विश्व रंगमंच दिवस में रांची से सरायकेला तक रंग कर्मियों में हो रही नाटक मंचन की चर्चा


सरायकेला ( दीपक कुमार दारोघा ) : विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची से सरायकेला तक रंग कर्मियों में नाटक मंचन की चर्चा है।


कोई कहता है कि झारखंड में  नाटक मंचन विलुप्त प्राय है। तो कोई कहता सरायकेला में ओड़िया भाषी नाटक अभिनय कला को बचाए रखा है। रंग कर्मियों की आर्थिक स्थिति दयनीय के कारण रंग कर्मियों की प्रतिभा राजधानी तक पहुंच नहीं पा रही है।


सरायकेला गणपति नाट्य अनुष्ठान के रंगकर्मी बद्री नारायण ने बताया कि 20 अप्रैल से नाटक प्रतियोगिता होगी। विचार विमर्श किया गया है। गणपति नाट्य अनुष्ठान वर्ष 1966 से सक्रिय है। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर समस्त रंगकर्मी एकजुट हैं। विचार विमर्श के बाद तय हुआ कि 3 नाटक का मंचन होगा।
 
इसमे "अकुहा कहानी सुणीबो किए", "आंखी लुहो को कोरीछी साथी" के अलावे "सुखो सातोपारो,दुखो निजोरो" नाटक मंचन होगा। संबंधित संस्था नाटक मंचन करेंगे।
दूसरी और रांची में वरिष्ठ रंगकर्मी कमल बोस, रीना सहाय, विनोद जयसवाल, जयदीप सहाय ने मीडिया को जानकारी दी। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर रांची के ऑड्रे हाउस इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र में 27 मार्च से 29 मार्च तक तीन दिवसीय छोटनागपुर राष्ट्रीय नाट्य उत्सव होगा। बताया गया कि कार्यक्रम युवा नाट्य संगीत अकादमी द्वारा आयोजित है। बिहार के भागलपुर, झारखंड के जमशेदपुर, नाट्य मंडली आकर्षण का केंद्र होगा।


युवा नाट्य संगीत अकादमी बैनर तले विदेशिया नाटक मंचन होगा। ताल जमशेदपुर द्वारा भेड़िए नाटक का मंचन होगा।
भागलपुर रंगग्राम संस्कृति केंद्र द्वारा पोंगापंडित नाटक का मंचन होगा। अंतिम दिन वसुंधरा आर्ट बैनर तले परीक्षा नाटक का मंचन होगा।

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