Chaibasa: स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का चाईबासा दौरा मात्र कागजी खानपुरती के लिए था, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जनता के बढ़ते आक्रोश को टटोलने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गुस्से को ठंडा करने के लिए आए थे चाईबासा सदर अस्पताल ?


निलंबित सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी के कार्यकाल की एसीबी जांच होने पर जांच की आंच मंत्री के रिश्तेदारों तक पहुंच सकती है, हां सुशांत कुमार मांझी का आका इमरान अंसारी इस जांच में झुलस सकते हैं



निलम्बित सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी को बर्खास्त करने के लिए एक बार फिर से वाहनों की नो इंट्री लागू करने जैसा जनता का आन्दोलन खड़ा हो सकता है


सुशांत कुमार मांझी के कॉल डिटेल और वॉट्स एप चैटिंग से स्वास्थ्य मद की बन्दर बांट की पोल खुल सकती है

निलंबित सीएस सुशांत कुमार मांझी प्रभारी और अपने अधीनस्त कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों की राशि का घोटाला करने की चर्चा है, जिसे दबाने और जांच का फाइल नहीं खुलने का डर विभाग को सता रही है


चाईबासा/Santosh Verma: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल में पांच बच्चों को HIV positive ब्लड मरीजों को चढ़ाने की जांच में आए राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जनता के बढ़ते आक्रोश को टटोलने और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के गुस्से को ठंडा करने के लिए आए थे। मंत्री इरफान अंसारी का आने का मकसद और कुछ था। हां सूत्रों के अनुसार मंत्री इस घटना से काफी डरे हुए हैं, डरना स्वाभाविक है, निलंबित सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी के कार्यकाल की एसीबी जांच होने पर जांच की आंच मंत्री के रिश्तेदारों तक पहुंच सकती है। हां सुशांत कुमार मांझी का आका इमरान अंसारी इस जांच में झुलस सकते हैं। सुशांत कुमार मांझी के कॉल डिटेल और वॉट्स एप चैटिंग से स्वास्थ्य मद की बन्दर बांट की पोल खुल सकती है। सूत्रों के अनुसार निलंबित सीएस सुशांत कुमार मांझी प्रभारी और अपने अधीन कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों राशि का घोटाला करने की चर्चा है, जिसे दबाने और जांच का फाइल नहीं खुलने का डर विभाग को सता रही है।

ज्ञात हो की जिला शैल्य चिकित्सा पदाधिकारी श्री माँझी के कार्यालय में बैठे DMO के द्वारा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के संवेदक को स्वास्थ्य उप केंद्र भवन का भुगतान नहीं किया जा रहा है, किस आदेश से कार्यकारी एजेंसिय अपने संवेदक को भुगतान नहीं करने का मामला खड़ा है. यह कोई बताने वाला नहीं है. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अब तक सैकड़ों स्वास्थ्य उप केंद्र भवन की स्वीकृति देते हुए जिला परिषद एवं जिला प्रशासन को आवंटन दिया है, लेकिन आज दुख और चिंता का विषय है कि आदिवासियों के हितैषी जनप्रतिनिधि इस जनोपयोगी योजनाओं को शुरू करने में बाधा बने हुए हैं, यहां तक चालू कार्यों में भुगतान तक नहीं किया जा रहा है. जिला शैल्य चिकित्सा पदाधिकारी श्री माँझी के द्वारा गलत रवैया अपनाने के कारण कार्यकारी एजेंसिय विशेष प्रमंडल में संवेदक को भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण स्वास्थ्य योजना का समय पर पूरा होना सम्भव नहीं हो सकता है.

जिला परिषद का मामला अब झारखण्ड की राजधानी पहुंचने वाली है. सूत्रों के अनुसार सामाजिक संगठन इस मामला में दोनों विभाग के मंत्री से मिलकर शिकायत करनें की तैयारी कर रहे हैं. जिला अभियन्ता पर संवेदक चयन में अनियमितता बरतने का भारी दबाव के कारण निविदा का निष्पादन नहीं किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार जिला परिषद अध्यक्ष के स्तर पर संवेदकों को मिलने वाली कार्यदेश की प्रक्रिया लम्बित है, जबकि संवेदकों को कार्य आवंटित किया जा चुका है साथ ही EMD की राशि जमा कर दी गई है. तत्कालीन सिविल सर्जन सुशांत कुमार मांझी के कार्यकाल की वित्तीय जांच होने से जेल तक जा सकते हैं। हां इसलिए की मांझी अपने डीएमओ के साथ मिलकर स्थापना मद एवं अन्य स्वास्थ्य योजना की राशि की जमकर लूट की है। प्रत्येक प्रभारी इस लुट में शामिल रहने की बात कही जा रही है। अपने चहेतों से बिना टेंडर सिविल कार्य कराने और दवा साथ ही अन्य स्वास्थ्य सामग्री की आपूर्ति में भारी कमिशन वसूली किए जाने की भी जोरों की चर्चा है।

