महागठबंधन सरकार में शामिल राजद और माले की नेक नियति पर निर्भर है प्रणव झा की जीत
कॉंग्रेस प्रत्याशी की जीत का एक मात्र सहारा हेमन्त सोरेन हैं. सूत्र
इंडिया गठबंधन की दोनों प्रत्याशी की जीत का सेहरा हेमन्त सोरेन के माथे पर होगी
हेमन्त सोरेन ने SC कोटे से बैद्यनाथ राम को प्रत्याशी बना कर विपक्ष को औंधे मुँह गिरा दिया, कॉंग्रेस को भी सोंचने पर मजबूर कर दिया है
प्रणव झा की जीत सुनिश्चित के लिए हेमन्त सोरेन को आगे आना पड़ेगा, तभी कॉंग्रेस प्रत्याशी की जीत तय होगी
santosh verma
Chaibasa ः झारखण्ड में राज्य सभा का चुनाव में दोनों प्रत्याशी की जीत और हार का माला इंडिया महागठबन्धन के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को ही पहनाया जाएगा. झारखण्ड में महागठबन्धन का मुखिया हेमन्त सोरेन हैं, जिससे इन्कार नहीं किया जा सकता है. आज हेमन्त सोरेन की अगुवाई में महागठबन्धन की सरकार चल रही है. झामुमो के साथ साथ कॉंग्रेस, राजद और माले की ताल मेल और एक जुटता से सरकार चल रही है.हेमन्त सरकार में शामिल सभी पार्टी के विधायक की संख्या बल के आधार पर बैद्यनाथ राम जी और प्रणव झा की जीत सुनिश्चित दिख रही है, लेकिन राज्य के राजनीतिक गलियारों में विशेष कर भाजपा खेमे से ऐसी चर्चायें निकल रही है कि कॉंग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को माले और राजद के विधायक वोट नहीं देंगें. अब कॉंग्रेस के प्रत्याशी की जीत पर प्रश्नचिन्ह और ग्रहण किस प्रकार से लगाया जा रहा है, इसकी साजिश को भांपने और पैनी नजर रखने की जरूरत है.इस राजसभा चुनाव में हेमन्त सोरेन की आगे की राजनीतिक भविष्य टिकी हुई है.जिस तरह हेमन्त सोरेन ने अपने राजनीतिक विरासत को मजबूत करने के लिए पलामू प्रमंडल से SC से बैद्यनाथ राम को प्रत्याशी बना कर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया, वही कॉंग्रेस और राजद को सोंचने पर मजबूर कर दिया है. राजनीतिक धुरंधरों का मानना है कि हेमन्त सोरेन ने master stroke खेला है. अगर हेमन्त सोरेन ने सौरभ झा को जिताने में सफल हो जाते हैं तो, हेमन्त सोरेन के लिए यह दूसरा masters स्ट्रोक माना जाएगा, और यहीं से झामुमो की राजनीतिक का ग्राफ आसमान छुएगा, साथ ही झारखण्ड में यह माना जाने लगेगा कि, हेमन्त है तो, सब मुमकिन है. कॉंग्रेस आज की राजनीतिक परिवेश में झारखण्ड के बिना कोई जंग नहीं जीत सकती है, यूँ कह सकते हैं कि हेमन्त सोरेन के सहारे पर ही अपनी नैया पार लगा सकती है. निर्दलीय प्रत्याशी एवं भाजपा समर्थित परिमल नाथवाणी की निगाहें पूरी तरह राजद, माले पर टिकी है, अफवाहों का बाजार गर्म है, तरह तरह की चर्चाओं से कॉंग्रेस की नींद हराम हो चुकी है. कॉंग्रेस प्रत्याशी की जीत, महागठबंधन की नेक नियति पर निर्भर है, अब देखना है कि राजद सुप्रीमो और माले के लोग सौरभ झा के कंधे के साथ कंधे मिला कर खड़े होते हैं या कॉंग्रेस को गच्चा देकर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत का सेहरा पहनाते हैं, यह सब 18 तारीख तक कयासों का दौर चलता रहेगा. लेकिन इस चुनाव में एक बात साफ़ है कि हेमन्त सोरेन पर प्रणव झा की जीत टिकी हुई है.

