चाईबासाः जिला परिषद के आमंत्रण स्वास्थ्य योजनाओं की निविदा में टेंडर मैनेज का खेल शुरू?
जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार के ईमानदार छवि पर दाग लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है
कार्य लम्बित रखने वाले संवेदकों को निविदा आवंटित नहीं किए जाने की मांग उपायुक्त से करेंगेंः संवेदक सुत्र
कार्यपालक अभियंता अपनी नौकरी देकर राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त संवेदक को कार्य आवंटित करते हैं
कार्य लम्बित रखने वाले संवेदकों को डीबार करने की भी आवाज़ उठ रही है, उपायुक्त से मिलने की चर्चा
राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त संवेदक के दबाव में छोटे ठेकेदारों को निविदा आवंटित नहीं की जाती हैः संवेदक सुत्र
अन्य विभागों के तर्ज पर कार्य लम्बित रखने वाले संवेदकों को डिबार करने की होगी कारवाई। एजेंसी सुत्र
पंचायती राज विभाग से राजीव कुमार मनी की प्रतिनियुक्ति रद्द करने की होगी मांग
संतोष वर्मा
चाईबासाः जिला परिषद के द्वारा स्वास्थ्य विभाग से स्वीकृत योजना की आमंत्रित की गई निविदाओं में सेटिंग गेटिंग का खेल शुरू हो चुका है। सूत्रों की माने तो जिला परिषद के चर्चित प्रतिनियुक्त कर्मचारी राजीव कुमार मनी की भूमिका अहम मानी जा रही है। उक्त सहायक एम कर्मचारी की भ्रष्ट कार्यशैली के कारण जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार के ईमानदार छवि पर दाग लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। विभिन्न विभागों के कार्यकारी एजेंसी में कार्य को लम्बित रखने वाले संवेदकों को निविदा निष्पादन से पहले कार्य आवंटन का दावा किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि निविदा निष्पादन की जिम्मेदारी अप्रत्यक्ष रूप से राजीव कुमार को के हाथों में दी गई है। जिला के संवेदक की एक बड़ा गुट का विरोध भी उठने जा रहा है कि, जिस संवेदक का कार्य अन्य विभागों में लम्बित है, वैसे संवेदक के निविदा पर विचार नहीं किया जाए, साथ ही DMFT की योजनाओं की निविदा में भी लम्बित रखने वाले संवेदक को कार्य आवंटित नहीं करने और कार्य लंबित रखने वाले संवेदकों के नाम को सार्वजनिक करने पर भी बात उठ रही है। सूत्रों के अनुसार संवेदक की एक टीम जिला के उपायुक्त मनीष कुमार से मिल कर लम्बित रखने वाले संवेदकों को विभाग के तर्ज पर डिबार करने की मांग रखेंगे। ऐसे दबंग और राजनीतिक सरंक्षण वाले बहुत सारे ठेकेदार के पास योजना कार्य स्टॉक करके रखे हुए हैं,और नए निविदा में भाग लेने के लिए आपा धापी में लग जाते हैं। जिला परिषद के साथ साथ अन्य एजेंसी में DMFT की लगभग सौ करोड़ से अधिक की लगभग सत्तर योजना की निविदा निकली गई है। आर्थिक रूप से कमज़ोर संवेदकों को राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त संवेदक निविदा से हटवाने और छठवांने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। इस खेल में प्रायः सभी एजेंसी के कार्यपालक अभियंता अपनी नौकरी देकर बड़े ठेकेदारों को कार्य आवंटित कर देते हैं। लेकिन जिला प्रशासन के गोपनीय सूत्रों के अनुसार इस बार टेंडर मैनेज का खेल पर बहुत हद तक लगाम लगने वाला है, साथ ही लम्बित रखने वाले संवेदकों को कार्य आवंटित किए जाने पर कार्यपालक अभियंता की खैर नहीं होगी। अब देखना है कि जिला परिषद के साथ साथ अन्य एजेंसी में लम्बित रखने वाले संवेदकों को निविदा आवंटित किया जाता है या राजनीतिक दबाव में पहले की तरह कार्यपालक अभियंता अपनी नौकरी देकर बाकी सब स्वार्थ सिद्धि में लगे रहेंगे।
