सिविल सर्जन नें लेखापाल मनोज साव के बिरूद्ध अभियान निर्देशक को 11 मई को ही सेवा से बर्खास्थ करने की किया था अनुशंसा, तीन माह बित गया लेकिन अब तक नहीं हुई कार्रवाई
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : कौन है मनोज साव जिसके बिरूद्व ममता वाहन संचालन के नाम पर मालूका कि दूरी आठ किमी के बजाय 22 किमी दिखा कर निकाल लिए लाखौ रूपये। जांच में दोषी पाया लेखापाल मनोज साव और जांच दल नें फर्जीवाड़ा कर लाखो रूपये की निकासी किये जाने के बिरूद्ध एफआईआर दर्ज करने की बात कही थी।इधर जांच दल के द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद लेखापाल मनोज साव के बिरूद्व चाईबासा सिविल सर्जन के द्वारा स्वास्थ विभाग के अभियान निदेशक को तीन माह पहले ही यानी 11 मई को सेवा से बर्खास्त करने के लिए अनुशंसा पत्र भेज दिया गया था लेकिन आज तीन माह बित गया मगर अभियान निदेशक के द्वारा कार्रवाई नहीं कि गई। मजे की बात यह है कि जिस मनोज साव के बिरूद्व लाखों रूपये कि हेरा फेरी किये जाने का आरोप सिद्ब है उस लेखापाल को जगन्नाथपुर सीएचसी से हटाकर प्रतिनियुक्ति पर मझगांव सीएचसी भेजा गया फिर मेहरबानी ऐसी हुई कि मझगांव से हटाकर चाईबासा सदर अस्पताल मुख्यालय में प्रतिनियूक्ति पर भेज दी गई वह भी वैसे जगह जिस डीपीएम बिजय कुमार सिंह नें मनोज साव के बिरूद्व जांच कर दोषी करार किया था उसी के सहयोगी बनाया गया।
जानिए किया है पुरा मामला
पश्चिमी सिंहभूम जिले में अनुबंध पर बहाल लेखापालों द्वारा कभी फर्जी भाउचर बनाकर लाखों रुपए की निकासी की जा रही है तो कहीं स्वास्थ्य विभाग में चल रहे ममता वाहन में विभाग द्वारा निर्धारित दूरी की बजाय कई अधिक दूरी दिखाकर ममता वाहन संचालक के खाते में लेखापाल द्वारा रुपए डाल निकासी कर विभाग के खजाने को लूटने का काम किया जा रहा था। आरबीसी के तहत स्वास्थ्य विभाग में अपने सगे भाई के खाते में रुपए डाल दिए जा रहे थे। जबकि आरबीएस के तहत चलने वाले वाहन का कागजात किसी और के नाम था। इधर गोइलकेरा निवासी नितिन द्वारा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी सीएचसी में चल रहे ममता वाहनों का लेखा-जोखा सूचना अधिकार के आधार पर मांगा गया था।
हलांकि जगन्नाथपुर सीएचसी द्वारा ही केवल ममता वाहन का लेखा-जोखा का ब्योरा अब तक उपलब्ध कराया गया है। जिसमें पाया गया है कि तत्कालीन लेखापाल जगन्नाथपुर द्वारा ममता वाहन संचालक के खाते में मालूका की दूरी 7-8 किमी की बजाय 22 किमी दिखा कर राशि की निकासी की गई है। जिसका खुलासा जांच दल नें किया था। इसी खबर को उपायुक्त ने भीासंज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के तीन सदस्यों का जांच दल बनाया था।
टीम में स्वास्थ्य विभाग के डीटीओ भारती मिंज, एसीएमओ डॉ. जगदीश प्रसाद, डीपीएम विजय कुमार व एक सहायक कर्मी शामिल थे। दूसरे जांच दल में जगन्नाथपुर के कार्यपालक दंडाधिकारी सह कुमारडुंगी के अंचलाधिकारी सुशमा लकड़ा को बनाया गया था। जिला प्रशासन की ओर से सुशमा लकड़ा द्वारा मामले की जांच की गई। जिसमें पाया गया कि मालूका से जगन्नाथपुर की दूरी 22 किमी दिखाकर रुपए की निकासी हुई है। स्वास्थय विभाग द्वारा तीन सदस्य जांच दल जगन्नाथपुर पहुंचा और मामले का चार घंटे तक तक जांच किया। जांच में पाया गया कि जगन्नाथपुर से मालूका की दूरी आठ किमी ही है। इस दौरान एसीएमओ डॉ. जगदीश प्रसाद व डीपीएम विजय कुमार द्वारा ममता वाहन संचालक दिनेश शर्मा से पूछताछ किया तो उसने भी कभी 25 किमी तो कभी 30 किमी जगन्नाथपुर से मालूका की दूरी बताई।
जांच में तत्कालीन लेखापाल मनोज साव पर लगाया गया आरोप सही साबित हुआ। इधर बीपीएम विजय कुमार ने ममता वाहन के नाम पर हुई लूट की जानकारी सही पाए जाने पर इसकी जानकारी दूरभाष पर अपने वरीय पदाधिकारी को दे दी थी।
लेखापाल की तो नौकरी जाएगी ही, ममता वाहन संचालक पर भी होगा एफआईआर : डॉ. जगदीश
जांच करने आए चाईबासा सदर अस्पताल के ऐसीएमओ डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कि सात से आठ किमी मालूका से जगन्नाथपुर की दूरी को 22 किमी दिखा कर निकासी किए गए रुपए का आरोप सही साबित हुआ है। उन्होंने ममता वाहन के संचालक दिनेश साव को कहा है लेखापाल की नौकरी तो जाएगी ही संचालक पर भी एफआईआर होगा। वहीं बीपीएम विजय कुमार ने जहां तीन वर्ष के ममता वाहन संचालन का खाता सीज कर ले गए।
वहीं खाते में कई जगह मालूका की दूरी 7 किमी की बजाय 22-25 किमी दिखाए जाने का प्रमाण भी पाया। इधर स्वास्थय विभाग का डीपीएम भारतीय मिंज ने जगन्नाथपुर से मालूका की दूरी नापने के लिए दो मार्ग से सफर तय किया तो पता चला कि मालूका की दूरी आठ किमी और तोड़ागहातु होकर जाते है तो 11-12 किमी है। फिर भी 22 किमी नहीं होता है। जबकी जगन्नाथपुर सीएचसी के अंदर 12 प्रसव केंद्र हैं। विभिन्न पंचायतो में जहां प्रसव कराने की सुविधा उपलब्ध है।
