एक साल से टेंडर डिसाइड नहीं होने के कारण पूरे राज्य भर के संवेदकों का EMD की करोड़ों राशि फंसा हुआ है, जिसके कारण संवेदक बैंक में ब्याज भरते भरते आर्थिक मार झेलने पर विवश हैं। सूत्र

 एक साल से टेंडर डिसाइड नहीं होने के कारण पूरे राज्य भर के संवेदकों का EMD की करोड़ों राशि फंसा हुआ है, जिसके कारण संवेदक बैंक में ब्याज भरते भरते आर्थिक मार झेलने पर विवश हैं। सूत्र

बिना विभागीय आदेश के टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने का दोषी मुख्य अभियंता सरवन कुमार हैंः संवेदक सुत्र



विभागीय सचिव के श्रीनिवासन के द्वारा टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने से संबंधित कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया हैः सुत्र


 राज्य का पहला एक मात्र विभाग है, जहां बिना कारण एवं हवा में तैरता आदेश पर टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा हैः सुत्र


पथ निर्माण विभाग एवं अन्य विभाग में टेंडर निष्पादन यानी निविदा आवंटन की प्रक्रिया पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं हैः सुत्र


टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगने से सीएम हाउस गंभीर, रोक लगने से राज्य के विकास पर सीधा असर हो रहा हैः सुत्र


हवा में बिना कारण के टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने का मामला को आदिवासी विकास संघ ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कीःसुत्र

santosh verma

Chaibasaः ग्रामीण कार्य विभाग में विभागीय मंत्री के मौखिक आदेश पर टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगने के दो माह बीतने के बाद संवेदकों में उबाल देखने को मिल रहा है। हां अब यह मामला उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा रही है। सामाजिक संगठन आदिवासी विकास संघ ने 27 टेक्निकल खोलने के बाद फाइनेंशियल नहीं खोलने एवं 13 फाइनेंशियल खुलने के बाद loay संवेदकों को नहीं दिए जाने का मामला को मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है। सूत्रों के अनुसार याचिकाकर्ता ने एक साल से टेंडर निष्पादन में बिना कारण रोके रखे जाने को भी गंभीरता से रखा है, बीड वैलिडिटी सभी टेंडर का खत्म होने की जिम्मेवार कौन है। इस याचिका में विभागीय सचिव के श्रीनिवासन को मुख्य रूप से पार्टी बनाया गया है, वहीं ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख मनोहर प्रसाद एवं मंत्रालय के नजदीकी माने जाने वाले विश्वास पात्र सरवन कुमार को पार्टी बनाए जाने की सूचना प्राप्त हो रही है। अभियंता वर्ग आश्चर्यजनक है कि हवा में बिना कोई आदेश के कैसे कोई विकास हित में टेंडर निष्पादन यानी निविदा आवंटन की प्रक्रिया को रोका जा सकता है। बड़ी खबर यह है कि सीएम हाउस में इस रोक पर गंभीर है, क्यूंकि टेंडर प्रक्रिया पर रोक सीधे राज्य के विकास पर वार है, जिसे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन गंभीरता से लिया है। जानकार लोगों का मानना है कि इस पूरे मामला में सरवन कुमार मुख्य अभियंता दोषी हैं। विभागीय मंत्री के नजदीकी रहे जमशेदपुर कार्य प्रमंडल के पूर्व कार्यपालक अभियंता राजेश रजक के साथ अवैध कमिशन वसूली का हिस्सा बंटवारा का मामला को जोड़ कर देखा जा रहा है। विभागीय मंत्री के रहमो करम यानि आशीर्वाद से कार्यपालक अभियंता से मुख्य अभियंता की कुर्सी तक विराजमान हैं।

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