मतकमहातु देशाऊली तालाब सिकुड़ने से स्थानीय लोग प्रभावित
जीर्णोद्धार के अभाव में मछली पालन, बत्तख पालन, बागवानी बंद
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : मतकमहातु स्थित देशाऊली तालाब का आकार जिर्णोद्धार के अभाव में सिकुड़ता जा रहा है। इससे इसकी गहराई लगातार कम होती जा रही है। इस कारण बरसात में तो इसमें पानी रहता है। लेकिन गर्मी के मौसम में पानी घुटनों तक ही रहता है। इससे तालाब पर निर्भर रहनेवालों को परेशानी हो रही है। स्थानीय लोग इसमें नहाते हैं। कपड़े भी धोते हैं। मवेशी अपनी प्यास भी इसी से बुझाते हैं। लेकिन जीर्णोद्धार नहीं होने से अब लोगो की परेशानी और बढ़ रही है।
ग्रामीण महेंद्र देवगम, पाईकिराय देवगम, नोंदो देवगम आदि ने बताया कि यह तालाब हमारी आस्था का केंद्र भी है। क्योंकि यहीं पर हमारी पूजनीय तथा पवित्र स्थल देशाऊली भी है। इसलिये इस तालाब के जिर्णोद्धार की जरूरत अति आवश्यक है। यदि जीर्णोद्धार हो जाता है तो किसान पूर्व की भांति आसपास के खेतों में बागवानी भी कर सकेंगे। लेकिन जिर्णोद्धार नहीं होने के चलते तालाब कमल और झाड़ियों से भर गया है।
इस कारण अब इसमें नहाना भी डरावना लगता है। पर्याप्त पानी के अभाव में अब इसमें मछली पालन भी बंद हो चुका है। जबकि पहले मत्स्य पालन से भी स्थानीय लोगों को अच्छी आमदनी हो जाती थी। बड़ी संख्या में बत्तख भी पाले जाते थे। आसपास के गरीब तबके के लोग इसमें से घोंघा निकालकर उसे बाजार में बेचकर अपनी जीविका भी चलाते थे। लेकीन अब उनकी कमाई का यह साधन भी छिन गया है।
मतकमहातु गांव की पूर्वी दिशा में अवस्थित इस तालाब करीब एक एकड़ में फैला हुआ है और ये गांव की सार्वजनिक संपत्ति की श्रेणी में आता है जिसके रखरखाव की नैतिक जिम्मेदारी सभी ग्रामवासियों की होती है।


