हाथी-मानव संघर्ष, सड़क निर्माण, वनाधिकार एवं अंतरविभागीय समन्वय के मुद्दों पर मंत्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में हुई

हाथी-मानव संघर्ष, सड़क निर्माण, वनाधिकार एवं अंतरविभागीय समन्वय के मुद्दों पर मंत्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक



मंत्री दीपक बिरूवा ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया



संतोष वर्मा

Chaibasa ः पश्चिमी सिंहभूम जिले में सूबे के माननीय मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा परिवहन विभाग, श्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त श्री मनीष कुमार, सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री अभिरूप सिन्हा, संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में विशेष रूप से जिले में हाथी-मानव संघर्ष की वर्तमान स्थिति, हाथियों के आवागमन एवं उनके कॉरिडोर, प्रभावित लोगों को मुआवजा भुगतान, ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था तथा वन विभाग एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। माननीय मंत्री के मार्गदर्शन में विभिन्न मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक उपरांत उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि मंत्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि हाथी-मानव संघर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें लंबित मुआवजा मामलों का शीघ्र निष्पादन, प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं बचाव व्यवस्था को सुदृढ़ करना तथा वन विभाग के साथ मिलकर आधुनिक एवं प्रभावी तंत्र विकसित करना प्रमुख विषय रहे।

उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान समय में उपलब्ध अद्यतन तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा की गई, ताकि हाथियों की गतिविधियों की बेहतर निगरानी की जा सके और समय रहते ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके। उन्होंने कहा कि बैठक में चिन्हित सभी मुद्दों को संज्ञान में लेते हुए माननीय मंत्री के निर्देशानुसार संबंधित विभागों द्वारा शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में जिले की महत्वपूर्ण सड़कों से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। आरईओ एवं आरसीडी के अंतर्गत संचालित सड़कों के निर्माण एवं विकास कार्यों में यदि कहीं एनओसी लंबित है अथवा अंतरविभागीय समन्वय से संबंधित कोई समस्या है, तो उसके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने पर चर्चा की गई। मंत्री दीपक बिरूवा ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक में वनाधिकार से जुड़े मामलों पर भी विशेष चर्चा हुई। सामुदायिक वनाधिकार एवं व्यक्तिगत वनाधिकार के वास्तविक एवं पात्र लाभुकों को समयबद्ध तरीके से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने पर बल दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं एवं अधिकारों का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिरूप सिन्हा ने हाथियों के आवागमन और बदलते कॉरिडोर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हाटगम्हरिया सहित जिले के कुछ क्षेत्रों में हाथियों की उपस्थिति लगभग स्थायी प्रकृति की है। उन्होंने बताया कि पूर्व में चिन्हित हाथी कॉरिडोर के अतिरिक्त कुछ अन्य क्षेत्रों में भी हाथियों की आवाजाही देखी जा रही है। विभिन्न मार्गों से हाथियों के आवागमन एवं उनके बदलते व्यवहार को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर और पारंपरिक माइग्रेशन पथ की पहचान तथा निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि कभी-कभी हाथियों के झुंड का कोई सदस्य अपने पारंपरिक मार्ग से भटक जाने के कारण अन्य क्षेत्रों में भी आवागमन शुरू हो जाता है। इसके अलावा भोजन की उपलब्धता एवं हाथियों के फीडिंग पैटर्न में होने वाले बदलाव के कारण भी उनका झुंड पारंपरिक मार्ग से हटकर सामुदायिक एवं आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकता है।

वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी एवं ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में पायलट स्तर पर ऑटोमेटेड सायरन तकनीक का प्रयोग भी किया जा रहा है, जिससे हाथियों की गतिविधियों की सूचना समय रहते स्थानीय लोगों तक पहुंचाई जा सके।

उन्होंने बताया कि हाथियों के लिए अनुकूल भोजन एवं चारे की प्रजातियों के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। वन क्षेत्रों एवं उपयुक्त भूमि पर बांस सहित हाथियों की पसंदीदा फॉडर प्रजातियों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि हाथियों को उनके प्राकृतिक एवं उपयुक्त आवास क्षेत्र में पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सके और उनका आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आवागमन कम किया जा सके।

बैठक में यह भी बताया गया कि हाथी-मानव संघर्ष से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई दल की भूमिका को और सुदृढ़ किया जा रहा है। सरकार के स्तर से अतिरिक्त क्यूआरटी को भी स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों पर त्वरित निगरानी, ग्रामीणों को सतर्क करने एवं आवश्यक कार्रवाई में सहायता मिलेगी।

माननीय मंत्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले के विकास, जनसुरक्षा एवं वन क्षेत्रों में निवासरत लोगों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक एवं समाधानपरक चर्चा की गई। बैठक में संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ चिन्हित समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

Post a Comment

Do live your Comments here! 👇

Previous Post Next Post