जिला प्रशासन की पहल से बेरोजगार युवा पर्यटन से जुड़ कमा रहे अच्छी आमदनी



जिले के 06 जलाशय और 02 खदान तालाब में मत्स्य पालन के साथ-साथ मोटर बोट संचालन रोजगार का एक अहम पहल साबित हो रहा


केज पद्धति से मछली पालन कर ग्रामीण कर रहे अपना जीवन यापन में बदलाव साथ ही साथ विस्थापितों को नौका विहार से मिल रहा रोजगार


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : झारखंड राज्य का पश्चिम सिंहभूम जिला एक वन पर्यावरण, खनिज जल संसाधन इत्यादि से परिपूर्ण एक मनोरम जिला है। यहां उपस्थित अनेकों संसाधन से भारत की अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान रहा है। फिर भी यहाँ युवा वर्ग का पलायन करना एक विकट समस्या है। प्रायः देखा जाता है, कि शिक्षित बेरोजगार युवक/युवती जिला छोड़कर किसी और राज्य के तरफ रोजगार हेतु पलायन कर जाते हैं। जल संसाधन की ओर देखें तो इस जिले में 06 जलाशय और अनेकों खदान तालाब हैं।जिसका निर्माण सिंचाई के उद्देश्य से किया गया है। निर्माण के दौरान वहां के स्थानीय का विस्थापन हो गया और उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी। जिससे वहां के लोग मुख्यधारा से विचलित होकर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो गए थे। 


मत्स्य व्यवसाय आज तेजी से बढ़ रहा है, एवं ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में अहम भूमिका निभा रही है। मत्स्य व्यवसाई से ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य रोजगार एवं आय के सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जिला मत्स्य कार्यालय के सार्थक पहल से विस्थापित लोगों को केज पद्धति से मछली पालन करने हेतु प्रेरित किया गया जिसका बेहद सकारात्मक पहल देखने को मिला लोगों को रोजगार के साथ-साथ खाने के लिए मछली भी पर्याप्त रूप से मिलने लगा।


जिले के कुल 06 जलाशय और 02 खदान तालाब बहुत ही सुदूरवर्ती क्षेत्र में निर्मित हैं। जहाँ आमतौर से लोग जाने से भी डरते थे। जिसे देखते हुए सभी जलाशयों में पर्यटन के दृष्टिकोण से मोटर बोट/ पेडल बोट मत्स्य जीवी समितियों को दिया गया ताकि वे केज पद्धति के साथ-साथ पर्यटन से भी अच्छी आमदनी उपार्जित कर सकें। जिले के सदर प्रखंड में मोदी जलाशय, चक्रधरपुर प्रखंड में जैनासाई जलाशय, बंदगांव प्रखंड में नकटी जलाशय, सोनुआ प्रखंड में पनसुआ जलाशय, मँझगांव प्रखंड में बेलमा जलाशय, मंझारी प्रखंड में तोरलो जलाशय, 02 खदान तालाब सदर प्रखंड में कमरहातु तालाब, जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब मौजूद है।


 नकटी और पनसुआ सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण असामाजिक गतिविधियां बहुत ज्यादा थी परंतु जिला प्रशासन के द्वारा मोटरबोट उपलब्ध करा देने के बाद असामाजिक गतिविधियों में बेहद कमी देखी गई है। जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब में महिला समूह के द्वारा केज पद्धति से मछली पालन कर अपनी आजीविका को चलाया जा रहा है।


केज पद्धति से मछली पालन करने पर एक केज बैटरी से लगभग 03 से 04 टन मछली का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। जिससे लगभग 1.5 लाख से 02 लाख तक की आमदनी कमाया जा सकता है। वर्तमान में जिले में लगभग विभिन्न जलाशयों में 400 केज बैटरी मौजूद है। अगर पर्यटन के क्षेत्र में देखा जाए तो मत्स्य पालन समिति के द्वारा जानकारी साझा किया गया कि पर्यटन के सीजन के समय मोटर वोट से उन्होंने लगभग प्रतिमाह 1.5 लाख से 02 लाख तक कि आमदनी आसानी से अर्जित किया है।

