परिसीमन पर पूर्व सांसद गीता कोड़ा के बयान पर बुधराम लागुरी और त्रिशानु राय का करारा पलटवार
आदिवासी हितों की इतनी ही चिंता है तो पहले केंद्र सरकार से परिसीमन पर स्पष्ट संवैधानिक गारंटी दिलाएंः झामुमो-कांग्रेस
संतोष वर्मा
चाईबासा : पूर्व सांसद सह झारखंड प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष गीता कोड़ा द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर झामुमो-कांग्रेस पर आदिवासी समाज को भ्रमित करने का आरोप लगाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी एवं कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने संयुक्त रूप से गीता कोड़ा के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को आदिवासी समाज को राजनीतिक पाठ पढ़ाने के बजाय पहले केंद्र सरकार से परिसीमन को लेकर स्पष्ट और ठोस गारंटी दिलानी चाहिए।
नेताद्वय ने कहा कि परिसीमन कोई सामान्य राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक हिस्सेदारी से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर केवल सामान्य राजनीतिक आश्वासनों के आधार पर आदिवासी समाज की आशंकाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को वास्तव में विश्वास है कि आगामी परिसीमन के बाद आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ेगी और झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा, तो केंद्र सरकार को राज्यवार और क्षेत्रवार स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक करना चाहिए। भाजपा नेताओं को यह बताना चाहिए कि परिसीमन के बाद झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा एवं विधानसभा सीटों का स्वरूप क्या होगा और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के राजनीतिक हितों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।
बुधराम लागुरी एवं त्रिशानु राय ने भाजपा से सीधा सवाल करते हुए कहा अगर परिसीमन को लेकर भाजपा इतनी आश्वस्त है, तो केंद्र सरकार से लिखित एवं स्पष्ट गारंटी दिलाने में उसे परेशानी क्यों हो रही है? आदिवासी समाज के सवालों का जवाब राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि ठोस संवैधानिक आश्वासन से दिया जाना चाहिए।
नेताद्वय ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए लंबे और संघर्षपूर्ण आंदोलन के बाद इस मुकाम तक पहुंचा है। इसलिए परिसीमन के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों के राजनीतिक प्रभाव और प्रतिनिधित्व में किसी भी संभावित बदलाव को लेकर सवाल उठाना भ्रम फैलाना नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता है।
उन्होंने कहा कि झामुमो-कांग्रेस आदिवासी समाज में भय पैदा नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सजग कर रहे हैं। भाजपा यदि वास्तव में आदिवासी हितैषी होने का दावा करती है तो उसे इस बहस से बचने के बजाय केंद्र सरकार के समक्ष झारखंड के आदिवासी हितों की स्पष्ट पैरवी करनी चाहिए। गीता कोड़ा पर निशाना साधते हुए झामुमो-कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झामुमो और कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले भाजपा नेताओं को केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करवाना चाहिए कि परिसीमन के नाम पर झारखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्रों की राजनीतिक ताकत कमजोर न हो। आदिवासी समाज सवाल पूछ रहा है और उन सवालों का जवाब देना भाजपा की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अब केवल राजनीतिक दावों और आश्वासनों पर भरोसा करने वाली नहीं है। जनता जानना चाहती है कि परिसीमन के बाद उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की वास्तविक स्थिति क्या होगी। इसलिए केंद्र सरकार को इस विषय पर अस्पष्टता समाप्त करते हुए स्पष्ट नीति, ठोस संवैधानिक सुरक्षा और सार्वजनिक रोडमैप सामने रखना चाहिए।बुधराम लागुरी एवं त्रिशानु राय ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस आदिवासी हितों से जुड़े किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा। परिसीमन हो या राजनीतिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न, गठबंधन तथ्यों और संवैधानिक अधिकारों के आधार पर जनता की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।अंत में उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि परिसीमन के बाद आदिवासी आरक्षित सीटें बढ़ने की बात इतनी ही स्पष्ट है, तो केंद्र सरकार से इसका राज्यवार और क्षेत्रवार रोडमैप सार्वजनिक करवाया जाए। राजनीतिक बयान नहीं, लिखित गारंटी दीजिए—तभी आदिवासी समाज आपके दावे पर विश्वास करेगा।
