गुमलाः सिसई प्रखंड के नागफेनी में आदिवासी हो समाज कर्मचारी संघ, गुमला द्घारा हो समाज का सबसे बड़ा पर्व मागे पर्व का किया गया आयोजन


दिउरी (पूजारी) डा.बबलु सुंडी द्घारा पूजा अर्चना करने के बाद की गई और विभिन्न तरह के व्यंजनों का आनंद लेने के बाद मांदर और नगाड़ा के थाप पर सभी लोग थिरके


संतोष वर्मा 

Chaibasa: झारखंड राज्य के गुमला जिला के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी में रविवार को आदिवासी हो समाज कर्मचारी संघ, गुमला द्घारा हो समाज का सबसे बड़ा पर्व मागे पर्व का आयोजन किया गया।जिसमें गुमला जिला सहित पूर्वी सिंहभूम, प.सिंहभूम, सिमडेगा, लातेहार एवं अन्य जिलों से समाज के लोग शामिल हुए। भारतवर्ष में हो जनजातियों की जनसंख्या 35 लाख से ज्यादा है जबकि झारखंड में संथाल, उराँव, मुंडा के बाद हो चौथी बड़ी जनजाती है। वर्ष भर में सबसे बड़ा पर्व मागे पर्व ही होता है जो अलग अलग राज्यों में जनवरी से मार्च तक पूरा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस कार्यक्रम का शुरूवात दिउरी (पूजारी) डा.बबलु सुंडी द्घारा पूजा अर्चना करने के बाद की गई और विभिन्न तरह के व्यंजनों का आनंद लेने के बाद मांदर और नगाड़ा के थाप पर सभी लोग थिरके।

बताते चलें कि यह पर्व चाईबासा शहर जहाँ हो जनजाति की बहुलता है उसे छोड़कार दो वर्षों से गुमला में भी श्रीमती जयवंती देवगम एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डा.बबलु सुंडी के संरक्षण में मनाने का परंपरा शुरू हुआ है।इस अवसर पर डीपीएम जेएसएलपीएस शैलेद्र जारिका, एसडीओ बसिया श्रीमती जयवंती देवगम, एसीएमओ डा. धर्नुजय सुम्बुरूई, पीडि आटीडीए निदेशक, लातेहार प्रवीण दोराईबुरू,सिमडेगा से डा. दुलमु बिरूली,पूर्वी सिंहभूम से सुशिल सवैयाँ, अनिल बोदरा, प्रो. संजीव बिरूली, सागर हेंब्रम, अविनाश तियु, राजेंद्र सवैयाँ, महेंद्र सवैयाँ, वनमाली तामसोय, कालिचरण सवैयाँ एव कई बैंक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित हुए।

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