योजना का शिलान्यास होने के बाद कई माह गुजर जाने के बाद भी नहीं किया कार्य शुरू, छेत्र के मंत्री के उपर उठ रहा बड़ा सवाल

मामला कैबिनेट मंत्री चंपाई सोरेन अपने ही मंत्रालय आदिवासी कल्याण विभाग से राजनगर प्रखण्ड में स्वीकृतज कराए गए ड्रीम प्रोजेक्ट मांझी परगना हाउस का 

स्थल परिवर्तन की स्वीकृति विभाग से नहीं मिलने से संवेदक उहापोह की स्थिति में


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : कोल्हान टाइगर के नाम से विख्यात सराईकेला विधानसभा के विधायक और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री चंपाई सोरेन अपने ही मंत्रालय आदिवासी कल्याण विभाग से राजनगर प्रखण्ड में स्वीकृतज कराए गए ड्रीम प्रोजेक्ट मांझी परगना हाउस का कार्य विगत एक वर्ष से शुरू नहीं हो सका है। विदित हो कि उक्त योजना शुरूआती दौर से ही जमीन विवाद का चक्कर है। 

ड्रीम प्रोजेक्ट योजना मांझी परगना हाउस

मंत्री ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट योजना मांझी परगना हाउस को गोमदेसाई में बनाने के नाम पर विभाग से स्वीकृति दी गई थी, लेकिन जब जमीन की सीमांकन करने की करवाई शुरू की गई तो स्थानीय लोगों ने ग्राम सभा कर मांझी परगना हाउस बनाने नही देने का प्रस्ताव पारित कर दिया, जिसके बाद उक्त योजना के लिए अन्य स्थल का खोज किया जाने लगा। तब राजनगर प्रखण्ड में ही बगराइसई में भुदान मिला, जिसपर बहुत ही उल्लास के साथ बड़े पैमाने में शिलान्यास कार्यक्रम का मंत्री और सांसद श्रीमती गीता कोड़ा के उपस्तिथि में संपन्न हुआ था, जिसमें भुदाताओं को सम्मानित भी किया गया।

शिलान्यास के बाद भी संवेदक द्वारा कार्य शुरू नही किया गया

इस योजना का शिलान्यास होने के बाद कई माह गुजर जाने के बाद भी संवेदक द्वारा कार्य शुरू नही किया गया है, जो छेत्र के मंत्री के उपर बड़ा सवाल उठ रहा है। इधर संवेदक से मिली जानकारी के अनुसार विभाग अब तक स्थल परिवर्तन किए जाने की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नही किया गया है। 

कार्यपालक अभियंता ने संवेदक को स्पष्ट रूप से कहा है की जबतक विभाग से स्थल परिवर्तन की स्वीकृति नहीं हो जाती है तब तक किसी तरह का भुगतान का दावा मान्य नहीं किया जाएगा। अब देखना है कि मंत्री जी अपने ही विभाग में अपने ही ड्रीम प्रोजेक्ट मांझी परगना हाउस का निर्माण कार्य शुरू कराएंगे कि नहीं अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।

गोमदेसई में तो मांझी परगना हाउस नहीं बनने दिया गया, किया बगराई साई में भी कार्य शुरू होने पर प्रश्न चिन्ह है।वहीं स्थल परिवर्तन की स्वीकृति विभाग से नहीं मिलने से संवेदक उहापोह की स्थिति में।अब  विभाग कियूं नही दे रही है स्थल परिवर्तन की स्वीकृति। विभाग से स्थल परिवर्तन की स्वीकृति मिलने पर ही संवेदक को कार्य में भुगता किया जायेगा।

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