रक्तदान जैसी व्यवस्था में आगे आना चाहिए नव पीढ़ी को : ब्लडमैन
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : जिस संस्था का, समूह का मकसद ही हो इंसानियत और मनुष्य सेवा, मानव सेवा, उस समूह के बारे में क्या कहना। आज शहर चाईबासा में एक ऐसा ही समूह है जो हमेशा मानव सेवा में तत्पर रहता है, ना तो वो समय देखता है, ना मौसम को देखता है, ना ही कोई काल को देखता है, बस मानव सेवा में ही तत्पर रहता है l वो समूह है चाईबासा के उरांव समाज रक्तदान समूह, चाईबासा। उक्त समूह हमेशा से ही मानव सेवा के लिए तत्पर रहती है। समूह का मकसद है कि किसी भी इंसान को रक्त की कमी ना हो, रक्त के लिए उनको संघर्ष न करना पड़े। पिछले कई वर्षों से यह समूह लगातार मानव सेवा में तत्पर हैl
"विश्व रक्तदान दिवस" के अवसर पर समूह के मुख्य संचालक "ब्लडमैन" लालू कुजुर के संज्ञान में आया कि सदर प्रखंड (चाईबासा) के परमपंचो नरसंडा गांव के लाल सिंह कुंटीया जिन्हें ब्रेन हेमरेज हो गई है, और वे वर्तमान हिंदपीढी राज हॉस्पिटल रांची में इलाजरत है, तत्काल उसे तीन यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ रही है, समूह के मुख्य संचालक "ब्लडमैन" लालू कुजुर बिना देर किए देर शाम अपने समूह के सक्रिय सदस्य शुभम लकड़ा, राकेश लकड़ा और खुद रांची जाकर अपना रक्त देकर उक्त मरीज की जान बचाने में अपना कर्तव्य को निभाने का सार्थक प्रयास किया। मालूम हो कि उक्त समूह यह पहली बार नहीं बल्कि इससे कई बार पहले उड़ीसा के विभिन्न शहरों के अलावे जमशेदपुर, चक्रधरपुर आदि शहरों में जाकर रक्त उपलब्ध कराने का कार्य किया है।
इसके अलावे अपने शहर चाईबासा में तो शायद ही कोई दिन ऐसा हो की छूट जाए, अपितु प्रतिदिन न्यूनतम दो-तीन यूनिट रक्त उपलब्ध कराने के लिए यह समूह मरीजों के साथ खड़ा रहा है। एक सवाल के जवाब में समूह के मुख्य संचालक "ब्लडमैन" लालू कुजुर ने कहा कि हमारा मकसद ही है कि हम मरीजों में रक्त की कमी को होने ना दें, सबसे बड़ा हमें यह मौका मिलता है कि एक इंसान को इंसान से जोड़ने का, इसे हम खोना नहीं चाहते हैं, क्योंकि रक्त ना ही किसी दुकान में बिकता है, ना ही किसी मशीन में बनता है, रक्त एक इंसान के शरीर से दूसरे इंसान को ही जाता है, और रक्त को ही एक ऐसी व्यवस्था ईश्वर ने दी है जो यह ना जात को देखता है, ना धर्म को देखता है, ना मजहब को जानता है, बस इंसान को इंसान से जोड़ता है। मुझे रक्त की व्यवस्था करते हुए बहुत ही खुशी होती है, और हमारा प्रयास है कि हम सभी अंतिम सांस तक इस मुहिम को जारी रखेंगे।
हमारी कोशिश रहती है कि सिर्फ हम ही नहीं बल्कि समाज में आज के नव पीढ़ी भी इस मुहिम में शामिल होकर अपनी सेवा प्रदान करें, क्योंकि रक्तदान करने से अच्छा लगता है, हम अपने कर्तव्य को निभाते हैं, अपने इंसानियत धर्म को निभाते हैं, और सबसे बड़ा फायदा यह है कि हम बहुत बड़े-बड़े बीमारियों से भी बचते हैं। इसलिए आज समाज के हर एक नवयुवकों को इस शुभ कार्य में अपना अपना योगदान देना चाहिए। उरांव समाज रक्तदान समूह, चाईबासा के सभी सक्रिय सदस्य एक फौजी की तरह हमेशा तैयार रहते हैं कि कभी भी कहीं से भी सूचना मिले और 3 माहस पश्चात हम अपना रक्तदान कर इंसानियत धर्म को निभाए l
इस अवसर पर किशन बरहा, अनिल बरहा, सुरज नीमा, रवि खलखो, बजरंग खलखो कुलदीप लिण्डा कुणाल रवि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
