परिसीमन के नाम पर आदिवासियों को भ्रमित करना बंद करें कांग्रेस-झामुमो : चंद्रमोहन, भूषण पाट पिंगुवा
संतोष वर्मा
चाईबासा: परिसीमन के मुद्दे पर झामुमो-कांग्रेस के नेताओं द्वारा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद गीता कोड़ा के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष चंद्रमोहन तीउ एवं जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुवा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नेताद्वय ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो परिसीमन को लेकर बेवजह विवाद खड़ा कर आदिवासी समाज को गुमराह करने और क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परिसीमन कोई ऐसा विषय नहीं है जिसे राजनीतिक भय और अफवाह के आधार पर समझाया जाए। देश में पूर्व में हुए परिसीमन में अलग-अलग राज्यों में अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटों में अलग-अलग परिवर्तन हुए हैं। छत्तीसगढ़ में 2008 के परिसीमन के बाद ST विधानसभा सीटें 34 से घटकर 29 हुईं, ओडिशा में 34 से 33 हुईं , इससे स्पष्ट है कि परिसीमन का परिणाम प्रत्येक राज्य की जनसंख्या और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होता है। इसे पहले से किसी एक वर्ग के विरुद्ध बताना राजनीतिक भ्रम फैलाना है।
चंद्रमोहन तीउ एवं भूषण पाट पिंगुवा ने कहा कि भाजपा नेता गीता कोड़ा के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने से पहले कांग्रेस और झामुमो के प्रवक्ताओं को अपनी समझ और संवैधानिक ज्ञान विकसित करना चाहिए। यदि उन्हें आदिवासी समाज की इतनी ही चिंता है तो सात वर्षों के अपने शासनकाल का हिसाब जनता के सामने रखें।
नेताद्वय ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में पांच विधायक और एक सांसद सत्ता पक्ष से जुड़े होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी समाज पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहा है। इन वास्तविक समस्याओं पर काम करने के बजाय हर कुछ दिनों में नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के बहाने आदिवासी समाज में आशंका पैदा करने के पीछे एक उद्देश्य समाज में तेजी से हो रहे धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों से भी ध्यान हटाना है। आदिवासी समाज के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वनाधिकार, पलायन और सांस्कृतिक पहचान जैसे वास्तविक सवाल हैं। इन सवालों का समाधान करने के बजाय कांग्रेस और झामुमो राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त हैं।
चंद्रमोहन एवं भूषण पाट पिंगुवा ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो को गीता कोड़ा के बयान की व्याख्या करने से पहले अपने सात वर्षों के शासन का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में वन पट्टा, छात्रवृत्ति, आवास, नल-जल, पेंशन, रोजगार और ग्रामीण स्वास्थ्य-शिक्षा की स्थिति पर जनता जवाब चाहती है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का काम जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि अधूरी जानकारी के आधार पर बयानबाजी कर नए विवाद पैदा करना। परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज को डराने और गुमराह करने की राजनीति अब नहीं चलेगी। जनता सब समझ रही है और सही समय पर इसका जवाब भी दें।
