गुवा शेल के “मजदूरों को मिला न्याय, संघर्ष की एकता ने दिलाई ऐतिहासिक जीत” — मधु कोड़ा

 गुवा शेल के “मजदूरों को मिला न्याय, संघर्ष की एकता ने दिलाई ऐतिहासिक जीत” — मधु कोड़ा



“नियुक्ति में पारदर्शिता से बंद होगी धांधली, योग्य ग्रामीणों को मिलेगा अधिकार” — मधु कोड़ा



मजदूरों और ग्रामीणों की संगठित आवाज की ऐतिहासिक जीत : गुवा सेल प्रबंधन ने 50 प्रभावित बेरोजगार ग्रामीणों को नौकरी देने पर दी मंजूरी, त्रिपक्षीय लिखित समझौता के बाद आंदोलन किया गया समाप्त

 santosh verma

Chaibasaःगुवा सेल लौह अयस्क खदान में प्रभावित गांवों के बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार देने की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन ऐतिहासिक सफलता के साथ समाप्त हुआ। कंपनी प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच लगभग छह घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता के बाद कंपनी ने पहले चरण में 50 प्रभावित बेरोजगार ग्रामीणों को नौकरी देने की लिखित सहमति प्रदान की।

इस आंदोलन से पूर्व भी ग्रामीणों द्वारा चरणबद्ध आंदोलन चलाया गया था। 15 फरवरी 2026 को रोजगार की मांग को लेकर संयुक्त बैठक की गई, 2 मार्च 2026 को प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा गया, 18 मार्च 2026 को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन हुआ, 7 अप्रैल 2026 को भूख हड़ताल की गई तथा 28 अप्रैल 2026 को काम ठप कर विरोध प्रदर्शन किया गया। मांगों पर ठोस पहल नहीं होने के बाद 11 मई 2026 से 19 गांवों के मुंडा-मानकी, ग्रामीणों एवं मजदूरों ने अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर माइंस क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। आंदोलनकारियों ने उत्पादन पूरी तरह बंद करा दिया तथा स्क्रीनिंग किए गए लौह अयस्क को भी बाहर जाने नहीं दिया, जिसके बाद प्रबंधन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा।

वार्ता में यह निर्णय लिया गया कि गुवा सेल खदान से प्रभावित गांवों एवं सीएसआर क्षेत्र के 50 बेरोजगार ग्रामीणों को ग्रामसभा की अनुशंसा के आधार पर मई 2026 में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह भी सहमति बनी कि रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी। प्रत्येक गांव से लाभार्थियों का चयन ग्रामसभा के माध्यम से किया जाएगा।

नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निगरानी के लिए कंपनी प्रतिनिधि, प्रशासनिक पदाधिकारी, मानकी-मुंडा के ग्रामीण प्रतिनिधि तथा आउटसोर्सिंग एजेंसी की संयुक्त समिति गठित की जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि यह संघर्ष मजदूरों और ग्रामीणों की एकता की ऐतिहासिक जीत है तथा लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार मजदूरों को न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि मजदूर और प्रबंधन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का दायित्व है कि एक-दूसरे के हितों की रक्षा करें। आंदोलन के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी से ग्रामीणों और मजदूरों को आत्मबल मिला।

"पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि-: नियुक्ति में पारदर्शिता अपनाने की जो नीति निर्धारित हुई है, उससे पूर्व में नियुक्ति में हुई धांधली और  लाखों रुपया लेकर नौकरी दिलाने वाले तथाकथित "छुट- भइय" और दलालों पर विराम लगेगा, 

तथा योग्य और  प्रभावित ग्रामीणों को ही नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी।"

ग्रामीण प्रतिनिधियों में सुरेश चाम्पिया, मंगता सुरेन, देवकी कुमारी, सिंगा सुरेन, बिरसा सुरेन, केशव गोप, विकास गोप, गुलियन चाम्पिया, विकास पुरती, सुशील पुरती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कंपनी की ओर से सीजीएम चन्द्र भूषण कुमार उपस्थित थे, जबकि प्रशासन की ओर से अनुमंडल पदाधिकारी महिंद्र छोटन उरांव पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी)  अजय क्रेकेटा प्रखंड विकास पदाधिकारी पप्पु रजक,सीओ, थाना प्रभारी ,  एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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