सिंहभूम हो बहुल क्षेत्र है यहां हो प्रत्याशी ही चलेगी संताल नहीं
जोबा माझी चार बार राज्य में मंत्री रही लेकिन कभी भी हो बहुल क्षेत्र का विकास के लिए आवाज नहीं उठाया
यह वन पट्टा और जल जंगल और जमीन की लड़ाई का अस्तीतव नहीं केंद्र से योजना लाने और हो बहुल क्षेत्र की समस्पाओं को सदन के पटल पर रखने वाली प्रखर नेत्री की जरूरत
पहले एक महिला और उपर से प्रत्याशी सह सिंहभूम के सांसद गीता कोड़ा पर हमला होना यह काफी निंदनिय है
चाईबासा/संतोष वर्मा : सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र में एक बार फिर गरमाने लगा है हो प्रत्याशी का मामला को लेकर। आदिवासी हो समाज महासभा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा व आदिवासी सेवा र्निवृत संगठन सहित कई संस्थाओं नें कल सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों को लेकर बिशेष बैठक की। बैठक में सिधे सिधे यह मुद्दा छाया रहा की हो बहुल सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र में केवल हो प्रत्याशी ही चलेगा संताल प्रत्याशी नहीं चलेगी। आखिर झारखंड मुक्तिमोर्चा के प्रत्याशी जोबा माझी के प्रती क्यों फुट रहा है गुस्सा। हो समाज की राजनीतिक परिचर्चा सह मतदाता जागरूकता अभियान को लेकर शनिवार को हो समाज के बुद्धिजीवी तथा मानकी-मुंडा संघ के तत्वाधान में बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता मानकी-मुंडा संघ के अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा ने की। परिचर्चा में मतदान के प्रति समाज के जन साधारण को जागरूक करने का निर्णय लिया गया। परिचर्चा में शामिल विभिन हो समाज के संगठन के लोग साथ ही समाज के विभिन्न संगठन एवं संस्थाओ के प्रतिभागियों को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। समाज के प्रबुधजन एवं वक्ताओ ने इस बात पर गहरी चिंता जताया कि झारखण्ड के स्थापना काल के बाद से ही कोल्हान तथा सिंहभूम में हो आदिवासियों का जितना विकास अपेक्षित था उसके अनुरूप विकास नगण्य हुआ है। कोल्हान की धरती खनिज संपदा से परिपूर्ण है।
परंतु फिर भी यहाँ की बहुसंख्यक हो समाज विकास की दौड़ में पीछे रह गया. विकास के हर सूचकांक यथा शिक्षा, स्वास्थ्य, जीविकोपार्जन, रोजगार, कुशल एवं दक्ष कार्य एवं राजनीतिक आदि क्षेत्र में हो समाज तथा कोल्हान पिछड़ता जा रहा है. खनिज संपदा से परिपूर्ण होने के वाबजूद कोल्हान की जनता और गाँव में बुनियादी सुविधा का घोर अभाव है. युवा वर्ग बेरोजगार है, आज भी सिंहभूम के कोने कोने से हो समाज के युवा रोजगार की तलाश में पलायन करने के लिए विवश हैं. वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने एक स्वर में इस बात का समर्थन किया कि अब हो समाज को एक राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ्ने का समय आ गया है. इसलिए हो समाज की राजनीतिक शक्ति का धुर्वीकरण करना जरूरी है.
उपस्थित सदस्यों ने विश्वास जताया कि आसान लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव में हो समाज एकजुठता के साथ सभी राजनीतिक पार्टीयों का सामना करेगा. समाज के इस राजनीतिक परिचर्चा सह जागरूकता अभियान मे हो समाज के विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन एवं संस्थाओं के प्रतिनिधिगण उपस्थित हुए. परिचर्चा को सफल बनाने में मानकी-मुंडा संघ, कोल्हान आदिवासी एकता मंच, आदिवासी हो समाज महासभा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा, सिंहभूम आदिवासी समाज रांची, जोहार, सहित कई आदिवासी संगठन के लोग मौजूद थे.
हो समाज राजनीतिक परिचर्चा सह मतदाता जागरूकता अभियान
यह लाया गया प्रस्ताव :
हो समाज की राजनीतिक एकता को एकजुट करना, इसे विखराव होने से बचाना।
56% बहुसंख्यक हो समाज को सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र में एक राजनीतिक विकल्प के रूप स्थापित करना।
हो समाज की राजनीतिक बातचीत की शक्ति को बढ़ाना
हो समाज की राजनीतिक शक्ति के साथ कोल्हान विकास के मॉडल को स्थापित करना।
दीर्घकाल मे हो समाज समर्थित राजनीतिक पार्टी की स्थापना करना।
आसन लोकसभा चुनाव मे हो समाज का राजनीतिक समर्थन से हो समाज के प्रबल प्रत्यासी को समर्पित करना।
आगामी विधानसभा चुनाव में हो समाज राजनीतिक पार्टी से कोल्हान के पाँच विधानसभा मे प्रत्यासी तैयार करना।
झारखंड राज्य में हो समाज की राजनीतिक पहचान स्थापित करना, झारखंड के विकास मे हो समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना।
