छह माह बितने के बाद भी नहीं हुई अब तक कार्रवाई जगन्नाथपुर सीएचसी का तत्कालिन लेखापाल पर.

मामला जगन्नाथपुर से मालूका कि दूरी सात किमी को 22 किमी दिखाकर ममता वाहन के नाम लाखौं रूपए की निकासी का


जांच दल में शामिल एसीएमओ जगदीश प्रसाद व डीपीएम बिजय कुमार सिंह नें पाया था अवैध निकासी का अरोप सही।

चाईबासा संतोष वर्मा ) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के स्वास्थय विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ झाला चल रहा है। कहीं फ्रनिचर के खरिददारी के नाम पर हो रही लूट। लेकिन जांच में अरोप सही पाने के बाद भु नहीं तो कार्रवाई। ऐसा ही एक मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले में अनुबंध पर बहाल लेखापालों द्वारा कभी फर्जी भाउचर बना और भेंडर बनाकर लाखों रूपये की निकासी किया जा रहा है तो वहीं स्वास्थ्य विभाग में चल रहे ममता वाहन में विभाग द्वारा निर्धारित दूरी के बजाय अधिक दूरी का किमी दिखाकर ममता वाहन संचालक के खाते में लेखापाल द्वारा रूपये का निकासी कर विभाग के खजाने को लूटने का काम किया जा रहा है।
                                                                                 वहीं इस मामले की जांच स्वास्थय विभाग के एसीएमओ जगदीश प्रसाद और डीपीएम बिजय कुमार सिंह द्वारा छह माह पहले किया था।जांच के दौरान लेखापाल मनोज साव के उपर लगे अरोप भी सत्य पाया गया लेकिन अज छह माह बित जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कि गई बल्की जगन्नाथपुर के बजाय उसे मझगांव सीएचसी में प्रतिनियुक्त कर दिया गया।

 जबकी शिक्षा विभाग में इसी तरह का मामला हुआ तो जांच के बाद दोशी पाने पर उपायुक्त के द्वारा र्बखास्त कर दिया गया।

छह माह पहले जांच करते जांच दल

जबकी तत्कालिन लेखापाल पर अब तक कार्रवाई नहीं किया जाना स्वास्थय विभाग के जांच दल पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।इस गड़बड़झाला के मामले को लेकर गोईलकेरा निवासी नितिन जामुदा नें पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड के सीएचसी समेत सभी सीएचसी में चल रहे ममता वाहनों का लेखा जोखा सूचना के आधार पर मांगा गया था. हालांकि जगन्नाथपुर सीएचसी के द्वारा ही केवल ममता वाहन का लेखा जोखा का ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग को अब उपलब्ध कराई है, जबकि अन्य सीएचसी में चल रहे ममता वाहनों का ब्यौरा नहीं दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दिए गए ममता वाहन के ब्यौरा में पाया गया कि तत्कालिन लेखापाल जगन्नाथपुर के द्वारा ममता वाहन संचालक दिनेश शर्मा के खाते में मालुका की दूरी 7-8 किमी के बजाय 22 किमी दिखा कर राशि की निकासी की गई है।

उपायुक्त ने किया था जांच दल का गठन

इधर, उपायुक्त ने मामले को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया था, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के डीटीओ भारती मिंज, एसीएमओ डॉ जगदीश प्रसाद, डीपीएम विजय कुमार और एक सहायक कर्मी थे. तथा दुसरे जांच दल में जगन्नाथपुर के कार्यपालक दण्डाधिकारी सह कुमारडुंगी के अंचलाधिकारी सुषमा लकड़ा को बनाया गया था. जिला प्रशासन की ओर से जांच दल के पदाधिकारी सुषमा लकड़ा द्वारा मामले की जांच की गई, जिसमे भी पाया गया कि मालूका से जगन्नाथपुर की दूरी 22 किमी दिखाकर रूपये कि निकासी हूई है, इतना ही नही और कई गांव का दूरी अधिक दिखाकर ममता वाहन के नाम पर भुगतान किया गया. यह प्रमाण पंजिका में लेखपाल के हस्ताक्षर से हुई थी. छह माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा तीन सदस्य जांच दल जगन्नाथपुर पहुंची और मामले की करीब चार घंटे तक जांच की गयी. जांच में ममता वाहन के पंजिका में लेखापाल के द्वारा दर्शाया गया कि किमी निर्धारित दूरी अधिक पाया गया, जबकि वास्तव में जगन्नाथपुर से मालूका की दुरी आठ किमी ही है।

जांच दल में आरोप पाया गया सही

इस दौरान एसीएमओ डॉ जगदीश प्रसाद व डीपीएम विजय कुमार के द्वारा ममता वाहन संचालक दिनेश शर्मा सै पूछताछ किया गया तो उसने भी कभी 25 किमी तो कभी 30 किमी जगन्नाथपुर से मालूका की दूरी बताया, फिर सात किमी दूरी बताया. संतोषजनक और बरगलाने जैसी जानकारी जांच दल को दी गई, जिससे संतुष्ट नहीं हुए जांच दल और चार घंटे के जांच में तत्कालिन लेखापाल मनोज साव पर लगाया गया आरोप सही साबित हुआ और तीन वर्ष का लेखा जोखा के बही खाते जांच दल सिज कर अपने साथ ले गए. इधर जांच दल में बीपीएम विजय कुमार नें ममता वाहन के नाम पर हुई लूट की जानकारी सही पाए जाने पर इसकी जानकारी दुरभाष पर अपने वरीय पदाधिकारी को दे दी है।

लेखापाल की तो नौकरी जायेगी, होगा एफआईआर दर्ज : डॉ जगदीश

जांच करने आए चाईबासा सदर अस्पताल के ऐसीएमओ डॉ जगदीश प्रसाद ने कहा कि सात से आठ किमी मालूका से जगन्नाथपुर कि दूरी को 22 किमी दिखा कर निकासी किए गये रूपये का आरोप सही साबित हूआ है. लेखापाल का नौकरी तो जाएगा एफआईआर भी दर्ज करेंगें।

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