चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : झारखंड पुनरूत्थान अभियान की पदयात्रा आज कुईडा, डेबरासाई, बिनसाईं, करंजिया, जुलडीहा तक चलकर रुक गया है। आज पदयात्रा के क्रम में देबरासाई और जुलडीहा में ग्रामीणों के साथ बैठक की गई। आज के पदयात्रा कार्यक्रम का नेतृत्व झारखंड पुनरुत्थान अभियान के जगन्नाथपुर संयोजक मंडली क्रमश विकास केराई,गुरुचरण सिंकू,आशा पूर्ति,सुमंत ज्योति सिंकु,विनीत लागु री,नेहा हेंब्रम, पेलोंग पूर्ति,विश्वनाथ बोबोंगा और अन्य के द्वारा की गई। डेबरासाई गांव में बैठक की अध्यक्षता सिद्धेश्वर हेंब्रम ने की जबकि जुलडीहा गांव में ग्रामीण मुंडा बामिया सिंकु ने किया।
झारखंड पुनरूत्थान अभियान की आयोजित पदयात्रा कार्यक्रम में जमशेदपुर से चलकर पहुंचे पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू और झारखंड पुनरूत्थान अभियान के संयोजक मंडली में सन्नी सिंकु,अमृत मांझी,सुरेश महतो,महेंद्र जामुदा,मंगल सरदार,रेयान सामड,आकाश टुडू,मोतीलाल मुंडा,सावन चतोंबा, डोबरो पूर्ति का जुलडीहा गांव में बच्चियों द्वारा अर्थी उतारी गई। बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि जिस प्रकार कहा जाता है कि जिस स्थान पर सोना हो तो वहां सांप का वास होता है। सोना को चोरी करने का सोच रखने वाले लोगों को सांप को मरना पड़ता है। उसी प्रकार हम आदिवासी जिस जमीन पर रहते है उस जमीन के नीचे संसाधन की प्रचुरता है। लोहा,कोयला,अभ्रक,बॉक्साइट, सोना, यूरेनियम से लेकर अन्य खनिज संसाधन है। सरकार के साथ मिलकर टाटा स्टील लिमिटेड जैसे बड़े कंपनियों को बहुत पहले से हमारे जमीन के नीचे का खान के बारे पता चल गया है। उस खान को ले जाने के लिए भिन्न भिन्न तरह का हथकंडा अपना रहा है। इसलिए गांव के ग्रामीणों को आंख, कान खोलकर रखना जरूरी है।
झारखंड पुनरूत्थान अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु ने टाटा स्टील फाउंडेशन की डेवलपमेंट कॉरिडोर के बारे ग्रामीणों को कहा लगभग टाटा स्टील लिमिटेड नोआमुंडी और टाटा सहित जोड़ा, सुखिंदा और अन्य स्थान पर सौ वर्ष पहले से स्थापित है।
लेकिन सौ वर्षो से भी अधिक वर्ष बीत गया पर जमशेदपुर से कालिंगनगर के बीच कभी डेवलपमेंट कॉरिडोर के तहत कल्याण के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं अपनाया। अब जब टाटा से कालिंगनगर के बीच जिस रास्ते से वोल्वो बस में कंपनी अपने इंजीनियर को ले जाने और लाने का काम करती है,उसी रास्ते के 450 गांव में अचानक डेवलपमेंट कॉरिडोर की बात करे तो यह कंपनी का दीर्घकालिक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की परिकल्पना हो ही सकती है। इसलिए 286 किलोमीटर के दूरी के बीच 450 गांव में डेवलपमेंट कॉरिडोर परियोजना के बारे में ग्रामीणों को जागृत करने का काम झारखंड पुनरूत्थान अभियान कर रही है। और इसीलिए उसी रास्ते पदयात्री पदयात्रा कर रहे है। देबरासई, जुलडीहा के बैठक में सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
