पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षा विभाग में विज्ञान व गणित किट वितरण के नाम पर हुआ बड़ा फर्जी वाड़ा, नहीं मिली जिले के 172 हाई स्कूल व प्सस टू विद्यालयों को विज्ञान व गणित किट और हो गयी 8,60,000 कि निकासी
कौन है चाईबासा सदर बाजार स्थित गुप्ता इंटरप्राईजेज का प्रोप्राइटर चंदन गुप्ता जो प्रखंडो के BRC अधिकारियों के साठ गांठ से विज्ञान व गणित का किट बगैर दिए कर ली आठ लाख 60 हजार रूपये की निकासी
विद्यालयों को SMC स्तर पर किट खरिदने से क्रय करने के लिए रोका गया
वर्ष 2024-25 में दिए गए थे जिले में 172 हाई स्कूल व प्लस टू विद्यालयों में विज्ञान व गणित किट वितरण करने का निर्देश
प्रति विद्यालय को 5000 रूपये मिले थे विज्ञान व गणित किट क्रय खरिदने के लिए राशि
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाउपाध्यक्ष नें राज्य परियोजना निदेशक (SPD)व झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद JEPC) को लिखा पत्र
Santosh verma
Chaibasa ः पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षा विभाग में वर्ष 2024-25 में छात्र छात्राओं को विशेष शिक्षा देने के उद्देश्य से जिले के 172 हाई स्कूल एवं प्लस टु विद्यालयों को विज्ञान व गणित किट क्रय करने लिए प्रति विद्यालयों को पांच पांच हजार खर्च करने के लिए यानी कुल 8,60,000 आठ लाख साठ हजार रूपये दिए गए थे.उक्त विद्यालयों के एसएमसी स्तर पर क्रय करने का निर्देश दिया गया था.लेकिन कमिशन का खेल ऐसा हुआ की आज तक 172 विद्यालयों में विज्ञान व गणित की किट पहूंची नहीं और 8,60,000 लाख रूपये की निकासी फर्जी बिल दिखा कर निकासी कर ली गई. इस मामले का खुलाशा तब हुआ जब भारत आदिवासी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष तुरी सुण्डी नें मामले की जांच कराने और जांच रिपोर्ट राज्य परियोजना निदेशक (एसपीडी) तथा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC)को पत्र लिख कर मांग किया.वहीं इसकी प्रतीलिपि अभिलेख हेतु मुख्यमंत्री सह स्कूली शिक्षा एवं साक्षसता मंत्री झारखंड सरकार तथा उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम, जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है.
किया है पुरा मामला
प० सिंहभूम जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 में विज्ञान एवं गणित किट की आपूर्ति न होने, कथित फर्जी बिलों के माध्यम से ₹8,60,000 की वित्तीय अनियमितता तथा सामान्य वित्तीय नियम (GFR) के उल्लंघन के संबंध में विस्तृत शिकायत पत्र
बताया गया की वित्तीय वर्ष 2024-25 में JEPC पत्रांक संख्या 370, दिनांक 28.01.2025 के अंतर्गत पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाई स्कूल एवं +2 विद्यालयों में विज्ञान एवं गणित किट वितरण योजना के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं एवं प्रशासनिक लापरवाही का मामला परिलक्षित हुआ है, जिसकी ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना अत्यंत आवश्यक है।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले के 172 विद्यालयों के लिए ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से विज्ञान एवं गणित किट क्रय हेतु कुल ₹8,60,000 (आठ लाख साठ हजार रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गई थी। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार उक्त क्रय कार्य प्रत्येक विद्यालय की विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) द्वारा किया जाना था।
परंतु प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नियमों को दरकिनार करते हुए चाईबासा सदर बाजार स्थित फर्म Gupta Enterprises के प्रोप्राइटर श्री चंदन गुप्ता तथा संबंधित प्रखंडों के BRC अधिकारियों की कथित संलिप्तता के माध्यम से विद्यालयों को SMC स्तर पर क्रय करने से रोका गया तथा शिक्षकों पर दबाव बनाकर कथित फर्जी बिलों के माध्यम से ₹8,60,000 की राशि निकासी कराई गई।
