चाईबासा : अखिल भारतीय क्रान्तिकारी आदिवासी महासभा के बैनर तले जन समस्या को लेकर प्रधानमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा मांग पत्र, ग्रामिणों संघ किया प्रदर्शन


चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : अखिल भारतीय क्रान्तिकारी आदिवासी महासभा के बैनर तले आज पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गाँधी मैदान चाईबासा से विशाल जूलूस निकालकर उपायुक्त, चाईबासा, प० सिंहभूम के माध्यम से आपको ज्ञापन सौंप रहे हैं। इस ज्ञापन के माध्यम से कहना चाहेंगे की हमारा जिला पूरे भारत देश का सबसे ज्यादा खनिज सम्पदा से भरा पड़ा है और देश को टैक्स देने वाला पहला नम्बर पर आता है। यहाँ टाटा, रुँगटा, शाह ब्रदर्श, उषा मार्टिन, टी०पी० शाह जैसे देश के बड़े पूँजीपति लौह अयस्क पर अंग्रेजो की समय से अपना व्यापार चला रहे हैं।


आज ये सभी देश विदेशों में सबसे अमीर व्यक्तियों में हो गये। परन्तु यहाँ के 90 प्रतिशत आबादी वाले आदिवासी भूखें नंगे हैं। लकड़ी, दातुन, पत्ता बेचना और रोजगार के लिए पलायन करना ही जिन्दा रहने का सहारा बना हुआ है। आज भी गंदा नाला का पानी को धुंआ बनाकर पीने को विवश हैं और आज भी बिजली और सड़क गाँव-गाँव तक नहीं पहुँचा है। यहाँ का खदान और सरकारी मिट्टी के कामों में मशीन लगाकर काम किया जाता है जो बहुत दुखद बात है। 

जिला में D.M.F.T. फण्ड 28 हजार करोड़ रूपये के रूप में जमा है लेकिन बिना ग्राम सभा किये ही अधिकांश योजनाएं ली जा रही है और लूट का फण्ड हो गई है।


ये बात माननीय गृहमंत्री अमित शाह ने कही थी। चापाकल और जल मिनार खराब है लेकिन बनाने का जिम्मा कोई नहीं ले रहे है। उपर से अब वर्षों का बिजली बिल फर्जी तरीके से 20-60 हजार रूपये तक हर गरीब के घरों में विभाग द्वारा भेजने से लोग काफी आकोशित हैं। पूर्व में भी फर्जी बिजली बिल पर सुधार एवं पिछले 15-20 सालों का बिल माफी करने को लेकर अधीक्षण बिजली विभाग चाईबासा के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री झारखण्ड सरकार को ज्ञापन सौंपा गया था जो कि अब तक अमल नहीं हुआ है। गरीबों को लिगल नोटिस भेजकर बिजली बिल का वसूली किया जा रहा है ग्रामीण खेत, जमीन बेचकर बिजली बिल भुगतान करने को मजबूर हो रहे हैं।

अतः ऐसे हालातों में हमारा संगठन प० सिंहभूम का जनसमस्याओ का निराकरण करने एवं विकास को लेकर आपसे मांग करते हैं कि :

(क) कि प० सिंहभूम का पलायन रोकने के लिए तमाम खदान टाटा (नोवामुण्डी), सेल (गुवा-चिडिया, मनोहरपुर). रेलवे साईडिंग जामदा एवं एसीसी में 75% स्थानीय लोगों को रोजगार देने एवं लोडिंग-अनलोडिंग काम को मजदूरों से कराया जाए एवं आयुक्त कोल्हान को निर्देश दिया जाय कि वो सभी प्रबंधक को बुलाकर पलायन को रोकने के लिए स्थानीय बेरोजगारों को काम दिया जाएऔर मजदूरों का मजदूरी, ०००, ग्रेच्युटी आदि का भी गारण्टी ले।

(ख) कि तमाम खेतों को नदी नालों एवं जंगलों में श्रृंखलाबद्ध छोटे-छोटे चेक डेम का निर्माण कर सिंचाई सुविधा कराया जाए। टाटा कम्पनी रामतीर्थ नदी, सेल कोयल कारों नदी एवं एसीसी कम्पनी गुमड़ा नदी में डेम निर्माण कर एवं बन्द पड़े खदान का पानी को पाईप लाईन से अपने अपने क्षेत्रों के 10 कि0मी0 वाले प्रभावित गाँवों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराया जाए।

(ग) कि खराब चापाकल एवं जल मिनारों की अविलम्ब मरम्मति कराया जाए एवं जल मीनारों में लगे सामग्रीयों की गुणवत्ता और उतने दिनों से खराब पड़े रहने के बावजुद संवेदक मरम्मति क्यों नहीं कराया जिसके कारण आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा इसका जाँच कर उचित कानूनी कार्यवाही हो। (खराब चापाकल एवं जल मिनारों की सूची) 1

(घ) कि बिजली ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है और सपना भी लेकिन अब 15-20 वर्षों पहले वाले बिजली बिल बिना मीटर बिना रीडिंग लिए और हर माह लेने की जगह पर एकाएक 20-60 हजार रूपये गरीब आदमी के लिए नोटिस देकर वसूली करना मानसिक प्रताड़ना का रूप ले लिया हैं। हालात ऐसा है कि रोजगार भी नहीं है और कोरोना काल में तो लोगों का आर्थिक हालत और बुरा हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लोगों को 6-10 बजे रात को सबसे ज्यादा आवश्यकता पड़ता है लेकिन उसी समय बिजली नहीं दी जाती है। 24 घण्टों में मुश्किल से सिर्फ 5 घण्टे ही कट कट कर बिजली रहती है। जब सरकार बड़े-बड़े उद्योग घरानों को करोड़ों का लोन माफ कर सकती है तो एक गरीब परिवार का बिजली बिल क्यों नहीं माफ कर सकती है। इसके आलावा विभाग द्वारा जब भी ट्रॉसफरमर बदली अथवा मरम्मति का काम करना पड़ता है तो लोगों से मनमुताबिक पैसा उगाही किया जाता है नहीं देने पर काम नहीं किया जाता है। इस पर भी रोक लगाया जाये। (फर्जीवाड़ा बिजली बिल का सूची ) - 2

(ड) कि डीएमएफटी फण्ड जो जिला का विकास ग्राम सभा एवं प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर कराना है परन्तु जामदा, नोवामुण्डी, गुवा, किरीबुरू, झींकपानी, करमपदा, मनोहरपुर क्षेत्रों को देखा जा सकता है कि क्षेत्र आज भी कितना पिछड़ा है। इसके अलावा इस फण्ड को विधायक, संसद का फण्ड बना दिया गया है। अगर इस फण्ड को जिला परिषद, प्रमुख एवं मुखियाओं के द्वारा ग्राम सभा द्वारा चयनित योजनाओं पर काम होता तो यह जिला कुछ ही सालों में विकसित जिला के रूप में खड़ा हो जाता।

अतः माननीय महोदय से नम्र निवेदन है कि जिला के भूख एवं गरीबी को दूर करने के लिए रोजगार की व्यवस्था की गारण्टी डीएमएफटी फण्ड को लूट फण्ड बनाने पर रोकने, पेयजल एवं फर्जी बिजली बिल से हो रहे आम ग्रामीणों को राहत देने की उचित पहल करें। इसके लिए हम सभी आपका आभारी रहेंगे।

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