केंद्रीय रेशम बोर्ड का प्लेटिनम जयंती वर्ष समारोह तहत तसर रेशम कृषि मेला-2023 का आयोजन किया गया


चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत अग्रपरियोजना केंद्र-रेशम परिसर, चाईबासा के प्रांगण में मुख्य अतिथि- महिला, बाल-विकास विभाग एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री श्रीमती जोबा माझी और विशिष्ट अतिथि- सिंहभूम सांसद, श्रीमती गीता कोड़ा, जिला उपायुक्त अनन्य मित्तल की मौजूदगी में केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, केंद्रीय रेशम बोर्ड- रांची के तत्वाधान पर केंद्रीय रेशम बोर्ड का प्लेटिनम जयंती वर्ष समारोह तहत तसर रेशम कृषि मेला-2023 का आयोजन किया गया। 


समारोह शुभारंभ से पूर्व मौजूद अतिथियों द्वारा अग्रपरियोजना केंद्र में मौजूद कोकून बैंक कक्ष का अवलोकन कर संचालित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की गई, तत्पश्चात पर्यावरण संरक्षण निमित एवं रेशम कीट पालन में सहयोगी वृक्ष का रोपण किया गया। 


समारोह स्थल आगमन पर सर्वप्रथम उपस्थित अतिथियों को पुष्प गुच्छ व शॉल, मोमेंटो प्रदान कर स्वागत, दीप प्रज्वलन व राष्ट्रगान के साथ तसर रेशम कृषि मेला-2023 का शुभारंभ हुआ। समारोह के दौरान बताया गया कि पूरे देश में रेशम के उत्पादन में 70% हिस्सेदारी झारखंड से है तथा राज्य में रेशम का 40% उत्पादन कोल्हान-सारंडा क्षेत्र से होती है। समारोह में 6 तसर किसान सहित उत्पादन को बढ़ाने में विशेष सहयोग करने वाले तसर वैज्ञानिकों को प्रशस्ति पत्र/मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती माझी ने तसर उत्पादन में सारंडा क्षेत्र को देश भर में अग्रणी बनाने के लिए जिले के तसर उत्पादकों व वैज्ञानिकों/विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी गई। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के द्वारा नित्य नए शोधकर उन्हें किसानों से अवगत करवाया जाता है तथा किसान भाइयों एवं बहनों के द्वारा कड़ी मेहनत और विधिवत देखभाल के साथ कोकुन का उत्पादन किया जाता है तथा इस क्षेत्र के कोकुन की क्वालिटी भी उत्कृष्ट है।


समारोह में अपने संबोधन के दौरान सिंहभूम सांसद श्रीमती गिता कोड़ा ने कहा कि समारोह के पृष्ठभूमि में एक स्लोगन लिखा है, आदिवासियों की आस, तसर से विकास। उन्होंने कहा कि यह लाइन अपनी सार्थकता को साबित करता है, क्योंकि तसर का उत्पादन सबसे अधिक जंगल क्षेत्र में ही होता है। उन्होंने कहा कि समारोह में बार-बार जिक्र किया जा रहा है कि चाईबासा अंतर्गत तसर का सबसे अधिक उत्पादन सारंडा के क्षेत्र में होता है। यह जान कर काफी गौरवान्वित महसूस होता है कि मेरी जन्मस्थली भी सारंडा क्षेत्र ही है। उन्होंने कहा कि तसर की खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन करने में भी काफी उपयोगी है।

समारोह को संबोधित करते हुए जिला उपायुक्त मित्तल ने कहा कि तसर रेशम कृषि मेला में शामिल होकर आप सभी ने तसर उत्पादन में वृद्धि लाने हेतु हो रहे नित्य नए प्रयोगों के बारे में जानकारी प्राप्त किया। 


उन्होंने कहा कि तसर उत्पादक स्वयं के रोजगार सृजन को बढ़ाते हुए लाइवलीहुड के कार्यों में भी बेहतर योगदान दे रहे हैं। उपायुक्त के द्वारा कोकुन उत्पादन में संलग्न किसानों से अपील किया गया कि आप सभी अच्छे क्वालिटी के बीज अग्रपरियोजना केंद्र को अवश्य उपलब्ध करवायें, ताकि अन्य तसर उत्पादकों को परियोजना के माध्यम से बेहतर बीज उपलब्ध करवाया जा सके। 


उन्होंने कहा कि तसर उत्पादन को रोजगारपरक बनाने के लिए जिला प्रशासन विभाग के साथ लगातार प्रयासरत है। जिले में तथा आसपास के क्षेत्र में संचालित केंद्रों को लाइवलीहुड का एक अभिन्न केंद्र बनाते हुए सभी के सार्थक सहयोग से इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया जाना है। 

उक्त तसर रेशम कृषि मेला-2023 में सहायक समाहर्ता सुश्री श्रुति राजलक्ष्मी, बुनियादी तसर रेशमकीट बीज संगठन-केंद्रीय रेशम बोर्ड, बिलासपुर-छत्तीसगढ़ के निदेशक डॉ.टी.सेल्वकुमार, केंद्रीय तसर अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान- केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय-भारत सरकार, रांची के निदेशक डॉ.एन.बी चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे।

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