नो इंट्री की मांग को लेकर चाईबासा से रांची तक न्याययात्रा 26 से
रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपा जायेगा ज्ञापन
न्याययात्रा को सफल बनाने के लिये गांवों में जनसंपर्क अभियान तेज
संतोष वर्मा
Chaibasaः चाईबासा बाइपास सड़क (डोबरोसाई—गितिलपी रोड) जो मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड के रूप में चिह्नित है तथा एनएच-75 (ई) पर दिन में भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्णरूप से नो इंट्री लगाने की मांग को लेकर जनांदोलन की तैयारी तेज कर दी गयी है। इसी क्रम में मंगलवार को एनएच—75(ई) के किनारे स्थित सिंहपोखरिया गांव में नो इंट्री आंदोलन समिति ने जनसंपर्क अभियान चलाया और ग्रामीणों के साथ बैठक कर न्याययात्रा में शामिल होकर नो इंट्री लगवाने में मदद करने की अपील की गयी। समिति के संयोजक व पूर्व बैंक मैनेजर रमेश बालमुचू ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि इस सड़क पर नो इंट्री लागू करवाना अति आवश्यक है। क्योंकि भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन से सड़क दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि होती जा रही है। कई राहगीरों व बाइक सवारों की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है।
अब यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। श्री बलमुचू ने कहा कि स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थी भी इससे काफी प्रभावित हैं। क्योंकि इसी सड़क से रोजाना हजारों विद्यार्थी आना-जाना करते हैं। अब तो सड़क दुर्घटनाओं का आलम यह है कि औसतन चार-पांच सड़क दुर्घटनाएं तो हर माह इस सड़क पर हो रही है। बावजूद जिला प्रशासन इससे बेपरवाह दिखता है। इसीलिये हमें न्याय के लिये राजधानी रांची तक की न्याययात्रा निकालनी पड़ रही है। सरकार तभी कुंभकर्णी निद्रा से जागेगी। इस न्याययात्रा में ग्रामीण हो, विद्यार्थी हो या सामाजिक संगठन के लोग सबों का स्वागत है। इसके बाद रमेश बलमुचू ने टाटा कॉलेज के पास सामाजिक संगठनों के साथ सामूहिक बैठक की और न्याययात्रा की रूपरेखा बतायी। बैठक में रेयांस सामड, दुलमू बुड़ीउली, तिलक बारी, कुसुम केराई, बबलू सावैयां, रमेश सावैयां, सुशील कुमार पुरती, चंद्रमोहन बिरुवा, सनातन सावैयां समेत अन्य लोग मौजूद थे।
कॉलेज व स्कूलों से भी मांगा जा रहा समर्थन
नो इंट्री आंदोलन समिति के संयोजक रमेश बलमुचू ने बताया कि इस आंदोलन को सफल बनाने के लिये बाइपास सड़क के आसपास स्थित विश्वविद्यालय, कॉलेज व स्कूलों से भी समर्थन मांगा जा रहा है। क्योंकि नो इंट्री नहीं लगने से इन शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थी भी प्रभावित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, तांबों, तुईवीर, सरजोमगुटू, हेसाबासा, गितिलपी, महुलसाई, बिरुवा पथ, टुंगरी आदि इलाकों के लोग भी वाहनों की बेतहाशा आवाजाही से परेशान हैं। लिहाजा इन इलाके के लोगों को भी इस आंदोलन में साथ देने की जरूरत है। कल से शैक्षणिक संस्थानों से संपर्क किया जायेगा। यह न्याययात्रा 26 अप्रैल को चाईबासा से निकलेगी जो 1 मई को राजधानी रांची पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा जायेगा। यदि हमारी मांगों पर राज्य सरकार ध्यान नहीं देती है, तो भविष्य में इससे भी बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जायेगा। रमेश बलमुचू ने बताया कि उनकी मांगों में चाईबासा बायपास सड़क व एनएच-75(ई) पर नो इंट्री लगाने के अलावे एनएच-220 पर भी दिन में पूर्ण नो इंट्री लगाने, सड़क दुर्घटनाओं में मरनेवाले व घायल होनेवालों को मुआवजा देने तथा तांबो चौक नो इंट्री आंदोलन मामले में मुफ्फसिल थाने में दर्ज मुकदमा वापस लिये जाने की मांग भी शामिल हैं। रेयांस सामड ने बताया कि न्याययात्रा के लिये लोगों की आर्थिक मदद का स्वागत है। लोग स्वेच्छा से चंदा दे रहे हैं जो सराहनीय है।
70 से अधिक नामजद और 700 से अधिक अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा, 16 नामजद हुए थे गिरफ्तार
चाईबासा : 27 अक्टूबर 2025 को चाईबासा बायपास सड़क पर भारी वाहनों के आवागमन पर दिन में पूर्ण नो इंट्री लागू कराने की मांग को लेकर चाईबासा के तांबो चौक पर सड़क जाम किया गया था। लेकिन शाम ढलने के बाद ग्रामीण व वहां तैनात पुलिसकर्मियों के बीच कथित झड़प हो गयी थी। जिसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत अन्य कई गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज की गयी थी। साथ ही 16 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। दो महीने बाद इन लोगों को कोर्ट से जमानत मिल गयी। अब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।



