चांडिल: सरायकेला ज़िले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार रात कुकड़ू प्रखंड के बेरासी सिरुम गांव के छातारडीह टोला में हाथियों के झुंड ने एक गरीब किसान की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया।
जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में जंगली हाथियों का एक झुंड गांव में घुस आया और किसान तपन महतो के खेतों में लगी लगभग एक एकड़ धान की फसल को पूरी तरह रौंद डाला। देखते ही देखते खेत की लहराती फसल बर्बाद हो गई। किसान ने बताया कि यह फसल उसकी सालभर की मेहनत का नतीजा थी, जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने तुरंत डीएफओ और वन विभाग के अधिकारियों से बात की और हाथियों को गांव से भगाने, पीड़ित किसानों को मुआवजा देने तथा गांव में टॉर्च और फटका जैसी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मधुश्री महतो ने सवाल उठाया कि दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसी बड़ी अभयारण्य होने के बावजूद हाथियों के झुंड बार-बार ईचागढ़ क्षेत्र की ओर क्यों पलायन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पाँच वर्षों से यह इलाका हाथियों के उत्पात से परेशान है और हर शाम ग्रामीण डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगलों में भोजन की कमी के कारण हाथी अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं और खेतों के साथ-साथ घरों को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों को नियंत्रित किया जाए और किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ईचागढ़ क्षेत्र में हाथियों का उत्पात एक बार फिर चर्चा में है - ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी है।



