संकेतों की भाषा से संवाद और समावेशन की नई कहानी लिखता नोआमुंडी

 संकेतों की भाषा से संवाद और समावेशन की नई कहानी लिखता नोआमुंडी




 टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा ‘सबल’ के माहव्यापी जागरूकता अभियान कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित किया विशेष सामुदायिक कार्यक्रम 



संतोष वर्मा

चाईबासाः*जब शब्द साथ नहीं होते, तब हाथों के संकेत संवाद का माध्यम बनते हैं।* यही संवाद, समझ और समानता का संदेश लेकर टाटा स्टील फाउंडेशन के ‘सबल’ कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य पर नोआमुंडी में एक विशेष सामुदायिक आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि बधिर संस्कृति को समझने, बधिर व्यक्तियों के अधिकारों एवं गरिमा का सम्मान करने और समाज में उनके लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक सोच को मजबूत करना था।

इस विशेष आयोजन में 172 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें बधिर बच्चे, उनके अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी, समुदाय के सदस्य, जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोग तथा नोआमुंडी और जोड़ा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक शामिल रहे। यह आयोजन ‘सबल’ द्वारा अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में चलाए गए माहव्यापी जागरूकता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा था। अभियान के अंतर्गत नोआमुंडी, जगन्नाथपुर और जोड़ा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता एवं सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन पहलों के माध्यम से लगभग 1,138 लोगों तक पहुंच बनाई गई, जिससे सांकेतिक भाषा और बधिर संस्कृति के प्रति समझ, संवेदनशीलता तथा स्वीकार्यता को बढ़ावा मिला।

आयोजन का विशेष आकर्षण बधिर विद्यार्थियों द्वारा संचालित भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) सीखने का सत्र रहा। प्रतिभागियों ने बुनियादी अभिवादन, वर्णमाला और रोजमर्रा के जीवन में उपयोग होने वाले विभिन्न सांकेतिक संकेत सीखे। कार्यक्रम में भारतीय सांकेतिक भाषा में आयोजित विशेष क्विज प्रतियोगिता ने भी प्रतिभागियों में खासा उत्साह पैदा किया। बधिर विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं, प्रोजेक्ट गर्ल्स स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से विविधता, समानता और समावेशन का संदेश दिया।

कार्यक्रम का एक और प्रभावशाली क्षण इंटर कॉलेज, नोआमुंडी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक में बधिर व्यक्तियों, उनके परिवारों और समुदायों के सामने आने वाली विभिन्न सामाजिक चुनौतियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने इस महत्वपूर्ण संदेश को सामने रखा कि किसी व्यक्ति को उसकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं, प्रतिभा और संभावनाओं से पहचाना जाना चाहिए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर बधिर विद्यार्थियों द्वारा केक काटने का समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रेरणा समिति की प्रतिनिधि अभिश्वेता त्रिपाठी ने कहा, _“बधिर संस्कृति और सांकेतिक भाषा के बारे में अधिक जानकर मुझे बहुत खुशी हुई। यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण सीखने का अनुभव रहा है और इससे हमें अपने समुदाय में बधिर व्यक्तियों के साथ अधिक आत्मविश्वास और सार्थक तरीके से संवाद करने के लिए प्रोत्साहन मिला है।”_ 

कार्यक्रम में प्रेरणा समिति के प्रतिनिधियों, नोआमुंडी कॉलेज के डॉ. मनोजित बिस्वास, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, बधिर विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों सहित विभिन्न हितधारकों और गणमान्य लोगों की सहभागिता रही।

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