ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी और अभियंता पर केस दर्ज होने से मंत्री दीपिका पाण्डेय की फजीहत हो रही है

 

ग्रामीण कार्य विभाग में SC कोटा के ही अभियंता को मुख्य अभियंता बना रहे हैं, क्या ST या सामान्य कोटा के योग्य अभियंता नहीं हैं, सवाल बड़ा है, जिसका जवाब विभाग देना नहीं चाहती है

ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी और अभियंता पर केस दर्ज होने से मंत्री दीपिका पाण्डेय की फजीहत हो रही है

सरवन कुमार, संयुक्त सचिव श्री रंजन के साथ साथ राजेश रजक व श्री टोप्पो की कार्यशैली पर राजभवन की नज़र

अभियंता प्रमुख कार्यालय में टेंडर कमिटी के सदस्य सह आंतरिक वित्तीय सलाहकार, विभाग के संयुक्त सचिव श्री रंजन और सरवन कुमार दो सौ करोड़ से अधिक की निविदा में संवेदक चयन में धांधली करने का मामला चर्चा में



Chaibasa  ः  उच्च न्यायालय में ग्रामीण कार्य  विभागीय सचिव पर सरवन कुमार और राजेश रजक के साथ साथ अवधेश कुमार के पद पर कार्य करने को लेकर सवाल उठाए जाने का केस दर्ज किए जाने से विभाग के सचिव के श्रीनिवासन और मंत्री दीपिका पाण्डेय पर जांच की आंच पहुंचने के संकेत दिए जाने लगे हैं। हां ग्रामीण कार्य विभाग पहले से ही टेंडर मैनेज और कमिशन वसूली को लेकर ईडी सीबीआई के घेरे में रही है। ग्रामीण कार्य विभाग के प्रभारी पुर्व मुख्य अभियंता सह ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता बिरेंद्र राम जेल जा चुके हैं, वहीं ग्रामीण कार्य विभाग के पुर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल आज तक जेल में बंद हैं। वर्तमान समय में अभियंता प्रमुख कार्यालय में टेंडर कमिटी के सदस्य सह आंतरिक वित्तीय सलाहकार, विभाग के संयुक्त सचिव श्री रंजन और सरवन कुमार दो सौ करोड़ से अधिक की निविदा में संवेदक चयन में धांधली करने का मामला चर्चा में है, इस धांधली में राजेश रजक की भूमिका को अहम माना जा रहा है। जेपी सिंह के कार्यकाल से आज के समय तक टेंडर कमिटी की भूमिका संदेहास्पद रही है। सूत्रों के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय में केस दर्ज करने वाले को मैनेज करने के लिए माफिया अभियंताओं और संवेदकों की टीम लगी हुई है। केस दर्ज होने से यह कयास लगाया जा रहा है कि विभाग की इस केस में फजीहत हो सकती है। साथ ही विभागीय मंत्री के आदेश पर सवाल खड़ा किया जा सकता है। माननीय उच्च न्यायालय में एक और जन हित याचिका दायर जल्द किए जाने की चर्चा हो रही है, जिस में टेंडर कमिटी के द्वारा विगत दो वर्षों में जितनी टेंडर डिसाइड की गई है, सभी की जांच तथा सभी सदस्यों की आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने पर आधारित है। अभियंता प्रमुख कार्यालय में टेंडर प्रक्रिया को देख रहे श्री टोप्पो के द्वारा टेंडर मैनेज करने के लिए पास संवेदक को फेल करने और फेल संवेदक को पास करने का आरोप लगाया जा रहा है, यही कारण है कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर मामला में उच्च न्यायालय में केस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कमिशन वसूली के चक्कर में विकास की रफ्तार धीमी हो चुकी है, इसकी जिम्मेदारी किसकी है, कौन बाधक है, जो समय पर निविदा निष्पादन नहीं करते हैं। कई निविदा एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी निष्पादन नहीं हुआ है। कई ऐसी निविदा है, जिसकी टेक्निकल खोल दिया गया है, लेकिन फाइनेंशियल समय बीतने के बाद भी नहीं खोला जा रहा है। ऐसी सारी जानकारी को एकत्रित कर माननीय उच्च न्यायालय को प्रत्येक निविदा की जानकारी देने पर एक गैर सरकार संगठन ने तैयारी शुरु कर दी है।

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