चाईबासा/संतोष वर्मा: केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज होता जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्य के खनिज अधिकारों और राजस्व हितों को लेकर चरणबद्ध जनआंदोलन की घोषणा की है। पार्टी की ओर से 07 सितंबर 2026 को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर एकदिवसीय धरना आयोजित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसी क्रम में पश्चिमी सिंहभूम जिला झामुमो ने आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने कहा कि 6 सितंबर 2026 तक जिले के गांवों, हाट-बाजारों और प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। लोगों को MMDR संशोधन अधिनियम के संभावित प्रभावों तथा झारखंड के अधिकारों से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी जाएगी।बुधराम लागुरी ने कहा कि 07 सितंबर को पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी सरकारी प्रखंड कार्यालयों के समक्ष हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम लोग एकदिवसीय महाधरना देंगे। महाधरना के बाद राष्ट्रपति के नाम संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा जाएगा।
झामुमो का आरोप है कि संशोधित कानून से खनिज संपदा पर राज्यों के अधिकार और राजस्व हित प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी इसे झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और राज्य के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस कानून को लेकर केंद्र पर राज्यों के अधिकार सीमित करने का आरोप लगा चुके हैं।बुधराम लागुरी ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि राज्य के विकास और जनकल्याण से जुड़ी है। इसलिए इस मुद्दे पर आम जनता को जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने जिले के ग्रामीणों, मजदूरों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और झामुमो कार्यकर्ताओं से जनजागरण अभियान को सफल बनाने तथा 7 सितंबर के महाधरना में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि “झारखंड के अधिकारों और संसाधनों पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को स्वीकार नहीं किया जाएगा। लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन के माध्यम से राज्य के हक की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।”झामुमो के इस चरणबद्ध आंदोलन के बीच राज्य में MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