यह अत्यंत गंभीर विषय है कि उक्त राशि की निकासी के बावजूद 172 विद्यालयों में से किसी भी विद्यालय को आज तक विज्ञान एवं गणित किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। फलस्वरूप योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ है तथा विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री से वंचित रहना पड़ा है।
उक्त प्रकरण निम्नलिखित नियमों एवं वित्तीय प्रावधानों के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करता है:
1. क्रय एवं संविदा शर्तों का उल्लंघन
योजना के अनुसार विज्ञान एवं गणित किट क्रय का अधिकार विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) को प्राप्त था। परन्तु बाहरी फर्म द्वारा विद्यालयों के स्थान पर केंद्रीकृत रूप से बिलिंग कर राशि निकासी की गई है, जो निर्धारित क्रय प्रक्रिया एवं योजना दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इससे सरकारी क्रय प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
2. सामान्य वित्तीय नियम (GFR 2017) का संभावित उल्लंघन
उक्त प्रकरण में सामान्य वित्तीय नियम, 2017 (GFR) के निम्नलिखित प्रावधानों के उल्लंघन की संभावना प्रतीत होती है:
भुगतान के उपरांत सामग्री की वास्तविक आपूर्ति एवं भौतिक सत्यापन सुनिश्चित न किया जाना
प्राप्ति रसीद, स्टॉक प्रविष्टि एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र का पूर्ण अभाव
कथित फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान स्वीकृत किया जाना
सार्वजनिक धन के उपयोग में उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन न होना
GFR के अनुसार किसी भी सरकारी व्यय के अंतर्गत भुगतान के पश्चात सामग्री प्राप्ति, कार्य निष्पादन एवं उपयोग का सत्यापन अनिवार्य होता है। किंतु उपलब्ध तथ्यों के अनुसार बिना सामग्री आपूर्ति के राशि की निकासी किए जाने का मामला है। तथा यह गंभीर वित्तीय लापरवाही एवं प्रशासनिक जवाबदेही के उल्लंघन का विषय है।
3. वित्तीय अनुशासन एवं सार्वजनिक जवाबदेही का उल्लंघन
कथित फर्जी बिलों के माध्यम से ₹8,60,000 की सरकारी राशि निकाली गई है, जिससे राज्य को प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति हुई है। संबंधित प्रखंडों के BRC में अधिकारियों की भूमिका एवं जवाबदेही की निष्पक्ष जाँच आवश्यक प्रतीत होती है।
4. योजना दिशा-निर्देशों एवं छात्र हितों पर प्रतिकूल प्रभाव
विज्ञान एवं गणित किट योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक एवं प्रयोगात्मक शिक्षण को बढ़ावा देना है। किट उपलब्ध न होने के कारण 172 विद्यालयों की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जो छात्र हितों के प्रतिकूल है।
5. संगठित वित्तीय अनियमितता की आशंका
BRC अधिकारियों एवं बाहरी फर्म की संलिप्तता से शिक्षकों पर दबाव बनाकर कथित फर्जी बिल अपलोड कराए गए हैं, जो एक संगठित वित्तीय अनियमितता एवं सुनियोजित भष्टाचार का मामला है। अतः इसकी निष्पक्ष एवं विस्तृत जाँच आवश्यक प्रतीत होती है।
जांच का मांग
1. उपर्युक्त प्रकरण की तत्काल विस्तृत एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
2. Gupta Enterprises, प्रोप्राइटर चंदन गुप्ता तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जाँच कर आवश्यक विभागीय एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
3. कथित फर्जी बिलों, भुगतान आदेशों एवं संबंधित अभिलेखों का सत्यापन एवं आवश्यकतानुसार जब्ती सुनिश्चित की जाए।
4. गबन की गई ₹8,60,000 की राशि की वसूली दोषी पक्षों से सुनिश्चित की जाए।
5. प्रभावित 172 विद्यालयों को विज्ञान एवं गणित किट की आपूर्ति अथवा नियमानुसार राशि की पुनः स्वीकृति प्रदान की जाए।
6. प्रकरण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक, अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाए। छात्र हित, वित्तीय उत्तरदायित्व एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के दृष्टिगत आपके त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा है।कृपया शिकायत प्राप्ति की पुष्टि एवं की गई कार्रवाई से अवगत कराने की कृपा करें।
