चक्रधरपुर : कोल्हान नितिर तुरतुंग स्टडी सेन्टर सह सगोम लाइब्रेरी, चक्रधरपुर के छात्र-छात्राएं ने आदिवासी हो समाज युवा महासभा के द्वारा चलाई जा रही जागरूकता अभियान के तहत हो भाषा को भारतीय संविधान के 8 वीं अनुसूची में सूचीबद्ध कराने के लिए चिट्ठियां लिखी। यह मांग लम्बे समय से लंबित है। हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से हो भाषा की एक पहचान बनेगी और राष्ट्रीय स्तर एक पहचान मिलगी और हो भाषा में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध हो जाएगी और स्कूल और कॉलेज की किताबें हो भाषा में सरलता से उपलब्ध हो जाएगी। हो भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल होने से साहित्य अकादमी से मान्यता मिल जायेगी और साहित्यकारों और कवियों को उचित प्रोत्साहन मिलेगा।
इस भाषा का अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। संसद सदस्य और विधायक क्रमशः संसद और राज्य विधानसभाओं में हो भाषा में जनकल्याणकारी मुद्दे पर बात रख सकेंगे। हो भाषा के उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा जैसी अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाएँ हो भाषा में लिख सकेंगे।
हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल होने से इसे संरक्षित करने, बढ़ावा देने एवं जन जन प्रसारित हो सकेंगी और वैश्विक स्तर की पहचान मिल पाएगी।
आपको जानकारी होगा कि आस्ट्रो एशियटिक भाषा परिवार में हो भाषा जनगणना 2011 के अनुसार चौथी बड़ी जनजातीय विस्तृत भाषा है। जिनकी अपनी लिपि वारंग क्षिति है। आपको जानकारी है कि आस्ट्रो एशियटिक भाषा परिवार की हो भाषा जनगणना 2011 के अनुसार चौथी बड़ी जनजातीय भाषा है। हो भाषा ही हो आदिवासियों एवं संस्कृति की जीवन रेखा है। अगर हो भाषा मृत हो जाती है तो उस भाषा के साथ जुड़ी हो आदिवासियों की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान,परम्पराएं और रीति रिवाज भी समाप्त हो जाएंगी।
आज के इस अभियान में मुख्य रूप से श्री रबिन्द्र गिलुवा, श्री प्रेम सिंह डांगिल, श्री हेमंत सामड, श्री पंकज बांकिरा, श्री मंजिल बनरा, श्री गौतम गागराई, श्री मंगल सिंह केराई, सुश्री सुजाता हांसदा एवं काफी संख्या में KNT छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

