सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : रजो संक्रांति उत्सव सरायकेला खरसांवा जिला के लोगों में आनंद भर दिया।
परम्परा के मुताबिक पैडौं के डाली में झुला बनाया गया था। बालिकाएं झुले में बैठी। और लोक गीतों से महफिल सजाया।मान्यता है कि धरती माता मासिक धर्म से गुजराती है।धरती के प्रति सम्मान में यह उत्सव होती है। किसान कृषि कार्य से दूर रहते हैं। इस पर्व को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं।तीन दिन तक चलने वाली इस रजो पर्व रस्म को आज भी निभाया जा रहा है। पर्व में महिलाएं, बालिकाएं एवं किशोरियों में भी खास उत्साह रहा।
जोरडीहा गाँव में भी महिला, किशोरी एवं बालिकाओं ने झूला का आनंद उठाया। यहां तक कि रजो पर्व के अवसर पर कई गांव में छऊ उत्सव देखने को मिला। सरायकेला के साहेबगंज, दुधि गाँव में छऊ नृत्य का लोगों ने आनंद उठाया। मुरुप गाँव में भी छऊ नृत्य उत्सव हुई। लोगों ने रजो के मौके पर छऊ नृत्य का भी आनंद उठाया। इससे पहले कार्यक्रम का भाजपा नेता गणेश महाली ने उद्घाटन किया। मौके पर हेमसागर प्रधान, हेमलाल महतो, गोराचांद हो आदि ग्रामीण उपस्थित थे।
राजनगर प्रखंड के कुंवरदा में भी रजो संक्रांति के अवसर पर लोगों ने रातभर छऊ नृत्य का आनंद उठाया। श्री श्री विश्वनाथ बाबा सेवा समिति द्वारा कार्यक्रम आयोजित की गई थी। समिति के दशरथ बाबाजी, दिलीप महतो, कालीचरण महतो आदि ग्रामीण कार्यक्रम में जुटे रहे। रात भर लोगों ने नृत्य का आनंद उठाया।
प्रचंड गर्मी में भी लोग झुला पर्व या रजो पर्व में खुसियां बटोरी।इस उत्सव ने लोगों में आनंद भर दिया।

