आज भी टेंडर मैनेज के नाम पर जिला के इशारे पर कार्यकारी एजेन्सी 8 प्रतिशत कमिशन वसुली कर रहें
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : पश्चिमी सिंहभूम जिला में एक बार फिर से घोटाला की गुंज सुनाई देने लगी है, हां यह वही घोटाला की बात हो रही है जो इन दिनों चौक चौराहे और होटल पान दुकान में हो रही है। गौरतलब है कि डीएमएफटी फंड से स्वीकृत की गई सौ करोड़ से अधिक की योजना का टेंडर ऑफ लाईन कर मैनेज टेंडर कर दिया गया है। जिला प्रशासन के संरक्षण में कार्यकरी एजेन्सी विषेश प्रमण्डल, राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम में खुले आम टेंडर मैनेज घोटाला को अंजाम दिया गया है। डीसी साहेब खामोश हैं। डीडीसी अपने पुराने कार्यशैली से माननीयों को आगे कर खेल को अंजाम दिया है।
टेंडर मैनेज के नाम पर 8 प्रतिशत कमिशन की वसुली
सूत्रों की माने तो आज भी टेंडर मैनेज के नाम पर जिला के इशारे पर कार्यकारी एजेन्सी 8 प्रतिशत कमिशन वसुली कर रहें हैं, जिसकी शिकायत विगत तीन साल से की जा रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि जिला के भ्रषट पदाधिकरी और माफिया अभियंता ईडी सीबीआई और एनआईए को भी मैनेज कर लिया है। ई गवर्नेंस प्रौवैधिकी विभाग के दिशा निर्देश सभी विभाग को ई प्रोक्योरमेंट तथा ऑन लाईन मोड पर EMD और टेंडर फीस जमा किया जाना है, हार्ड कॉपी के रूप में ऑफ लाईन प्रक्रिया समाप्त कर दिया गया है।
लेकिन सभी कार्यकरी एजेंसी को विभागों के द्वारा ई गवर्नेंस के दिशा निर्देश को नज़र अंदाज़ कर आर्थिक स्वार्थ सिद्ध के लिए अपने नौकरी को भी ताक में रखकर 16 अक्टूबर के बाद भी टेंडर प्रक्रिया को ऑफ लाईन प्रक्रिया में हार्ड कॉपी जमा ले कर संवेदक को टेंडर मैनेज कराया गया है।
इस पुरी घटना में 10 करोड़ की वसुली किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है
इस मामले को पूर्व विधायक श्री मंगल सिंह बोबोंगा ने टेंडर मैनेज घोटाला बताया है। मुख्य सचिव को उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, साथ ही निविदा रद्द कर ऑन लाईन पद्धति पर पुनः टेंडर अमंत्रित करने की मांग की है। जांच में विलम्ब होने पर डीसी और विभागाध्यक्ष के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।

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