एक बार फिर अपने हक हुकूक के लिए आंदोलन कर रहे पारा शिक्षक,कोल्हान लेगा बढ़ चढ़ कर हिस्सा

एक बार फिर अपने हक हुकूक के लिए आंदोलन कर रहे पारा शिक्षक,कोल्हान लेगा बढ़ चढ़ कर हिस्सा

शैलेश सुंडी ने कहा अपने हक हुकूक की लड़ाई के लिए कोल्हान के पारा शिक्षक कमर कस चुके है, इस बार आर पार की लड़ाई है










समान काम की समान वेतनमान की मांग

संतोष वर्मा

Chaibasa ःपारा शिक्षक लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर आंदोलित हो गए है।दो साल के बाद ये पहला मौका है जब पारा शिक्षक  संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पारा के सभी संगठन एक जुट होकर आंदोलन कर रहे है। पारा शिक्षकों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए जोरदार आंदोलन की शुरुआत कर दी है।अब तक सत्ता पक्ष के लगभग सभी विधायकों,मंत्रियों और सांसदों को मांग पत्र सौंप दिया गया है।चरणबद्ध आंदोलन का नेक्स्ट फेज चार अगस्त से शुरू हो रहा है।जिसमें चार से सात अगस्त तक अलग अलग जिले के पारा शिक्षक विधान सभा का घेराव करेंगे।

प्रोग्राम इस प्रकार है

चार अगस्त को हजारीबाग, रामगढ़, पाकुड़, पलामू, गढ़वा और लातेहार के पारा शिक्षक विधान सभा घेरेंगे।

5अगस्त को गिरिडीह,खूंटी,लोहरदगा, गोड्डा,दुमका और कोडरमा के पारा शिक्षक। 6अगस्त को चतरा, रांची, सिमडेगा, पु0, सिंहभूम,प0 सिंहभूम, सरायकेला खरसावां के पारा शिक्षक।

7अगस्त को गुमला, धनबाद,जामताड़ा, देवघर,  साहिबगंज, बोकारो आदि के पारा शिक्षक विधान सभा का घेराव करेंगे।

प सिंहभूम के जिला अध्यक्ष शैलेश सुंडी ने कहा अपने हक हुकूक की लड़ाई के लिए कोल्हान के पारा शिक्षक कमर कस चुके है। इस बार आर पार की लड़ाई है।अभी नहीं तो कभी नहीं।सरकार ने दो साल पहले हुए समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।अब समान काम को समान वेतन मान की मांग पर हम विधान सभा घेरने जा रहे है।झामुमो ने अपने घोषणा पत्र की भी भुला दिया है। सत्ता मिली तो तीन माह के अंदर पारा शिक्षकों की स्थाई करने के वायदे से सत्तासीन हुई सरकार सात वर्षों में भी कुछ नहीं दे पाई।

संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय सदस्य दीपक बेहरा ने कहा सरकारी शिक्षकों को 70हजार से एक लाख दस हजार रु का वेतन और पारा शिक्षकों को 18 से 20 हजार का वेतन एक आंख में काजल और एक में सूरमा नहीं तो और क्या है। जबकि हर स्वतंत्र एजेंसी की रिपोर्ट कहती है पर शिक्षक सरकारी शिक्षकों से अधिक काम करते है।हम लड़ेंगे हम जीतेंगे आज तक जो भी लिया है लड़ कर लिया है।हमें अनुदान नहीं हक चाहिए।विधि विशेषज्ञो और महाधिवक्ता की राय भी पारा शिक्षकों के फेवर में है।फिर भी सरकार जिम्मेवारी से भाग रही है।अगुवा नेता शंकर गुप्ता ने कहा पारा शिक्षकों की हालत मनरेगा के मजदूरों से भी बदतर है।ये कैसी विडंबना है सरकार होम गार्ड के जवानों को 42 हजार वेतन और पारा को 20 हजार मानदेय दे रही है।होम गार्ड को भी सरकार 50 से ऊपर दे और पारा को सरकारी शिक्षकों के बराबर।अगर नहीं तो पारा शिक्षक ईंट से ईंट बजा देंगे।ये लड़ाई हमारी अस्तित्व की लड़ाई है।

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