चंदन होनहागा ने उठाई आवाज: "कोल्हान अधीक्षक" की स्थायी पदस्थापना न होने से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था चरमराई, विधानसभा में भी गूंज चुका है मामला, बंद पड़े हैं कैम्प कोर्ट, चार साल होने को चला मानकी मुण्डा न्याय पंच का लेकिन एक स्थाई कोलहान अधीक्षक नहीं मिला सरकार को

 चंदन होनहागा ने उठाई आवाज: "कोल्हान अधीक्षक" की स्थायी पदस्थापना न होने से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था चरमराई, विधानसभा में भी गूंज चुका है मामला, बंद पड़े हैं कैम्प कोर्ट, चार साल होने को चला मानकी मुण्डा न्याय पंच का लेकिन एक स्थाई कोलहान अधीक्षक नहीं मिला सरकार को




प्रभार"की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं  मानकी-मुंडा हो रहे परेशान 

मनोहरपुर विधायक जगत माझी सदन में उठा चुके हैं कोल्हान अधीक्षक" की स्थायी पदस्थापना की आवाज


संतोष वर्मा

चाईबासा: कोलहान प्रमंडल चाईबासा में जिस उद्देश्य से आदिवासियों की जमीनी विवाद सुलझाने के लिए 23 अप्रैल 2023 को चाईबासा अनुमंडल कार्यालय परिसर में मानकी मुण्डा न्याय पंच अदालत को देश का पहला अदालत चालु किया गया था आज करीब चार साल बित गये लेकिन आज तक अबु राज्य अबुवा सरकार को इस कोर्ट को सुचारु रूप से संचालन के लिए एक स्थाई कोलहान अधीक्षक का पदस्थापन करने के लिए अधिकारी नहीं मिल रही है.अब आलम यह है की आज कोर्ट बंद पड़ा हुआ है,आदिवासियों को जमिनी विवाद में न्याय नहीं मिल रहा है.इधर यह भी चर्चा हो रही है की जबकी राज्य के मंत्री दीपका बिरूवा सदर विधानसभा के विधायक सह मंत्री है उसके बावजूद मानकी मुण्डा न्याय पंच के लिए स्थाई कोलहान अधीक्षक का पदस्थापन नहीं होना जिले का दुर्भाग्य है.इन्ही सब मामले को लेकर मानकी-मुंडा संघ (कोल्हान-पोड़ाहाट, केन्द्रीय समिति, सिंहभूम) के महासचिव चंदन होनहागा ने कोल्हान क्षेत्र की सदियों पुरानी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को बचाने के लिए *"कोल्हान अधीक्षक"* के पद पर स्थायी पदस्थापना की मांग एक बार फिर तेज कर दी है। इस संबंध में उन्होंने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के सचिव को आधिकारिक पत्र भेजकर तत्काल प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने का पुरजोर आग्रह किया है। चंदन होनहागा ने याद दिलाया कि यह मामला पहले विधानसभा में भी गूंज चुका है, जहां विधायक जगत माझी ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से इस महत्वपूर्ण पद पर स्थायी नियुक्ति की मांग की थी। तब सरकार ने उत्तर में स्वीकार किया था कि वर्तमान में यह पद रिक्त है और चाईबासा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को इसका अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, तथा झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की सेवा उपलब्ध होने पर स्थायी नियुक्ति की जाएगी। महासचिव चंदन होनहागा ने साफ तौर पर कहा कि कोल्हान अधीक्षक का पद इस क्षेत्र के प्रशासनिक, ऐतिहासिक और जनजातीय ताने-बाने का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बावजूद कई वर्षों से स्थायी नियुक्ति न होने के कारण पूरी पारंपरिक मानकी-मुंडा व्यवस्था पर गंभीर और प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

"प्रभार"की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं  मानकी-मुंडा हो रहे परेशान 

 चंदन होनहागा ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनुमंडल पदाधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपना किसी भी दृष्टिकोण से व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मानकी- मुंडाओं और आम जनता की परेशानियों को उजागर करते हुए कहा कि कोल्हान- पोड़ाहाट क्षेत्र के 18 प्रखण्डों के मानकी-मुंडाओं को अपनी रोजमर्रा की समस्याओं और प्रशासनिक कार्यों के निपटारे के लिए कोल्हान अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मुंडाओं का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे वे स्वयं को बेहद उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वर्तमान में चाईबासा में "मानकी-मुंडा न्याय पंच" संचालित है, जिसकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी कोल्हान अधीक्षक की होती है। इतने महत्वपूर्ण और गरिमामय पद का प्रभार में रहना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता। 

 बंद पड़े हैं कैम्प कोर्ट

पूर्व में कोल्हान के कई प्रमुख स्थानों पर "कोल्हान डाक बंगला" हुआ करते थे, जहाँ अधिकारियों द्वारा कैम्प कोर्ट लगाकर आम नागरिकों की समस्याओं की सीधी सुनवाई की जाती थी। स्थायी अधिकारी न होने से यह जनहितैषी व्यवस्था पूरी तरह ठप है। महासचिव चंदन होनहागा ने सरकार और विभाग से अनुरोध किया है कि विधानसभा में दिए गए आश्वासनों और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर परिस्थिति पर तत्काल विचार किया जाए। उन्होंने मांग की है कि कोल्हान क्षेत्र की गरिमा और स्वशासन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कोल्हान अधीक्षक के पद पर पूर्णकालिक और स्थायी अधिकारी की नियुक्ति अविलंब सुनिश्चित की जाए।

कोल्हान पोड़ाहाट मानकी मुंडा न्याय पंच न्यायालय यह देश की पहली आदिवासी कस्टमरी कोर्ट (पारंपरिक अदालत) है

चाईबासाःझारखंड के पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) में स्थित कोल्हान पोड़ाहाट मानकी मुंडा न्याय पंच न्यायालय यह देश की पहली आदिवासी कस्टमरी कोर्ट (पारंपरिक अदालत) है, जहाँ पारंपरिक मानकी-मुंडा स्वशासन प्रणाली के तहत मुकदमों का निपटारा किया जाता है। यह न्यायालय चाईबासा में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय परिसर के भीतर संचालित होता है, जहाँ आदिवासी समाज के आपसी और दशकों पुराने मामलों को आपसी सहमति और पारंपरिक नियमों से सुलझाया जाता है।

मानकी मुंडा न्याय पंच के बारे में मुख्य बातें:

23 अप्रैल 2023 को हुआ था  देश का पहला मानकी-मुण्डा न्याय पंच का न्यायलय उद्दघाटन

• स्थान: यह कार्यालय पश्चिमी सिंहभूम जिला (चाईबासा) में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय परिसर के पास संचालित होता है।

• उद्देश्य: यह कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र के हो व अन्य आदिवासी समुदायों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के तहत सिविल और सामाजिक मामलों का तेजी से निपटारा करता है।

• संरचना: इस पारंपरिक न्याय प्रणाली में मानकी, मुंडा और डाकूआ स्थानीय स्तर पर विवादों को सुलझाने का कार्य करते हैं।

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