केंद्रीय टीम के जांच में हुआ खुलाशाः बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने की जांच करने पहुंची केंद्रीय टीम, कई दस्तावेज खंगाले
चाईबासा ब्लड बैंक में जांच के रिकॉर्ड तक नहीं
चाईबासा/Santosh Verma: चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच गया है। मामले की जांच को लेकर बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम चाईबासा पहुंची। टीम को जांच में ब्लड बैंक में जांच के प्रौपर रिकॉर्ड नहीं मिले। टीम ने सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में बच्चों के ब्लड ट्रांस्फ्यूजन की हिस्ट्री से लेकर चढ़ाए गए ब्लड की जांच तक के रिकार्ड खंगाले। डॉक्टरों और टेक्नीशियन से पूछताछ की।
संसाधनों की भी जांच की। टीम में मंत्रालय के उपनिदेशक डॉ शोबिनी राजन एवं एम्स, दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांस्फ्यूजन मेडिसिन के एचओडी डॉ हेमचंद्र पांडेय व अन्य शामिल थे। रिकार्ड नहीं मिलने से जांच में परेशानी सामने आ रही है।
राज्यस्तरीय टीम ने भी ब्लड बैंक की जांच की
राज्यस्तर पर गठित टीम ने भी बुधवार को रिकॉर्ड खंगाले। निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य डॉ सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त निदेशक औषधि ऋतु सहाय, रिम्स ब्लड बैंक प्रभारी डॉ सुषमा कुमारी और हिमेटोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक रंजन ने गहन जांच की। टीम जांच रिपोर्ट बनाकर स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी। बता दें कि मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही के आरोप में चाईबासा के सिविल सर्जन डॉ सुशांतो कुमार मांझी और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ दिनेश सवैया को निलंबित कर दिया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ नेहा अरोड़ा के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति पूरे मामले की गहराई से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।
कौन-सी जांच कर रक्त चढ़ाए, पता लगाना मुश्किल
संक्रमित ब्लड चढ़ाने से बच्चों के एचईआई पॉजिटिव पाए जाने के मामले में अब तक की जांच में पता चला है कि ब्लड बैंक में बच्चों को रक्त चढ़ाने के रिकॉर्ड तो हैं, लेकिन चढ़ाए गए रक्त की कौन-कौन सी जांच की गई, इसके रिकार्ड नहीं हैं। ऐसे में जांच टीम को यह पता लगाने में मुश्किल हो रही है कि जो रक्त चढ़ाए गए, उसमें कौन-सी जांच की गई और कौन नहीं। क्या सही और क्या गलत हुआ।

