कोर्ट पहुंची हो भाषा प्रेमियों की पदयात्रा, आदिवासी अधिवक्ताओं ने किया स्वागत


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने और उसे झारखंड की प्रथम राज्य भाषा का दर्जा दिये जाने की मांग को लेकर आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान जोड़ापोखर झींकपानी की ओर से 300 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली जा रही है। 

यह पदयात्रा सड़क मार्ग से आगे बढ़ रही है।

इस क्रम में मंगलवार को यह पदयात्रा चाईबासा स्थित व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंची। यहां आदिवासी समुदाय के अधिवक्ताओं की ओर से पदयात्रा में शामिल हो भाषा प्रेमियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अखिल भारतीय परिसंघ ने भी स्वागत में भागीदारी निभायी। 


पदयात्रियों को पानी और खाद्य सामग्री दी गयी। 

इस मौके पर परिसंघ के सचिव बीरसिंह बिरूली ने कहा कि इसी माह 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर एकदिवसीय धरना कार्यक्रम आयोजित की गयी है। आप सबों को पूरे जोश खरोश के साथ इसमें भाग लेना है। धरने के माध्यम से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा झारखंड राज्य की पहली राज्य भाषा का दर्जा दिये जाने की मांग की जायेगी। 

इस आंदोलन को हरहाल में मुकाम तक पहुंचाया जायेगा। 

इस मौके पर अधिवक्ता रमेश जेराई, रोशन गागराई, वीरसिंह बिरूली, सुरेंद्र पुरती, अंजू बानसिंह, लक्ष्मी सिंकु, जोशपिन सुंडी, किरण बोयपाई, मधुसूदन बानरा, नरेश तियू आदि मौजूद थे।

Post a Comment

Do live your Comments here! 👇

Previous Post Next Post