जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु को मिली एक और नई जिम्मेदारी, कार्यकर्ताओं में उत्साह
झारखंड की राजनीति में बढ़ता कद: सोनाराम सिंकू को आदिवासी कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी, संगठन और सरकार दोनों में मजबूत हुई पकड़
उप मुख्य सचेतक से आदिवासी कांग्रेस तक मजबूत हुई पकड़, झारखंड राजनीति में उभरता बड़ा चेहरा बने सोनाराम सिंकू
santosh verma
Chaibasaःझारखंड की राजनीति में जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। संगठन से लेकर सरकार तक मिल रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि कांग्रेस पार्टी और राज्य नेतृत्व दोनों का भरोसा उन पर लगातार मजबूत हुआ है।
हाल ही में उन्हें राज्य जनजातीय सलाहकार परिषद (State Tribal Advisory Council) का सदस्य तथा अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस में विशेष आमंत्रित सदस्य (Special Invitees) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को कोल्हान ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हलांकि सोनाराम सिंकू ने अपनी नियुक्ति पर शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड के आदिवासी समाज, युवाओं, महिलाओं और संघर्षशील कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं का सम्मान है।श्री सिंकु नें विशेष रूप से अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vikrant Bhuria के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन पर जताया गया विश्वास उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
सोनाराम सिंकू ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ आदिवासी समाज की आवाज को सरकार और संगठन तक मजबूती से पहुंचाने का कार्य करते रहेंगे।
इधर राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह पहली बार नहीं है जब पार्टी और सरकार ने सोनाराम सिंकू पर भरोसा जताया हो। इससे पहले 4 मार्च 2025 को उन्हें झारखंड सरकार का उप मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया था। इस पद के साथ उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी प्राप्त हुआ।
सरकार में उप मुख्य सचेतक जैसा अहम पद मिलना इस बात का संकेत माना गया कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें भविष्य के प्रभावशाली आदिवासी चेहरों में देख रहा है। विधानसभा के भीतर सरकार और विधायकों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालना किसी भी विधायक के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सोनाराम सिंकू उन नेताओं में शामिल हो चुके हैं जिनकी पकड़ अब केवल अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। संगठन में लगातार बढ़ती सक्रियता, आदिवासी मुद्दों पर मुखरता और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क उन्हें पार्टी के भरोसेमंद नेताओं की कतार में खड़ा कर रहा है।
कोल्हान क्षेत्र में आदिवासी हित, विस्थापन, रोजगार, शिक्षा और स्थानीय अधिकारों जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें जमीनी नेता की पहचान दिलाई है। यही वजह है कि पार्टी उन्हें संगठनात्मक स्तर पर भी लगातार बड़ी जिम्मेदारियां सौंप रही है।
जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले सोनाराम सिंकू का प्रभाव अब धीरे-धीरे पूरे कोल्हान प्रमंडल में बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आदिवासी समाज के बीच उनकी स्वीकार्यता और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका भविष्य में उन्हें और भी बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचा सकती है।
विशेष रूप से आदिवासी कांग्रेस में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के रूप में देखा जा रहा है। इससे झारखंड के आदिवासी मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने में भी उनकी भूमिका बढ़ सकती है।
दुसरी ओर सोनाराम सिंकू की नई नियुक्ति के बाद उनके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। कोल्हान क्षेत्र के कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि लगातार मिल रही जिम्मेदारियां यह साबित करती हैं कि पार्टी नेतृत्व सोनाराम सिंकू की संगठन क्षमता, जनसंपर्क और राजनीतिक सक्रियता से प्रभावित है।
“संघर्ष से संगठन तक” की राजनीति
सोनाराम सिंकू की राजनीतिक यात्रा को संघर्ष आधारित राजनीति के रूप में देखा जाता है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के कारण उनकी छवि जमीनी नेता की बनी है।
अब सरकार में उप मुख्य सचेतक और संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि वे झारखंड कांग्रेस की आदिवासी राजनीति के महत्वपूर्ण चेहरों में तेजी से उभर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इसी तरह संगठन और सरकार का भरोसा उन पर बना रहा, तो आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली हो सकती है।


