झारखण्ड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के अनमोल रतन अवधेश कुमार द्वारा अनुमानित दो हजार करोड़ राज्य स्तर के मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना और DMFT फंड की योजनाओं में निविदा घोटाला होने से इनकार नहीं किया जा सकता ?

 झारखण्ड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के अनमोल रतन अवधेश कुमार द्वारा अनुमानित दो हजार करोड़ राज्य स्तर के मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना और DMFT फंड की योजनाओं में निविदा घोटाला होने से इनकार नहीं किया जा सकता ?

निविदा निष्पादन अवधेश कुमार मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता रहते हुए दूसरे विभाग से संबंधित एजेंसी के निविदाओं का निष्पादन करने के साथ साथ संवेदकों के चयन में अनियमितता बरतने की सूचना है। सुत्र


विभाग के द्वारा पदस्थापित अधिकारी को नज़र अंदाज कर एक हजार करोड़ से अधिक निविदा से संबंधित संचिका में मंतव्य नहीं लिया गया है, निविदा निष्पादन में संवेदकों से आर्थिक स्वार्थ साधने की चर्चा। सुत्र


DMFT फंड से स्वीकृत योजना यानी धनबाद जिला, पाकुड़, चतरा, रामगढ़, रांची एवं अन्य जिला के लघु सिंचाई विभाग से संबंधित एजेंसी एवं NREP से संबंधित एजेंसी की निविदा का निष्पादन किया जाना सरासर नियम विरुद्ध है

