किसके ईशारै पर पहूंच रही बड़े ठेकेदारों के योजना स्थल तक बालू, एकलव्य विद्यालय के निर्माण में उपयोग किए जा रहे बालू पर उठ रहे सवाल।


स्कूल परिसर में एक लाख सीएफटी से अधिक बालू का किया गया है भंडारण

गुदड़ी में निर्माणाधीन एकलव्य विद्यालय के प्रांगण में किया गया बालू का भंडार...

चाईबासा ( संतोष वर्मा ) : जब राज्य में बालू घाटों का टेंण्डर ही नहीं हुई तो ठेकेदारों को बालू असानी से उपलब्ध कैसे हो रही है। किया विभाग के पदाधिकारी के सांठ गांठ से बालु उपलब्ध हो रहें या फिर जिले के आलाधिकारियों के ईशारे पर। पश्चिम सिंहभूम जिला के अत्यन्त नक्सल प्रभावित गुदड़ी प्रखंड के कांसकेल में एकलव्य आवासीय विद्यालय का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। 

सूत्रों के अनुसार लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से स्कूल का निर्माण कराया जा रहा है।

विद्यालय सभी सुविधाओं से लैस होगी। यहां छात्र-छात्राओं के पढ़ने व रहने के लिए अलग-अलग छात्रावास भी बनाया जा रहा है। विद्यालय का निर्माण केन्द्र सरकार की विशेष योजना के तहत केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा अत्यंत नक्सल प्रभावित गुदड़ी प्रखंड के आदिवासी व अन्य समुदाय के गरीब छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए करा रहे है। विद्यालय के निर्माण से गुदड़ी प्रखंड क्षेत्र के लोगों में भारी हर्ष व्याप्त है। क्योंकि उनके बच्चे इस स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर बेहतर इंसान व रोजगार से जुड़ सकेंगे। इससे न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र उन्नति की ओर अग्रसर होगा। इस तरह का विद्यालय पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुंडी व अन्य प्रखंडों में भी बनाया जा रहा है।

रांची के ठेकेदार को मिला है ठेका

कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि विद्यालय का निर्माण का ठेका रांची के ठेकेदार सुनील अग्रवाल को दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि विद्यालय भवन के निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा बालू पास के कारो नदी से ट्रैक्टर के माध्यम से अवैध तरीके से मंगाया जा रहा है। गुदड़ी प्रखंड कार्यालय में अंचलाधिकारी व बीडीओ नहीं रहने का लाभ ठेकेदार द्वारा उठाया जा रहा है। इस निर्माणाधीन एकलव्य स्कूल प्रांगण में 4-5 स्थानों पर लगभग एक लाख सीएफटी से अधिक बालू का भंडारण किये जाने की संभावना जताई जा रही है।

ठेकेदार ने फोन नहीं उठाया....

कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों से ठेकेदार सुनील अग्रवाल का सम्पर्क नम्बर प्राप्त हुआ। उनसे बालू से संबंधित सवाल करने की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने पूरा रिंग होने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया। जिस कारण बालू कहां से मंगाया जा रहा है, बालू अवैध है, इसका चलान है अथवा नहीं ! इस बाबत वह अपना पक्ष नहीं दे पाये। 

मामला गंभीर है.....

इसलिए खनन विभाग को चाहिए की मामले की निष्पक्ष जांच कर क्षेत्र की जनता को सच्चाई बताये. क्योंकि जनता का यह आरोप है कि ठेकेदार बालू का पूरा पैसा बचा रहे हैं. अर्थात मामूली खर्च पर अवैध तरीके से बालू उन्हें आसानी से प्राप्त हो रहा है।

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