सोनाराम सिंकु का जिला अध्यक्ष बनने के बाद मंत्री दीपक बिरूआ से मिलने के पीछे तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं
विधायक सोनाराम सिंकु का मंत्री दीपक बिरूआ से शिष्टाचार मुलाकात की चर्चा भाजपा के अन्दर खाने में भी हो रही हैःसुत्र
झारखण्ड अलग राज्य के समय से आजसू में एक साथ बड़े भाई और छोटे भाई के तरह हैं
चाईबासा/संतोष वर्मा: जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकु का जिला अध्यक्ष बनने के पीछे कई मायने हैं। आने वाले समय में राजनीतिक दशा और दिशा को कांग्रेस भांप चुकी है। कोल्हान प्रमंडल में कांग्रेस को मजबूत स्थिति में लाने के हो समुदाय के एक मात्र विधायक को संगठन का कमान सौंपना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी लगातार सोनाराम सिंकु का राजनीतिक कद बढ़ाने में लगी है, आख़िर क्यूं ? यह सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के हनुमान भगत होने और कोड़ा जी का साथ छूटने के बाद भी, कोड़ा भगत का ठप्पा माथे से हटते नहीं हट रहा था, कई विरोधी और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दिल्ली तक कोड़ा की B टीम का नैरेटिव सेट कर टिकट कटवाने से लेकर चुनाव में दुष्प्रचार फैलाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सोनाराम सिंकु की सूझ बूझ की राजनीतिक कार्यशैली ने इस भ्रम को तोड़ते हुए हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन के सहारे छोटानागरा और जगन्नाथपुर में चुनाव के दौरान कार्यक्रम को सफल बना कर सभी राजनीतिक विरोधियों की साजिश को नाकाम कर दिया।
विधानसभा चुनाव में मंत्री दीपक बिरूआ ने सोनाराम सिंकु को तन मन धन से विधानसभा चुनाव में मदद किए, जिसके कारण आज भी अच्छे बुरे राजनीतिक घटना में अपने बड़े भाई समान दीपक बिरूआ से सलाह मशविरा करते हैं। जिला अध्यक्ष बनने के बाद मंत्री दीपक बिरूआ से मुलाकात एक शिष्टाचार भर सीमित नहीं है, सोनाराम सिंकु की मुलाकात आने वाले राजनीतिक भविष्य पर भी विचार मंथन के रुप में देखा जा रहा है। महागठबंधन की सरकार में सोनाराम सिंकु का अपनी पार्टी के साथ साथ हेमन्त सोरेन के बीच मजबूत स्थिति में खड़े हैं। सोनाराम सिंकू का इस शिष्टाचार मुलाकात में मंत्री दीपक बिरूआ भाजपा को कोल्हान से उखाड़ फेंकने के लिए सोनाराम सिंकु को तत्पर रहने और विशेष कर पांचों विधानसभा में महागठबंधन की मजबूती पर विचार विमर्श भी किया गया है।
