चाईबासाः पीएम श्री योजना में आपूर्ति व भुगतान में गड़बड़ी से जिला शिक्षा पदाधिकारी ने किया इनकार
बोले सभी खरीद और भुगतान प्रक्रियाएं विद्यालय स्तर पर पारदर्शी तरीके से की गई है
कुल 20 विद्यालयों के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये का आवंटन, किसी वेंडर को विशेष लाभ नहीं
सभी बिल और दस्तावेजों की जाँच पहले लेखा पदाधिकारी अनुशका गुप्ता व प्रभाग प्रभारी सपना सिंह के द्वारा की गई, सपना सिंह वर्तमान में लोहरदगा में पदस्थापित है
santosh verma
Chaibasaःपश्चिमी सिंहभूम जिले में पीएमश्री विद्यालयों में समाग्री की खरिददारी में हुई जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने पीएम श्री विद्यालयों में सामग्री आपूर्ति और भुगतान को लेकर सामने आ रहे आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पूरे मामले को संदर्भ से काटकर और तथ्यों को नजर अंदाज कर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत सभी खरीद प्रक्रियाएँ विद्यालय स्तर पर की गई थीं। जिला स्तर पर किसी प्रकार की निविदा या केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी। प्रत्येक विद्यालय ने अपने स्तर से कोटेशन के माध्यम से L। प्रक्रिया अपनाकर सप्लायर का चयन किया और उसी आधार पर सामग्री की खरीद की गई। इस क्रम में कुल 47 वेंडर्स द्वारा 20 पीएम श्री विद्यालयों में आपूर्ति की गई। विभिन्न विद्यालयों ने अलग अलग सप्लायर से सामग्री खरीदी। किसी एक व्यक्ति या कंपनी को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया और न ही किसी वेंडर को प्राथमिकता दी गई। सभी वेंडर्स द्वारा शत. प्रतिशत सामग्री की आपूर्ति की गई। किसी भी विद्यालय द्वारा यह शिकायत नहीं की गई कि किसी वेंडर ने अनौपचारिक रूप से दबाव, डराने या धमकाने का प्रयास किया हो। सामग्री प्राप्त होने के बाद प्रत्येक विद्यालय ने विधिवत उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificate) जमा किया। सभी बिल और दस्तावेजों की जाँच पहले लेखा पदाधिकारी और प्रभाग प्रभारी द्वारा की गई। इन्हीं सत्यापित दस्तावेजों और रिपोर्ट के आधार पर भुगतान स्वीकृत किया गया। भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई मनमाना निर्णय नहीं लिया गया और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप रही।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच समिति द्वारा निष्पक्ष और तथ्यपूर्ण जांच नहीं की गई, जबकि सभी विद्यालयों में सामग्री की आपूर्ति पूरी हो चुकी थी और भुगतान उपयोगिता प्रमाणपत्रों के आधार पर ही किया गया था। ऐसे में गड़बड़ी के आरोप तथ्यात्मक रूप से कमजोर और तर्कहीन हैं। मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि कुछ माध्यमों द्वारा अपूर्ण तथ्यों के आधार पर भ्रामक निष्कर्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं। सीमित संख्या में वेंडर्स को केंद्र में रखकर पूरे मामले को गलत परिप्रेक्ष्य में दिखाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जबकि वास्तविकता में खरीद और आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ रिपोर्ट्स में यह उल्लेख किया गया है कि प्रति विद्यालय ₹25 लाख की राशि प्राप्त हुई थी, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। कुल 20 पीएम-श्री विद्यालयों के लिए लगभग ₹2 करोड़ की राशि का आवंटन हुआ था, न कि प्रत्येक विद्यालय के लिए अलग-अलग ₹25 लाख। इस प्रकार कुछ स्थानों पर प्रकाशित आंकड़े आपसी विरोधाभास दर्शाते हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि किसी भी समाचार के प्रकाशन से पूर्व तथ्यों की गहन जाँच अवश्य की जाए, ताकि अनजाने में विभाग और प्रशासन की छवि को क्षति न पहुँचे। उन्होंने कहा कि रचनात्मक और तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है और विभाग सदैव पारदर्शिता के पक्ष में रहा है। अंत में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि खबर प्रकाशित होने के समय भी सामग्री की आपूर्ति चल रही थी। पीएम श्री योजना का फेज। कार्य पहले ही पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में नए वित्तीय वर्ष के लिए राज्य स्तर से आवंटन के तहत सामग्री की आपूर्ति की जा रही है, जिसमें जिले की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।