इससे पूर्व भी मांझी के विरुद्ध भ्रष्टाचार कार्यशैली के खिलाफ मामला उठा था, लेकिन अपनी ऊंची पहुंच और पैरवी से सभी जांच को ठंडे बस्ते में डलवा देते हैं। विभागीय मंत्री इरफ़ान अंसारी के भाई इमरान अंसारी का नाम बेच कर अपने जांच पर पर्दा डालते रहते हैं। सूत्रों के अनुसार विभागीय मंत्री के भाई इमरान अंसारी का वरदहस्त प्राप्त होने की बात कही जा रही है। हाल की घटना से स्पष्ट हो गया है कि सुशांतो कुमार मांझी सिर्फ स्वास्थ मद की राशि की लुट में गंभीर और मस्त रहें, उन्हें अपनी असल स्वास्थ्य जिम्मेदारी निभाने की कभी गंभीरता नहीं रही। मांझी कम समय में जिला के सबसे भ्रष्ट कार्यशैली वाले पदाधिकारी के रूप में पहचान बनाने में सफलता हासिल कर ली है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी से बहुत जल्द जिला के सामाजिक संगठन मांझी को निलंबित करने से ज्यादा जरूरी है उनको बर्खास्त करने की मांग करेंगे। आज मांझी जैसे पदाधिकारी के कारण सरकार की बदनामी हो रही है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा केवल दो लाख रुपये मुआवजा की घोषणा करना अमानवीय है और पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने एचआईवी पीड़ित मरीजों के संबंध में डीएस डॉ. शिवचरण हांसदा एवं नवनियुक्त प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. भारती गौरेती मिंज से मुलाकात कर विस्तृत जानकारी ली। श्री कोड़ा ने यह जानने का प्रयास किया कि आखिर किन कारणों से बच्चे एचआईवी ग्रसित हुए। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सरकार को कई आवश्यक मेडिकल सुविधाओं के लिए पत्राचार किया गया है, परंतु अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।

श्री कोड़ा ने कहा कि जब चाईबासा ब्लड बैंक का लाइसेंस पिछले कई वर्षों से नवीनीकृत ही नहीं हुआ है, तो यह गंभीर प्रश्न उठता है कि अब तक किस स्तर की जांच प्रक्रिया के तहत मरीजों को रक्त चढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्लड की त्रिस्तरीय जांच आवश्यक है, जिसकी अस्पताल में पूरी तरह कमी है। यह घटना केवल अस्पताल और मेडिकल स्टाफ की लापरवाही नहीं, बल्कि सरकार की गहरी उदासीनता को भी दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी केवल बयानबाज़ी में लगे हैं, जबकि अस्पताल की जमीनी सुविधाएं चरमरा चुकी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा केवल दो लाख रुपये मुआवजा की घोषणा करना अमानवीय है और पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है। श्री कोड़ा ने मांग की कि पूरे राज्य में ब्लड बैंकों की जांच हो और दोषियों के खिलाफ न्यायिक जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।जिला शैल्य चिकित्सा पदाधिकारी श्री माँझी के कार्यालय में बैठे DMO के द्वारा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के संवेदक को स्वास्थ्य उप केंद्र भवन का भुगतान नहीं किया जा रहा है, किस आदेश से कार्यकारी एजेंसिय अपने संवेदक को भुगतान नहीं करने का मामला खड़ा है. यह कोई बताने वाला नहीं है.

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अब तक सैकड़ों स्वास्थ्य उप केंद्र भवन की स्वीकृति देते हुए जिला परिषद एवं जिला प्रशासन को आवंटन दिया है, लेकिन आज दुख और चिंता का विषय है कि आदिवासियों के हितैषी जनप्रतिनिधि इस जनोपयोगी योजनाओं को शुरू करने में बाधा बने हुए हैं, यहां तक चालू कार्यों में भुगतान तक नहीं किया जा रहा है. जिला शैल्य चिकित्सा पदाधिकारी श्री माँझी के द्वारा गलत रवैया अपनाने के कारण कार्यकारी एजेंसिय विशेष प्रमंडल में संवेदक को भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण स्वास्थ्य योजना का समय पर पूरा होना सम्भव नहीं हो सकता है. जिला परिषद का मामला अब झारखण्ड की राजधानी पहुंचने वाली है. 

सूत्रों के अनुसार सामाजिक संगठन इस मामला में दोनों विभाग के मंत्री से मिलकर शिकायत करनें की तैयारी कर रहे हैं. जिला अभियन्ता पर संवेदक चयन में अनियमितता बरतने का भारी दबाव के कारण निविदा का निष्पादन नहीं किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार जिला परिषद अध्यक्ष के स्तर पर संवेदकों को मिलने वाली कार्यदेश की प्रक्रिया लम्बित है, जबकि संवेदकों को कार्य आवंटित किया जा चुका है साथ ही EMD की राशि जमा कर दी गई है।

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