राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ग्रामीण कार्य विभाग में अभियंताओं का ट्रान्सफर पोस्टिंग लटका, विकास कार्य हो रहें प्रभावित, संवेदकों को भी हो रही है परेशानी।


 चाईबासा ( संतोष वर्मा ) :  विशाल खालको ग्रामीण कार्य प्रमंडल चकरधारपुर और राधे श्याम मांझी चाईबासा का  कार्यपालक अभियंता बनना तय। गौर तलब है कि दिसम्बर से चाईबासा ग्रामीण कार्य प्रमंडल का पद रिक्त है,वहीं मार्च से चकरधरपुर का पद रिक्त है,जिसके कारण संवेदकों का भुगतान नहीं हो रहा है, निविदा निष्पादन और सीएस का कार्य लम्बित है, यूं कहा जा सकता है कि प्रमंडल का सभी कार्य ठप पड़ा हुआ है। माननीय विधायकों के द्वारा दोनो प्रमण्डल में स्थाई कार्यपालक अभियंता का पदस्थापन की मांग किए हैं, वहीं उपायुक्त अनन्या मित्तल के द्वारा मुख्य सचिव,ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव को रिक्त पद पर पदस्थापन की बात कही है।

सूत्रों की माने तो इसी सप्ताह दोनो प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता का पदस्थापन आदेश निकल जायेगा।ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता का ट्रान्सफर पोस्टिंग की अधिसूचना लटका। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लिस्ट फाईनल होने तथा प्रधान सचिव, विभागीय मंत्री का अनुमोदन मिलने के बाद अधिसूचना जारी किया जाना था लेकिन कई परमंडल में माननीयों के अनुशंसा के विरुद्ध किसी अन्य का नाम की जानकारी होने के बाद प्रधान सचिव और मंत्री पर दबाव बनाने से अधिसूचना को होल्ड पर रख दिया गया है।

विदित हो कि चकरधरपुर प्रमंडल में पदस्थापित सहायक अभियंता विशाल खालको को इस प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापन कराने के लिए तीन माननीय और एक ठिकेदार लगे हुए हैं, स्वंधित संचिका में विशाल खालको का नाम नहीं होने की सूचना मिलने के बाद प्रमंडल के ही एक ठिकेदार जिला के माननीय से सम्पर्क कर अधिसूचना को रुकवा देने की चर्चा ठीकेदारों के बीच जोरों पर है,वहीं चाईबासा प्रमंडल में मुख्य अभियंता कार्यालय में पदस्थापित कुलदीप मिंज को कार्यपालक अभियंता के लिए भी राज्य के कांग्रेसी नेता एड़ी चोटी लगा रहें हैं।

पश्चिमी सिंहभूम के दोनो प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता बनने के लिए राजनीतिक पैरवी के साथ साथ आर्थिक बोली भी लगाने की चर्चा जोरों पर है।ऐसा लगता है की डीएमएफटी की योजना ग्रामीण कार्य विभाग को दिए जाने से दोनो प्रमंडलों में घमासान मचा हुआ है। झारखंड राज्य में ट्रान्सफर पोस्टिंग उद्योग का रूप ले चुका है,इस तरह का खेल आम है,यहां किसी को ईडी सीबीआई का डर नही है, चाहे जितने अभियंता और पदाधिकारी जेल जाते रहें।
 
अब देखना है कि दोनो प्रमंडल में कब तक स्थाई कार्यपालक अभियंता का पदस्थापन होता है यह देखने की बात है?

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