सारणडा क्षेत्र के घोषित सेंचुरी एरिया में विकास कार्यों को किस तरह से किया जाना है, इस सम्बंध में राज्य सरकार अब तक कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया है, जिससे ठेकेदार लोग असमंजस की स्थिति में है
पत्थर खदान का लीज फरवरी और मार्च तक खत्म होने की चर्चा से संवेदक लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. सूत्र
जिला प्रशासन के द्वारा सेंचुरी क्षेत्र में भी योजना स्वीकृत किया जा रहा है, टेन्डर डालने में संवेदक निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं. सूत्र
इस मामला में राजनीतिक दलों के बीच यानी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों राजनीतिक लाभ के लिए जनता को दिग्भ्रमित करने में लगे हुए हैं. सूत्र
santosh verma
Chaibasa ःसरणडा फॉरेस्ट क्षेत्र में सेंचुरी घोषित होने के बाद विकास योजनाओं के कार्यों में फॉरेस्ट से एनओसी लेने और विकास कार्य करने में किस किस प्रकार का बाधा का सामना करना पड़ सकता है, इस बात को लेकर संवेदक लोगों के बीच असमंजस की स्थिति और दुविधा देखी जा रही है. हाँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सेल के खदानों और कुछ माइंस को सेंचुरी से भले ही मुक्त किया गया है,लेकिन इन छेत्र में नए सिरे से किस तरह आम जन जीवन को परिभाषित किया गया है, जनता का मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का किया प्रक्रिया को लागू किया जाएगा, साथ ही विकास कार्यों का काम का किया दिशा निर्देश दिया है, सेंचुरी घोषित किया गया क्षेत्र में अब तक सरकार के स्तर से या जिला प्रशासन के तरफ से विभाग या कार्यकारी एजेंसियाँ को विकास योजना का चयन एवं विकास कार्यों को करने का गाइड लाइन नहीं दिया गया है. सबसे बड़ी समस्या आम जनता जन जीवन पर कितना असर पड़ेगा यह आने वाले समय में दिखने लगेगा. सूत्रों के अनुसार पत्थर खदान और गिट्टी क्रेशर का लीज जल्द ही खत्म होने की चर्चा है, जिससे ठेकेदार वर्ग में काफी बेचैनी देखने को मिल रहा है. सभी प्रकार के विकास कार्यों में गिट्टी की उपयोगिता अधिक होने के कारण ठेकेदार समय पर योजना को पूर्ण करने को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं.