संतोष वर्मा

Chaibasaःझारखण्ड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के अनमोल रतन अवधेश कुमार द्वारा निविदा निष्पादन में अनियमितता बरतने और टेंडर मैनेज करने में पास संवेदक को फेल करने यानी कांट्रेक्टर का टेक्निकल सिलेक्शन में रिस्पोंसिव और नन रिस्पोंसिव कर मात्र दो संवेदक को फाइनेंसियल बीड खोलने का मामला में महारत हासिल किए हुए हैं। मालूम हो कि विभागीय मंत्री के चहेतों एवं प्रियपात्रों में से मुख्य अभियंता हैं। सूत्रों के अनुसार अवधेश कुमार पर लगातार गंभीर आरोप लगते रहे हैं, सूचना अधिकार में मांगे गए सूचना को नहीं देते हैं, इनके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर भी किया गया है। अवधेश कुमार की सेवा इतिहास चौंकाने वाली है, हां ग्रामीण कार्य विभाग में अपनी सेवा का लगभग पूरा समय काल ग्रामीण कार्य विभाग में बीता रहे हैं। कार्यपालक अभियंता से मुख्य अभियंता तक का सफर लगभग पन्द्रह साल वर्क्स में बिताए हैं। कई बार अपने पद के अतिरिक्त अन्य तीन पदों पर प्रभारी रहे हैं। यहां तक नियम विरुद्ध तरीके से अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता में प्रोन्नति होने के बाद जल संसाधन विभाग से सेवा पुनः नहीं आने के बाद भी विभागीय सचिव की मेहरबानी से मुख्य अभियंता बने रहे, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवधेश कुमार की पकड़ और पैरवी दोनों विभाग में है। सूत्रों के अनुसार अवधेश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के कार्यकाल में सरायकेला प्रमंडल में नए संवेदकों को निविदा नियम शर्तों को पूरा नहीं करने पर भी कार्य आवंटित कर दिया गया है, साथ ही इसी तरह राज्य के अन्य प्रमंडलों में भी नियम शर्तों को पूरा करने वाले संवेदकों को टेक्निकली रिजेक्ट कर नए संवेदकों यानी बिना कार्य अनुभव प्रमाण के ही कार्य आवंटित कर सलेक्ट होने वाले संवेदकों के साथ अन्याय करने एवं उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने का काम किए हैं। सबसे अजीब और चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग के द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय में प्रावैधिकी सचिव का पद सृजित किया है, जिसपर विभाग ने उक्त पद पर सुनील चंद्र नाथ का पदस्थापन भी किया था, लेकिन किसी भी निविदा निष्पादन से संबंधित संचिका एवं अभिलेख में उनका मंतव्य नहीं लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि निविदा निष्पादन में अवधेश कुमार के साथ साथ उनके अधीनस्थ टीम के द्वारा टेंडर मैनेज और कमिशन वसूली की गई है। सूत्रों के अनुसार पूर्व मंत्री आलमगीर आलम एजीवं पूर्व मंत्री इरफ़ान अंसारी के कार्यकाल में स्वीकृत की गई मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के अंतर्गत पुल निर्माण में संवेदकों के चयन में गड़बड़ी किए हैं। सूत्रों के अनुसार अवधेश कुमार के कार्यकाल में मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के रहते हुए अपने विभागीय योजनाओं में यानि पुल निर्माण के निविदा निष्पादन में चौदह सौ करोड़ की राशि की योजना में बन्दर बांट किया गया है। दूसरा आश्चर्य एवं चौंकाने वाली बात यह है कि अवधेश कुमार ने मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता रहते हुए DMFT फंड से स्वीकृत अन्य विभागों के एजेंसी की निविदा का निष्पादन किया गया है। इस संबंध में निविदा आमंत्रित करने वाले संबंधित एजेंसी के संबंधित विभाग से किसी प्रकार का कोई भी आदेश या निर्देश प्राप्त नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार DMFT फंड से स्वीकृत योजना यानी धनबाद जिला, पाकुड़, चतरा, रामगढ़, रांची एवं अन्य जिला के लघु सिंचाई विभाग से संबंधित एजेंसी एवं NREP से संबंधित एजेंसी की निविदा का निष्पादन किया जाना सरासर नियम विरुद्ध है, क्यूंकि लघु सिंचाई विभाग में उनके अपने सक्षम एवं योग्य अभियंता कार्यरत हैं, वहीं NREP के लिए ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता भी पदस्थापित है, लेकिन अवधेश कुमार ने एजेंसी के साथ मिलकर DMFT फंड की निविदा में भी करोड़ों रुपए की बन्दर बांट किए हैं। अनुमान है कि पांच सौ करोड़ से अधिक DMFT फंड की योजनाओं की निविदा का निष्पादन किया गया है। इस पूरे निविदा घोटाले में सुनील चंद्र नाथ को गवाह के रूप में रखने और वंचित किए गए संवेदकों को खुले तौर पर अपनी शिकायत दर्ज कराए जाने की सुविधा उपलब्ध कराने पर अवधेश कुमार के भ्रष्टाचार का खेल उजागर हो सकता है साथ ही पूर्व मंत्री आलमगीर आलम एवं उनके सचिव संजीव कुमार लाल की टेंडर मैनेज करने एवं कमिशन वसूली की करोड़ों रुपए की बरामदगी से भी बड़ी घटना सामने आ सकती है। इसके लिए केंद्रीय एजेंसी की ईमानदारी से जांच करनी जरूरी है। राज्य स्तर और जिला स्तरीय की लगभग दो हजार करोड़ से अधिक की निविदा घोटाले झारखण्ड राज्य के लिए बड़ा घोटाला के रूप में आ सकता है। जिस तरह वर्तमान में ट्रेज़री में अवैध निकासी का पर्दाफाश हुआ है, और सरकार गंभीरतापूर्वक राज्य स्तर पर सभी कोषागार में जाँच करा रही है, वैसे ही अवधेश कुमार के द्वारा किए गए निविदा निष्पादन में आर्थिक स्वार्थ सिद्धि के लिए किए गए टेंडर मैनेज और कमिशन वसूली की जांच का जिम्मा केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता है। ऐसे अभियंताओं के भ्रष्ट कार्य शैली से हेमन्त सोरेन सरकार को बदनामी का सामना करना पड़ रहा है।

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