिए उत्तम व्यवस्था करके रखा गया।
जहां बैठक के बाद दोपहर का भोजन और आराम भी की गई। बैठक में झारखंड पुनरूत्थान अभियान के पदयात्री और दुधकुंडी गांव के ग्रामीण उपस्थित थे।

