अब सीएस वसूली का खेल वॉट्सपकॉल, टेलीग्राम, फेस टाईम से जिले में चल रहा वसूली अभियान।

 

जिला प्रशासन मुक दर्शक बनी हुई हैं, संवेदकों से जीएसटी मद में भी सीएस के रूप में कमिशन वसूली की जा रही है, जिसका विरोध कई संवेदक खुल कर कर रहें हैं।


 चाईबासा ( संतोष वर्मा ) :  पश्चिमी सिंहभूम जिला के समाहरणालय में ईडी, सीबीआई, एनआईए का मुख्यालय भी खुल जायेगा तो भी योजनाओं की स्वीकृति पर कार्यकारी एजेंसी से कमिशन वसूलने में नहीं डरेंगें। गौर तलब है कि डीएमएफटी की योजना हो या सवास्थ्य संबंधित योजना हो, सभी में जिला और सीएस के नाम पर समाहरणालय में बैठे पदाधिकारी के इशारे पर संवेदकों से कार्यकारी एजेंसी कमिशन वसूली कर रहे हैं। विदित हो की ग्रामीण संवेदक संघ के द्वारा शिकायत किए जाने के बाद से विशेष प्रमंडल में 11 परसेंट के बदले अब 8 प्रतिशत कमिशन लिए जाने की सूचना मिल हो रही है, 8 प्रतिशत भी कमिशन देने में संवेदक असमर्थ हैं, लेकिन बेरोजगारी का आलम यह है की बाजार से बयाज पर या उधार कर के भी कम मिलने के लालच में कमिशन देने पर मजबूर हैं। 


सोशल मीडिया और अखबार में खबर छापने से कमिशन वसुली पर कुछ अंकुश लगा है, फिर भी वॉट्सप कॉल, टेलीग्राम, फेस टाईम से वसूली अभियान चल रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्र के विकास और कल्याण के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अरबों रुपए इस जिला को मिल रहा है, जिसे अभियंता और समाहरणालय में बैठ विकास पदाधिकारी बंदर बांट कर रहें हैं, आश्चर्य की बात यह है कि इस लुट में, कमिशन वसूली में माननीयों के नाम भी शामिल कर दिए हैं, ताकि राजनीतिक संरक्षण मिल सके।



चर्चा का विषय बना हुआ है कि समाहरणालय में बैठ एक पदाधिकारी के द्वारा कार्यकारी एजेंसी को इस तरह से मनोबल बढ़ा दिया जाता है की आप सोंच भी नहीं सकतें हैं, कहतें हैं कि सरकार अपना है, कोई कुछ भी नही बिगाड़ सकता है,अभी हम सेवानिवृत होने तक चाईबासा में ही रहेंगे, मेरा पहुंच सीएमओ तक है। उक्त पदाधिकारी के नाम से समाहरणालय के सभी कर्मचारी पदाधिकारी डरे सहमे रहते हैं,ऐसा लगता है की जिला का बॉस यही पदाधिकारी हैं। 


चर्चा तो यह भी है की विपक्ष गोपनीय तरीके से पश्चिमी सिंहभूम जिला में विकास योजनाओं में कमिशन वसूली पर रिपोर्ट तैयार कर केन्द्रीय एजेंसी को भेज दिया है, जिसमें जिला के कई संवेदकों का भी योगदान है। 

 तीन माह पहले मिली योजना आज तक हुई कार्य शुरू

तीन माह पहले जिला से दिया गया डीएमएफटी योजना का आज तक काम शुरू नही हो सका है,कारण रहा कि विलम्ब से वर्क ऑर्डर दिया जाना। विलम्ब का कारण कमिशन वसुली है।
सूत्रों के अनुसार डीएमएफटी फंड से बड़ी बड़ी योजना लेने का निर्देश मुख्य सचिव से मिलने के बाद से ही समाहरणालय में बैठे पदाधिकारियों के हांथ पाऊं फूलने लगें है।एक करोड़ से अधिक की योजना पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग को दिए जाने का निर्णय से स्पेशल डिविजन सबसे चिंतित है, क्योंकि उक्त एजेंसी ही वसूली करने में नम्बर वन हैं।

 गाईड लाईन का भी हो रहा उल्लघंन

पीएमकेकेवाई व डीएमऐफटी के गाईड लाईन का उल्लंघन किए जाने के कारण खनन प्रभावित क्षेत्र के जनता का विकास और कल्याण अपेक्षित रूप से नही हो पा रहा है।जबकि यह योजना सर्वोच्च प्राथमिकता खनन प्रभावित क्षेत्र के लिए ही है। 

 ब्याज पर कर्ज लेकर संवेदक सीएस के नाम पर कमिशन देने को मजबूर

ब्याज पर कर्ज ले कर संवेदक सीएस के नाम पर कमिशन देने पर मजबुर हैं। कार्यकारी एजेंसी संवेदकों का खून चूस रही है।जिला प्रशासन मुक दर्शक बनी हुई हैं। संवेदकों से जीएसटी मद में भी सीएस के रूप में कमिशन वसूली की जा रही है, जिसका विरोध कई संवेदक खुल कर कर रहें हैं। तीन साल में जिला के विकास योजनाओं में कमिशन वसूली की शिकायत सत्ता पक्ष और विपक्ष भी कर चुके हैं। विदित हो कि सत्ता पक्ष सीएम से शिकायत किए हैं, वहीं विपक्ष लगातार राज्यपाल से कर चुके हैं। कई गैर सरकारी संगठनों के द्वारा भी इस मामला को उठाया जाता रहा है, लेकिन भ्रष्ट पदाधिकारी, अभियंता की ऊंची पहुंच, पैरवी से कोई भी करवाई नही होती है।

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