आइए जानते हैं कुछ मत्स्य कृषकों की सफलता की कहानी


★ सुब्रत सेन प्रधान, पिता- चतुर्भूज प्रधान, ग्राम- नालियाडीह पंचायत- चैनपुर प्रखण्ड-बंदगाँव के स्थायी निवासी है। ये एक शिक्षित समाज सेवी हैं रोजगार ढूंढ़ने के क्रम में यह पाया की नकटी जलाशय में मछली पालन से संबंधित रोजगार किया जा सकता है एवं लोगो को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। उन्होने यह भी पाया कि नकटी के लोग मुख्य धारा से विचलित हो कर असामाजिक कार्यों में लिप्त हो गए हैं। श्री प्रधान जी ने जिला मत्स्य पदाधिकारी के सम्पर्क में आकर इस संबंध में विचार विर्मश किया। जिला मत्स्य पदाधिकारी ने उन्हें सुझाव दिया की वहाँ के विस्थापितों की एक समिति बना कर केज पद्धति से मछली पालन कर रोजगार मुहैया कराये एवं मुख्य धारा से जोड़ें। नकटी जलाशय दूर एवं आंतरिक भाग में स्थित है साथ ही साथ नक्सल प्रभावित है। यहाँ सरकार की कोई भी योजना लोगो तक पहुँचाना इतना आसान नहीं है। परन्तु जिला मत्स्य पदाधिकारी के अथक प्रयास से आज वहाँ हर कुछ संभव हो पाया। आज वहाँ के लोग केज पद्धति से मछली पालन योजना से जुड़कर एवं मुख्य धारा में आकार खुशहाल जीवन जी रहे हैं।


★ दयानन्द नायक, पिता स्व० लक्ष्मण नायक, ग्रा०- पोड़ाहाट, पंचायत- बोयाकेडा, प्रखण्ड- सोनुआ के निवासी हैं। इनकी कहानी पलायन एवं मजदुरी से जुड़ी है। इनके परिवार के सभी लोग इनपर अश्रित हैं। मजदुरी करके किसी तरह से अपना पेट भर पाते थे एवं काम के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। परन्तु इन्होने विभाग के सम्पर्क में आकर रोजगार मुहैया की इच्छा जताई। उन्हें समिति से जुड़ कर केज पद्धति से मछली पालन करने हेतु सुझाव दिया गया एवं संबंधित सारी सुविधाएं दी गई। आज ये एक सुख शांति का जीवन यापान कर रहे हैं। उन्हें रोजगार के लिए अब दूसरों का दरवाजा खटखटाना नहीं पडता है।


★ युधिष्ठीर भुमिज, पिता- सुकनाथ भुमिज, ग्राम- बांसकाटा, पंचायत बोयाकेडा, प्रखण्ड- सोनुआ के निवासी है। ये बहुत गरीब परिवार से हैं, इनके पास खेती करने के लिए भी पार्यप्त जमीन नहीं है जिसमे कि इनका जीवन यापन हो सके। परिवार का पेट पालने के लिए इनको मजदूरी भी करनी पड़ती थी। इनकी स्थिति इतनी दयनीय थी की चाह कर भी घर परिवार को छोड़ कर दुसरे जगह काम करने नहीं जा सकते थे। एक अच्छे रोजगार हेतु उम्मीद की किरण जब दिखी तब वो मत्स्य विभाग के सम्पर्क में आए, जहाँ उन्हें सलाह दी गई की विस्थापित लोगों के साथ समिति से जुड़ कर केज में मछली पालन कर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण आसानी से कर सकते हैं। वाकई में उनकी उम्मीद आज विश्वास में परिवर्तित हो गई है एवं आज खुशहाल जीवन जी रहे हैं।


★ अर्जुन महापात्रा, पिता स्व० मुन्ना महापात्रा, ग्राम- बांसकाटा, पंचायत- बोयाकेड़ा, प्रखण्ड- सोनुआ के स्थायी निवासी है। जलाशय बनने के बाद उनका जमीन जयदाद डैम मे चला गया। इस वजह से ये बेरोजगार हो गए। छोटी मोटी दुकान से ये अपना भरण पोषण कर रहे थे, परन्तु इतनी आमदानी नहीं थी की खुशहाल जीवन यापन कर सके। श्री महापात्रा एक शिक्षित बेरोजगार थे, इस वजह से मत्स्य विभाग की कल्याणकारी योजना के बारे में समझे और विस्थापितों के लिए केज पद्धति से मछली पालन हेतु पनसुवा में समिति का गठन किया इस सराहनीय कदम से वहाँ के लोग मुख्य धारा में आकर खुशहाल जीवन जी रहें है। श्री महापात्रा इस योजना से लाभ ले कर अच्छा मकान बना कर अपने बच्चों को अच्छे स्कुल में पढ़ा रहें है।

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