रोजलीन पुरती का है 10 माह सेवानिवृत होने में तो राजेंद्र केराई का चलता है ओडिसा में ईलाज
तबादला में भी हुआ ब्यापक गड़बड़ी, मार्च क्लोजिंग में लेखाजोखा में हो सकता है व्यापक गड़बड़ी, नहीं हो पाई है कस्तूरबा गांधी बालिका आवासिय विद्यालय का टेंड़र पूरा, जिला शिक्षा पदाधिकारी हूए फेल
17-17 साल से जमें है जिला के विभिन्न प्रखंडों में बीपीओ क्यों नहीं होती इनके तबादलें,जबकी सूचना है कि बीपीओ के तबादले पर उपायुक्त की लग चुकी है मोहर तो डीईओ क्यों नहीं जारी कर रहें बीपीओ का तबादला का आदेश जारी
हाईकोर्ट भी 21 अक्टूबर 2016 के आदेश से एक साल से कम अवधि में किए ट्रांसफर को गलत बताया है
चाईबासा / संतोष वर्मा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के कस्तूरबा गांधी आवासिय बालिका विद्यालय में पदस्थापित लेखापालों सह कंप्यूटर अॉपरेटरों का ताबदला को लेकर नियम बिरूद्ब तबादलाजिला शिक्षा पदाधिकाली के द्वारा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।तबादले में वैसे भी लेखापाल है जिनकी सेवाकाल मात्र दस माह बचा हुआ है और कोई बिमारी का हवाला दिया लेकिन विभाग के पदाधिकारी द्वारा किसी वेक्ती विशेष को लाभ पहूंचाने और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में टेंडर प्रर्किया में हुए ब्यापक घोटाले को दबाने का प्रयास को लेकर लेखापालों सह कंप्यूटर अॉपरेटरों का तबादला आन्नफान्न में गुपचुप तरिके से कर दिया गया।
जबकी मार्च कलोजिंग सर पर है वैसे में वार्षिक लेखाजोखा भी प्रभावित होने की पुरी संभावना है। वहीं मझगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक की बहन का मात्र दस माह ही सेवाकाल बची हूई है उसे भी झीकपानी तबादला कर दिया गया है। जबकी रोजलीन पुरती नें जिला शिक्षा पदाधिकारी-सह- जिला कार्यकम पदाधिकारी झारखण्ड शिक्षा परीयोजना चाईबासा को स्थनांतरण के संबध में पत्र लिखी है जिसके माध्यम से रोजलीन पुरती का कहना है की जिला कार्यालय के ज्ञापांकः KGBV/05/2023/1774 चाईबासा, दिनांक: 23-12-2023 के आलोक में कार्यालय आदेश हुआ है के आलोक में कहना है की मेरा वर्तमान पदस्थापन कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, तांतनगर मे है आदेशोपरांत मेरा नव पदस्थापन कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, झिंकपानी में हुआ है। आग्रह पुर्वक कहना है कि मात्र 10 माह (अक्टूबर 2024) तक मेरा सेवानिवृति है इसलिए मेरे सेवाकाल को देखते हुये विचारनीय है। अतः श्रीमान् से आग्रह पुर्वक निवेदन है की मेरे अवस्था को देखते हुये मेरे रथनांतरण पर पुनःविचार किया जाये। मुझे मेरे वर्तमान पदस्थापन कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, तांतनगर में ही कार्य करने का आदेश दिया जाए।
वहीं
राजेन्द्र केराई का कहना है की मेरी वर्तमान पदस्थापन कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, कुमारडुंगी एवं अतरिक्त प्रभार कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय मझगाँव में है आदेशोपरांत मेरा नव पदस्थापन कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय सोनुवा एवं गुदड़ी में हुआ है। आग्रह पुर्वक कहना है कि बिते लगभग 09 एवं 10 वर्ष से मेरा ईलाज उड़ीसा के कटक में लगातार चल रहा है। मैं वर्तमान समय में दो विद्यालय का कार्यभार में हूँ, जिसका निवाह्न पूरी निष्ठा से करते आ रहा हूँ। मैं मझगांव के खरपोस गाँव के मूल निवास में ही निवास करते हुये कार्य का निर्वाह्न कर रहा हूँ।इसलिए आग्रह पूर्वक कहना है की भवदीय के आदेशानुसार कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, सोनुवा एवं गुदड़ी का कार्य करना मेरे स्वास्थ को देखते हुये संभव नहीं है।इसलिए निवेदन है की मेरे स्वास्थ सबंधी समस्या को देखते हुये मेरे स्थनांतरण पर पुनःविचार किया जाये। मुझे मेरे वर्तमान पदस्थापन कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय कुमारडुंगी एवं अतरिक्त प्रभार कस्तुरबा गाँधी बालिका विद्यालय, मझगाँव में ही कार्य करने का आदेश दिया जाए।
हाईकोर्ट भी 21 अक्टूबर 2016 के आदेश से एक साल से कम अवधि में किए ट्रांसफर को गलत बताया है
रेट ने प्रार्थी शिक्षक के रिटायरमेंट से केवल 7 महीने पहले किए ट्रांसफर आदेश की क्रियांविति पर रोक लगाते हुए प्रमुख शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक सहित अन्य से जवाब मांगा है। रेट ने यह अंतरिम निर्देश रघुवीर सिंह की अपील पर दिया। अधिवक्ता आरपी सैनी ने बताया कि अपीलार्थी झुंझुनूं जिले में स्थित स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर है। राज्य सरकार ने 4 जनवरी को उसका ट्रांसफर बाड़मेर में कर दिया। जिसे रेट में चुनौती देते हुए कहा कि सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के नियम अस्सी के तहत सेवानिवृत्ति से दो साल की अवधि में कर्मचारी अपने सेवानिवृत्त परिलाभों के लिए दस्तावेज तैयार करता है, इस दौरान उसका ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। वहीं हाईकोर्ट भी 21 अक्टूबर 2016 के आदेश से एक साल से कम अवधि में किए ट्रांसफर को गलत बताया है।
इसलिए उसके ट्रांसफर आदेश की क्रियांविति पर रोक लगाई जाए। निर्देश रघुवीर सिंह की अपील पर दिया। अधिवक्ता आरपी सैनी ने बताया कि अपीलार्थी झुंझुनूं जिले में स्थित स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर है। राज्य सरकार ने 4 जनवरी को उसका ट्रांसफर बाड़मेर में कर दिया। जिसे रेट में चुनौती देते हुए कहा कि सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के नियम अस्सी के तहत सेवानिवृत्ति से दो साल की अवधि में कर्मचारी अपने सेवानिवृत्त परिलाभों के लिए दस्तावेज तैयार करता है, इस दौरान उसका ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। वहीं हाईकोर्ट भी 21 अक्टूबर 2016 के आदेश से एक साल से कम अवधि में किए ट्रांसफर को गलत बताया है। इसलिए उसके ट्रांसफर आदेश की क्रियांविति पर रोक लगाई जाए।
