पश्चिमी सिंहभूम उप विकास आयुक्त संदीप बक्शी द्वारा फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर अनुसूचित जनजाति कोटे से सरकारी नौकरी हासिल किया गया है जिसके कारण वास्तविक अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लोगों का संवैधानिक अधिकार छीन रहा हैः रेयांस सामड
चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : झारखंड पार्टी युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष रेयांस सामड ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम उप विकास आयुक्त संदीप बक्शी द्वारा फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर अनुसूचित जनजाति कोटे से सरकारी नौकरी हासिल किया गया है जिसके कारण वास्तविक अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लोगों का संवैधानिक अधिकार छीन रहा है और राजकीय धन का दुरुपयोग हो रहा है।
पूर्व में इस मामले को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, आजसू, जनता दल यूनाइटेड ,मुंडा मानकी संघ,आदिवासी हो सामाज महासभा द्वारा मुख्यमंत्री ,आदिवासी कल्याण आयुक्त, मुख्य सचिव , प्रधान सचिव को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया था । झारखंड सरकार द्वारा सूचीबद्ध अनुसूचित जनजातियों की सूची में 32 उपजातियां हैं उप विकास आयुक्त इनमें से नहीं आते हैं अब आप ही बताइए क्या बंगाली आदिवासी हो सकता है ऐसे परिस्थिति में उप विकास आयुक्त को निर्गत अनुसूचित जनजाति श्रेणी से संबंधित जाति प्रमाण पत्र उचित नहीं है।
यह भी विदित है कि राज्य सरकार द्वारा पहले ही उप विकास आयुक्त की जाति के सत्यापन से संबंधित मामला मेमोरेंडम न• 11523 दिनांक 20/11/2017 के द्वारा cast scrutiny commitee, jharkhand को भेजा गया है जो उक्त समिति के पास अब तक लंबित है। वर्तमान में उप विकास आयुक्त के जाति प्रमाण पत्र का मामला W •P •[S]• No•4806 of 2018 मा० उच्च न्यायालय झारखंड में विचाराधीन है जिस पर विगत 8 मार्च 2020 को सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने कास्ट स्क्रुटनी कमिटी झारखंड को उस आदेश के प्रति प्राप्त होने की तिथि से 6 सप्ताह के भीतर संबंधित रिपोर्ट के साथ आने का निर्देश दिया है। जिसका समय सीमा बहुत पहले ही समाप्त हो चुका है परंतु अब तक रिपोर्ट समर्पित नहीं किया गया है जो घर चिंता का विषय है।
अपने उक्त आदेश में माननीय उच्च न्यायालय ने यहां पर स्पष्ट किया है कि संदीप बक्शी का नौकरी और पदोन्नति कास्ट स्क्रुटनी कमेटी झारखंड के रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। 2017 में रघुवर की सरकार थी जिस कारण इस मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं दिया गया परंतु वर्तमान में हेमंत की सरकार होने के बावजूद मामले को लंबित करना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है आदिवासी होने के नाते।
