चाईबासा/संतोष वर्मा: कोल्हान के 87 गांव को बचाने के लिए प्राण की आहुति देने वाले वीर शहीद नायब सूबेदार राम नारायण उर्फ गंगाराम कालुंडिया जी को 43 वाँ शहादत दिवस विगत चार अप्रैल 2025 को मनाई गई थी। ईचा खरकई बांध विरोधी संघ, कोल्हान ने इलिगाड़ा में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर वीर सपूत को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी थी। अस्सी के दशक में ईचा डैम (स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना) के विरुद्ध उग्र आंदोलन किया था। उनके नेतृत्व में कोल्हान के 87 गांव और पूर्ण एवं आंशिक रूप डूबने वाले विस्थापितों को एकजुट कर लड़ाई लड़ी थी।
पुलिस प्रशासन ने विरोध की कुचलने के लिए उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। तब से वीर शहीद गंगाराम विस्थापितों के दिलों दिमाग में अमर हो गए। समीक्षा करते हुए संघ के पदाधिकारीयों ने शहादत दिवस में हुए आय व्यय पर चर्चा करते हुए लोगों के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक में चर्चा करते हुए संघ के अध्यक्ष बिर सिंह बुड़िउली ने कहा कि संघ की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक पार्टी की लड़ाई नहीं है।
हक अधिकार, अस्तित्व, पहचान और विस्थापितों के हितों के रक्षार्थ शहादत से प्रेरित हो कर संघ संघर्ष जारी रखेगी। गांव गांव में जा कर फिर से जनसंपर्क अभियान के माध्यम से विस्थापन के विरुद्ध आंदोलन जल्द शुरू किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में मुख्य रूप शहीद के वंशज रघुनाथ उर्फ रूपनारायण कालुंडिया, अमृत लाल कालुंडिया, सुभाष कालुंडिया, गुलिया कुदादा, बीर सिंह बिरुली, गुलिया कालुंडिया, बिरसा कालुंडिया, मुकेश कुमार कालुंडिया, बुधु लाल कालुंडिया, दशकन तीयू, रविन्द्र अल्डा, मानसा बोदरा, मोटाए कालुंडिया, मिलन कालुंडिया, बहादुर महाकुड संघ के पदाधिकारी सहित ग्रामीण उपस्थित थे।
