जगन्नाथपुर प्रखंड कार्यालय के समक्ष शिक्षकों की बहाली और शिक्षा व्यवस्था सुधार की मांग को लेकर बाल अधिकार सुरक्षा की मंच को लेकर किया गया धरना प्रदर्शन
संतोष वर्मा
Chaibasaःजगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति, विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी तथा मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर गुरुवार को बाल अधिकार सुरक्षा मंच के बैनर तले अनुमंडल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पंचायत से रैली निकालते हुए अनुमंडल कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम अनुमंडल पदाधिकारी महेंद्र छोटन उरांव को मांग पत्र सौंपा।
धरना में शामिल लोगों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21(ए) तथा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के बावजूद क्षेत्र के हजारों बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। मंच के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जगन्नाथपुर, नोवामुंडी, टोंटो एवं मनोहरपुर क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
मंच द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के 172 प्राथमिक विद्यालयों में 21,917 बच्चों के नामांकन के विरुद्ध मात्र 288 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि आरटीई मानक के अनुसार 780 शिक्षकों की आवश्यकता है। वहीं 71 मध्य विद्यालयों में 12,496 विद्यार्थियों के लिए केवल 241 शिक्षक उपलब्ध हैं, जबकि आवश्यकता 385 शिक्षकों की है। क्षेत्र में 75 विद्यालय ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरा विद्यालय संचालित हो रहा है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई विद्यालयों में पाकशाला, शौचालय, पेयजल, बिजली एवं चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। दुर्गम क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं होने से बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इसका सबसे अधिक असर उच्च विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिसके कारण कई बच्चे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र के बच्चों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने सरकार से तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति करने एवं विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कुल 13 प्रमुख मांगें रखीं। इनमें आरटीई एक्ट के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति, स्थानीय युवाओं को पारा शिक्षक के रूप में बहाल करना, विद्यालयों में नन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति, अलग-अलग शौचालय, पेयजल, बिजली, चारदीवारी, पक्की सड़क, पंचायत स्तर पर उच्च विद्यालय की स्थापना, छात्रावास सुविधा, स्मार्ट बोर्ड तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।इसके अलावा मंच ने डीएमएफटी फंड का उपयोग शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने, विद्यालयों में सुरक्षा प्रहरी नियुक्त करने तथा विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण देने की भी मांग की।

