जिला परिषद की सामान्य बैठक में जॉन मिरन मुंडा ने डीएमएफटी फंड को जिला परिषद द्वारा संचालित करने और सरकार द्वारा जिला परिषद को मात्र 2500 ₹ का मानदेय का बिरोध दर्ज कर मामला को उठाया


 चाईबासा ( संतोष वर्मा ) :   जिला परिषद की सामान्य बैठक में जॉन मिरन मुंडा ने डीएमएफटी फंड को जिला परिषद द्वारा संचालित करने और सरकार द्वारा जिला परिषद को मात्र 2500 ₹ का मानदेय का बिरोध दर्ज कर मामला को उठाया। उन्होंने कहा की हमारा जिला देश को सबसे ज्यादा टैक्स देता है और जिला का बिकास के लिए डीएमएफटी फंड बना लेकिन इस फंड को सांसद और बिधायक फंड बना दिया गया है। सांसद और बिधायक के लिए उनका अपना खुद का फंड है उसके बावजूद डीएमएफट फंड को अपने मन मर्जी से खर्च कर रहें हैं।सारा जगह डीएमएफट फंड का दुरूपयोग कर लुटा जा रहा है। अगर पंचायत के प्रतिनिधिओ के माध्यम से खर्च होता है तो जिला का बिकास तो होता ही जनप्रतिनिधि भी आर्थिक रूप से सम्पन्न होते और देश का सबसे मजबूत प्रतिनिधिओ में पहचाने जाते। 


डीएमएफटी फंड पेयजल के नाम से खर्च हो रहा है लेकिन लोग चुवा का पानी पीने को मजबूर हैं। उसके अलावा मानदेय को राज्य के मुख्य मंत्री को जिस मानक पर मानदेय तय होता है उसी तर्ज पर जिला परिषद सदस्य, प्रमुख और मुखिया, वार्ड सदस्यों का तय होना चाहिए। आज सभी जिला परिषद सदस्यों को योजनाओं में कमीशन लेने वाला बना दिया गया है जनता के बीच अपना बात नहीं बोल पाता है की मेरे पास आने वाला रुपया कैसे आता है। इसलिए पीसी सिस्टम को खत्म किया जायेगा तो योजनाओं में लूट अपने आप बंद हो जायेगा। इसके अलावा dmft फंड को सिंचाई योजनाओं में सबसे ज्यादा खर्च करने का बात रखा गया जिससे रोजगार के साथ पेयजल समस्या अपने आप खत्म हो जायेगा। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मती  से इस प्रस्ताओ को पास किया गया।

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