हाट्सएप ग्रुप बनाकर बालू माफिया वाहन मालिकों से वसूलते हैं पैसे
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : पश्चिमी सिंहभूम जिला में बालू तस्करी का धंधा जोरों पर है,अब गुटका माफिया, हवाला कारोबारी जैसे सिंडिकेट जगन्नाथपुर में बालू की तस्करी करा रहें हैं।सूत्रों की माने तो ओडिसा से अवैध खनन और डुप्लीकेट चालान पर प्रत्येक दिन सौ हाइवा बालू झारखंड में लाया जा रहा है,जिससे प्रति दिन लाखों का राज्य को राजस्व की हानि हो रही है। इधर जिला प्रशासन अब तक बालू घाट के नीलामी नही किया है,लेकिन खनन विभाग बालू स्टॉक रखने वाले का लिस्ट जारी किया है,जो हास्यअसपद है। जबकी कोल्हान के डीआईजी अजय लिंडा के सख्ती से अवैध खनन पर लगा अंकुश, बालू और गिट्टी की काला बाजारी बंद। गौर तलब है कि पुरे झारखंड में सरकार के द्वारा टास्क फोर्स के जरिए अवैध खनन पर लगाम लगाने की मुहिम चल रही है, वहीं कोल्हान के डीआईजी के कड़े तेवर अपनाने दूसरे राज्य से फर्जी चालान पर बालू का कारोबार किए जाने का मामला पकड़ में आया है, अवैध ढंग से गिट्टी क्रेशर से एक चालान में पांच हाईवा गिट्टी का कारोबार किए जाने की सूचना प्राप्त हुई है। हटगामहरिया चाइबासा रोड में फर्जी चालान पर सैकड़ों हाईवा गिट्टी, बालू सफ्फलाई किए जाने की भी चर्चा है, जिसकी जांच पुलिस प्रशासन कर रही है।
हाल के दिनों में पूर्व विधायक श्री मंगल सिंह बोबोंगा के द्वारा अवैध खनन का मामला उठा चुके हैं।
इधर खनन विभाग, पुलिस-प्रशासन एवं बालू माफियाओं की मिलीभगत से जगन्नाथपुर थाना अन्तर्गत जैतगढ़ ओपी क्षेत्र के मुन्डुई, गुमुरिया, कुआपड़ा बालू घाट से हाइवा व ट्रैक्टर से दिन-रात बालू की अवैध तस्करी बडे़ पैमाने पर जारी है। इस तस्करी को अंजाम जैतगढ़ क्षेत्र के एक शिक्षक एवं उसके आधा दर्जन सहयोगियों की देख रेख में दिया जा रहा है। इस अवैध कारोबार में आसपास गांवों के लगभग 40-50 ट्रैक्टर व दर्जनों हाइवा व ट्रक को लगाया गया है। बालू तस्करी में शामिल इन वाहनों से प्रतिमाह एक फिक्स रकम की वसूली (लगभग 8 लाख रुपये) उक्त बालू माफियाओं के द्वारा की जाती है और विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों व कुछ राजनीतिक लोगों के पास अलग-अलग हिस्सा पहुंचाया जाता है। बाकी के पैसों की बंदरबांट स्वयं की जाती है।
आठ लाख रुपये प्रत्येक माह होती है वसूली
बालू तस्करी में लगे कुछ विश्वस्त ट्रैक्टर मालिकों ने “लगातार न्यूज” को चौकाने वाली जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बालू माफिया इस तस्करी में शामिल प्रत्येक ट्रैक्टर मालिकों से प्रतिमाह 15 से 18 हजार रुपये एक मुस्त रकम की वसूली करते है। लगभग 40-50 ट्रैक्टर से यह वसूली होती है। हाइवा से अधिक रकम की वसूली होती है. ऑफ सीजन अर्थात बारिश के समय में भी 15 हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर माफियाओं को देना पड़ता है। लगभग आठ लाख रुपये प्रत्येक माह उक्त बालू घाटों से अवैध बालू उठाव करने वाले वाहनों से वसूला जाता है। जेसीबी मशीन से वाहनों में बालू लोड किया जाता है।
पैसे नहीं देने वाले वाहनों पर होती है कार्रवाई
जब माफियाओं से ट्रैक्टर मालिक पूछते हैं कि आखिर हमारे क्षेत्र के घाट से बालू उठाव के एवज में हमलोग से पैसा क्यों लिया जाता है और यह पैसा कहां जाता है?
इस पर उक्त बालू माफियाओं द्वारा हिसाब दिया जाता है कि 1.10 लाख चाईबासा में खनन विभाग के कुछ पदाधिकारियों को दिया जाता है। इसके बाद जगन्नाथपुर क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन पुलिस-प्रशासन के लोगों व जनप्रतिनिधियों को उनकी योग्यता अनुसार 70 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक प्रतिमाह पहुंचाया जाता है। इसके साथ ही माफिया इस कार्य में शामिल वाहनों से संबंधित एक सूची भी उक्त अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे किसी भी परिस्थिति में इन वाहनों को न पकड़े। पैसे पहुंचने के बाद रात-दिन ट्रैक्टर से बेखौफ होकर लोग बालू की अवैध तस्करी करते हैं। सूत्रों ने बताया कि अगर कोई वाहन मालिक इन माफियाओं को पैसा दिए बगैर बालू की ढुलाई करता है तो ऐसे वाहनों की सूचना पुलिस-प्रशासन को देकर उसे पकड़वा दिया जाता है। पुलिस-प्रशासन व खनन विभाग भी ऐसे वाहनों पर कार्रवाई कर केवल खानापूर्ति कर देती है।
व्हाट्सएप ग्रुप से संचालित हो रहा कारोबार
व्हाट्सएप पर की गई बातचीत
सूत्रों ने बताया की बालू माफियाओं की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि अधिक पैसे का कोई विरोध करता है तो उसके साथ मारपीट तक की जाती है। इस अवैध कारोबार को संचालित करने के लिए ट्रैक्टर मालिकों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है, इसी के जरिए जरूरी संदेश दिया जाता है और पैसों की उगाही की जाती है। जो पैसा नहीं देता है उसे पैसा के बदले माफियाओं के बताए स्थान पर मुफ्त में बालू गिराना पड़ता है। इस अवैध बालू तस्करी में शामिल सभी ट्रैक्टर मालिकों को विकट स्थिति में चलान उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था होती है। जिससे वाहन पकडे़ जाने के बाद वह उपलब्ध कराया जाता है।
शिकायत के बाद नहीं होती कार्रवाई
ग्रामीण सूत्र ने बताया कि इस बालू तस्करी को लेकर एक ग्रामीण ने 13 एवं 14 मई को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को फोन कर सूचना दी थी। लेकिन बालू माफियाओं के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। सूचना देने वाले को अब इस बात का भी भय है कि कहीं पुलिस सूचना देने वालों का नाम बालू माफिया को न बता दे, जिससे उस पर खतरा बढ़ जाये। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व ही पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने जगन्नाथपुर बाजार से एसडीओ कार्यालय तक अवैध बालू तस्करी के खिलाफ रैली निकाल कर प्रदर्शन किया था। साथ ही एसडीओ को मुख्यमंत्री, खनन विभाग, उपायुक्त आदि के नाम मांग पत्र सौंपा था। इसके बावजूद यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है।
